बंगाल की मुख्य सचिव का नाम जांच के दायरे में, तृणमूल सांसद की बेटी भी विचाराधीन वोटर

SIR in Bengal: कल्याण बनर्जी के बेटे प्रभ्यान्य बनर्जी का नाम सत्यापन के लिए भेजा गया है. कल्याण बनर्जी एसआईआर मामले में अदालत में लड़ रहे हैं, वहीं उनके बेटे प्रभ्यान्य को 'जांच के दायरे में' रखा गया है. प्रभ्यान्य भी वकील हैं.
मुख्य बातें
SIR in Bengal: कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग की ओर से जारी फाइनल वोटर लिस्ट पर विवाद जारी है. तीन श्रेणियों के वोटरों में कई ऐसे चौकानेवाले नाम हैं जिन्हें विचाराधीन श्रेणी में डाल दिया गया है. तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि बंगाल के मुख्य सचिव को ही बंगाल का वोटर नहीं माना गया है. उनका नाम ‘अस्पष्ट’ सूची में डाल दिया गया है. उन्होंने मीडिया को एक तस्वीर भी दिखाई, जिसमें मुख्य सचिव से संबंधित जानकारी दर्ज हैं. अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद यह खुलासा हुआ कि मुख्य सचिव का नाम वास्तव में अस्पष्ट सूची में हैं. इसके अलावा, कल्याण के बेटे और बेटी के नाम भी ‘विचाराधीन सूची’ में हैं.
दिसंबर में ही ठीक हुई थी त्रुटियां
कोलकाता के रास बिहारी क्षेत्र की मतदाता राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती हैं. उन्हें जनगणना प्रपत्र में कुछ त्रुटियों के कारण सुनवाई का नोटिस भेजा गया था. बीएलओ, ईआरओ और ईआरओ ने पिछले दिसंबर में उनके घर जाकर त्रुटियों को ठीक किया था. मुख्य सचिव का नाम सत्यापन सूची में होने की जानकारी सूची प्रकाशित होने से पहले ही सर्वोच्च न्यायालय को दे दी गई थी. इसे क्यों नहीं बदला गया? आयोग ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपने से ईआरओ के हाथों से सभी शक्तियां छीन ली गई थीं. इसलिए, इसे किसी भी तरह से ठीक करना संभव नहीं था. स्वाभाविक रूप से, इस पर हंगामा मच गया है.
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सुनवाई के लिए भी नहीं बुलाया गया
दूसरी ओर, कल्याण बनर्जी के बेटे प्रभांजन बनर्जी का नाम सत्यापन के लिए भेजा गया है. कल्याण बनर्जी अदालत में एसआईआर मामले की पैरवी कर रहे हैं, वहीं उनके बेटे प्रभांजन को ‘विचाराधीन सूची’ में रखा गया है. प्रभांजन भी वकील हैं. राज्य सरकार ने उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय का वरिष्ठ स्थायी वकील नियुक्त किया है. कल्याण के बेटे ही नहीं, बल्कि तृणमूल सांसद की बेटी प्रमिति को भी विचाराधीन सूची में डाल दिया गया है. हैरानी की बात यह है कि दोनों भाई-बहनों को सुनवाई के लिए नहीं बुलाया गया है. हालांकि, दोनों के नाम लंबित सूची में हैं. सवाल उठता है कि सुनवाई के लिए न बुलाए जाने के बावजूद उनके नाम लंबित सूची में क्यों हैं.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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