संपत्ति मामले में मनोज अग्रवाल ने चंद्रिका को दिया जवाब, बोले- बदनाम करने की कोशिश

मनोज अग्रवाल और चंद्रिका
Manoj Agarwal: चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मनोज अग्रवाल की संपत्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाये हैं. उन्होंने एक दस्तावेज जारी किया है.
मुख्य बातें
Manoj Agarwal: कोलकाता: बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने तृणमूल कांग्रेस की ओर से संपत्ति के संबंध में लगाए गए आरोपों का जवाब दिया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पोस्ट में आयोग के प्रवक्ता आकाश बानी और राज्य मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य को टैग किया गया है. पोस्ट में कहा गया है कि मनोज अग्रवाल की पत्नी के पास विवाह से पहले से ही यह संपत्ति थी. वो 1983 से लगातार आयकर रिटर्न दाखिल कर रही हैं. उनके वित्तीय मामले पारदर्शी और कानूनी हैं. इसके बाद, मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने एक कहावत का हवाला देते हुए शिकायतकर्ताओं पर कटाक्ष किया है. इसमें लिखा है- बदनामी करने की कोशिश करोगे तो फांसी पर चढ़ जाओगे. सत्य और कानून का शासन विजयी होगा.
भेजा था रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट पोस्ट
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सोमवार रात मनोज अग्रवाल को 2013 की एक समाचार रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हुए लिखा- मनोज अग्रवाल ने अधिकारियों को लक्ष्मण रेखा की याद दिला दी है. उन्होंने सेवा नियमों की किताब के बारे में बहुत कुछ कहा है, लेकिन जब उनकी पत्नी और ससुर के खिलाफ सीबीआई की चार्जशीट में अवैध संपत्ति और 30 बैंक खातों का जिक्र है, तो उनकी नैतिकता कहां है. चंद्रिमा की पोस्ट के बाद, तृणमूल नेतृत्व मनोज अग्रवाल की आलोचना करने के लिए मैदान में उतर आया. देबांशु भट्टाचार्य और सुदीप रहारा ने एक के बाद एक पोस्ट किए. अब, सीईओ कार्यालय ने आरोपों को खारिज करते हुए जवाब दिया है.
तृणमूल का बयान
तृणमूल के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कहा- सब कुछ गड़बड़ है. हर तरफ तानाशाही है. जब ईडी ने मनोज अग्रवाल के घर पर छापा मारा, तो उन्होंने घर की खिड़की से नोटों का एक बंडल बगल की ज़मीन पर फेंक दिया. वह एक रोमांचक जांच थी. अब सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग ने उनकी तरफ से जाकर यह कहा कि यह जांच उनके हाथ में नहीं है. वे मछली को सब्जी से ढक रहे हैं.
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भाजपा का बयान
भाजपा प्रवक्ता जगन्नाथ चटर्जी ने कहा- यदि यूपीए सरकार के किसी भी अधिकारी पर कोई आरोप लगता है, तो तत्कालीन सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी. तृणमूल यूपीए सरकार में सहयोगी थी. यदि मुख्य कार्यकारी अधिकारी और उनके खिलाफ मामला अभी भी चल रहा है, तो राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों में अब तक ऐसा नहीं हुआ है.
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लेखक के बारे में
By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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