छह साल से खाली है झारखंड महिला आयोग के अध्यक्ष की कुर्सी, 5200 से अधिक मामले लंबित

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 08 Jun 2026 9:02 PM

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झारखंड महिला आयोग की दो पूर्व अध्यक्ष डॉ हेमलता एस मोहन और इनसेट में कल्याणी शरण. फोटो: प्रभात खबर

Jharkhand Women Commission: झारखंड महिला आयोग में पिछले छह वर्षों से अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई है. आयोग में 5200 से अधिक मामले लंबित हैं और महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई ठप पड़ी है. पूर्व अध्यक्षों ने आयोग के शीघ्र गठन की मांग उठाई है, जबकि विभाग ने प्रयास जारी होने की बात कही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से लता रानी की रिपोर्ट

Jharkhand Women Commission: झारखंड राज्य महिला आयोग की कुर्सी पिछले छह सालों से खाली है. अध्यक्ष और सदस्यों के बिना आयोग संचालित हो रहा है. इसका नियमित कामकाज लगभग ठप पड़ गया है और महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई पूरी तरह बंद है. स्थिति यह है कि आयोग में 5200 से अधिक मामले लंबित हैं, जबकि नई शिकायतों के निस्तारण की कोई व्यवस्था फिलहाल मौजूद नहीं है. महिला अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं होने से प्रभावित महिलाओं को न्याय के लिए अन्य मंचों का सहारा लेना पड़ रहा है.

छह जून 2020 को समाप्त हुआ था कार्यकाल

झारखंड राज्य महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कल्याणी शरण और उनकी पांच सदस्यीय टीम का कार्यकाल 6 जून 2020 को समाप्त हो गया था. इसके बाद 7 जून 2020 से आयोग अध्यक्ष और सदस्यों से विहीन हो गया. बीते छह वर्षों के दौरान आयोग के पुनर्गठन को लेकर कई बार चर्चा हुई, लेकिन अब तक नई अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो सकी है. इसका सीधा असर आयोग की कार्यप्रणाली और शिकायतों के निष्पादन पर पड़ा है.

महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई पूरी तरह बंद

राज्य महिला आयोग महिलाओं से जुड़े उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति विवाद और अन्य सामाजिक समस्याओं से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है. लेकिन आयोग में पदाधिकारी नहीं होने के कारण शिकायतों का निपटारा पूरी तरह बंद हो गया है. पहले बड़ी संख्या में महिलाएं अपनी समस्याएं लेकर आयोग पहुंचती थीं, जहां उनकी शिकायतों पर सुनवाई होती थी. अब स्थिति यह है कि शिकायतकर्ताओं को पता है कि आयोग में सुनवाई करने वाला कोई नहीं है, इसलिए वहां आने वालों की संख्या भी लगभग समाप्त हो गई है.

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी हुई बंद

महिला आयोग में न केवल प्रत्यक्ष सुनवाई रुकी हुई है, बल्कि ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया भी प्रभावी रूप से बंद हो चुकी है. इससे राज्य के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि आयोग का निष्क्रिय होना महिलाओं के न्याय पाने के अधिकार को प्रभावित कर रहा है. विशेष रूप से उन महिलाओं को कठिनाई हो रही है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से न्यायालय तक नहीं पहुंच पातीं.

5200 से अधिक मामले लंबित

आयोग के निष्क्रिय रहने का सबसे बड़ा असर लंबित मामलों पर पड़ा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोग में 5200 से अधिक मामले लंबित हैं. इनमें लगभग 3000 नए मामले भी शामिल हैं, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो सकी है. लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इससे शिकायतकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है और कई मामलों में न्याय मिलने में अत्यधिक विलंब हो रहा है.

बकाया मानदेय से कर्मियों की बढ़ी परेशानी

जानकारी के अनुसार तत्कालीन अध्यक्ष कल्याणी शरण सहित उस समय कार्यरत 13 कर्मियों का कई महीनों का मानदेय भी अब तक बकाया है. आर्थिक कठिनाइयों के कारण एक कर्मी की मृत्यु होने की भी चर्चा है. हालांकि आयोग का कार्यालय औपचारिक रूप से अभी भी खुल रहा है. वर्तमान में वहां एक कंप्यूटर ऑपरेटर, एक सफाईकर्मी और एक सुरक्षा कर्मी कार्यरत हैं, लेकिन उनके पास शिकायतों के निस्तारण का अधिकार नहीं है.

अन्य राज्यों में सक्रिय हैं महिला आयोग

वर्ष 2005 में गठित झारखंड राज्य महिला आयोग का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था. देश के अधिकांश राज्यों में महिला आयोग सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं. दिल्ली, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और चंडीगढ़ समेत कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छोड़ अधिकांश स्थानों पर महिला आयोग नियमित रूप से काम कर रहे हैं. इसके विपरीत झारखंड में आयोग के पुनर्गठन को लेकर लंबे समय से अनिश्चितता बनी हुई है.

विभाग ने गठन के लिए प्रयास जारी होने की कही बात

महिला आयोग के गठन में हो रही देरी पर राष्ट्रीय महिला आयोग भी चिंता जता चुका है. इस मुद्दे पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह का कहना है कि राज्य महिला आयोग के गठन को लेकर विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि अब तक नई नियुक्तियों को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा घोषित नहीं की गई है. ऐसे में हजारों लंबित मामलों और महिलाओं की न्याय संबंधी उम्मीदों के बीच आयोग के पुनर्गठन का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है.

अब तक किस-किस ने संभाली महिला आयोग की कमान

  • आईएएस डॉ लक्ष्मी सिंह (अब दिवंगत): 18 सितंबर 2006 से 17 सितंबर 2009
  • डॉ हेमलता मोहन: 07 सितंबर 2010 से छह सितंबर 2013
  • डॉ महुआ माजी: 11 नवंबर 2013 से 10 नंबर 2016
  • कल्याणी शरण: 07 जून 2017 से छह जून 2020

न्याय के लिए कहां जाएंगी महिलाएं: कल्याणी शरण

झारखंड महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष कल्याणी शरण ने कहा, ‘मेरा कार्यकाल समाप्त होने के बाद से आज तक राज्य महिला आयोग\B ठप है. महिलाओं की सुनवाई करनेवाला कोई नहीं है. आयोग के लिए आवंटित फंड का क्या हो रहा है, यह भी सवाल है. महिलाएं न्याय के लिए कहां जायेंगी? आज भी न्याय की आस में महिलाएं मुझे फोन करती हैं. मैं अपने स्तर से मदद का प्रयास करती हूं.’

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महिला आयोग का गठन बेहद जरूरी: डॉ हेमलता मोहन

झारखंड महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ हेमलता मोहन ने कहा, ‘राज्य महिला आयोग का गठन बेहद आवश्यक है. यह महिलाओं की आवाज सुने जाने का महत्वपूर्ण मंच है. यहां महिलाएं खुलकर अपनी समस्याएं रख पाती हैं. मैंने वर्ष 2010 से 2013 तक आयोग की अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. उस दौरान महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई हुई, मामलों का निष्पादन हुआ और उन्हें न्याय मिला.’

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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