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Indian Railways: 17 साल बाद सीतामढ़ी–जयनगर–निर्मली रेल लाइन को हरी झंडी, मिथिलांचल–सीमांचल को मिलेगा विकास का सुपर ट्रैक

Updated at : 15 Jan 2026 8:31 AM (IST)
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Indian Railways

Sitamarhi-Jaynagar-Nirmali rail line approved

Indian Railways: सालों से फाइलों में कैद पड़ी जिस रेल लाइन का लोग इंतजार कर रहे थे, अब वह फिर से पटरी पर लौट रही है. 188 किलोमीटर लंबी सीतामढ़ी–जयनगर–निर्मली रेल परियोजना को 17 साल बाद डी-फ्रीज कर दिया गया है, जिससे मिथिलांचल और सीमांचल में विकास की नई उम्मीद जगी है.

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Indian Railways: सीतामढ़ी–जयनगर–निर्मली (सुरसंड होते) 188 किलोमीटर लंबी बहुप्रतीक्षित नई रेल लाइन परियोजना को आखिरकार हरी झंडी मिल गई है. वर्ष 2008-09 में स्वीकृत इस परियोजना को रेलवे बोर्ड ने 2019 में रोक दिया था. 29 सितंबर 2025 को इसे डी-फ्रीज कर दिया गया है.

अब पूर्व मध्य रेलवे (निर्माण संगठन) के महेंद्रुघाट, पटना कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे कराकर डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके साथ ही एक बार फिर से इस महत्वाकांक्षी रेल लाइन को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है.

फाइलों से निकलकर जमीन पर उतरने की तैयारी

रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) महबूब आलम द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लंबे समय से रुकी इस परियोजना को अब दोबारा गति दी जा रही है. डीपीआर तैयार होने के बाद आगे की निर्माण प्रक्रिया का रास्ता साफ होगा. नया टेंडर भी आमंत्रित कर दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि रेलवे इस बार परियोजना को लेकर गंभीर है. बिहार सरकार के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के साथ हुई बातचीत में भी इस परियोजना को आगे बढ़ाने की पुष्टि की गई है.

मिथिलांचल और सीमांचल को मिलेगा सीधा फायदा

इस रेल लाइन के शुरू होने से सुपौल, मधुबनी और सीतामढ़ी समेत पूरे मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी. अभी इन इलाकों में रेल नेटवर्क सीमित है, जिससे व्यापार और आवागमन में कठिनाइयां होती हैं.

नई रेल लाइन बनने के बाद न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापार को भी बड़ा बाजार मिलेगा. इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन पर भी कुछ हद तक अंकुश लग सकेगा.

नेपाल सीमा तक मजबूत होगा संपर्क

सुपौल जिले के ललितग्राम से वीरपुर तक प्रस्तावित 22 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को भी हरी झंडी मिल चुकी है. इसके लिए फाइनल लोकेशन सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने को लेकर टेंडर आमंत्रित किया गया है. रेलवे बोर्ड ने 9 सितंबर 2025 को इस परियोजना के सर्वे को मंजूरी दी थी और 9 दिसंबर 2025 को लागत अनुमान को स्वीकृति मिली. इस रेलखंड के शुरू होने से नेपाल सीमा तक आवागमन और सुगम होगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सीमावर्ती विकास को नई गति मिलेगी.

विकास के नक्शे पर उभरेगा सुपौल

ललितग्राम–वीरपुर रेल लाइन सुपौल जिले के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. यह न सिर्फ जिले को बेहतर रेल कनेक्टिविटी देगी, बल्कि भारत-नेपाल सीमा के पास आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करेगी. सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा और सुरक्षा व्यवस्था भी और सशक्त हो सकेगी.

वर्षों का इंतजार अब खत्म होने की उम्मीद

करीब दो दशक से जिस रेल लाइन की लोग सिर्फ चर्चा करते थे, अब उसके साकार होने की उम्मीद फिर से जगी है. डीपीआर और सर्वे प्रक्रिया पूरी होते ही यह परियोजना वास्तविक निर्माण की ओर बढ़ेगी. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो आने वाले वर्षों में यह रेल लाइन बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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