दक्षिण कोरियाई बाजार में हाहाकार, 17 साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिरा ‘वोन’

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South Korean Won

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South Korean Won: बुधवार को दक्षिण कोरिया का मुख्य शेयर बाजार सूचकांक KOSPI 8% से ज्यादा गिर गया. बाजार में गिरावट इतनी तेज थी कि ट्रेडिंग को बीच में ही रोकना पड़ा, जिसे तकनीकी भाषा में ‘सर्किट ब्रेकर’ कहा जाता है.

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South Korean Won: दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था इस समय एक बड़े संकट से गुजर रही है. मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव ने कोरियाई शेयर बाजार और वहां की करेंसी ‘वोन’ (Won) की कमर तोड़ दी है. बुधवार को दक्षिण कोरियाई मार्केट में भारी गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों के अरबों डॉलर डूब गए.

शेयर बाजार में हाहाकार: ‘सर्किट ब्रेकर’ का हुआ इस्तेमाल

बुधवार को दक्षिण कोरिया का मुख्य शेयर बाजार सूचकांक KOSPI 8% से ज्यादा गिर गया. बाजार में गिरावट इतनी तेज थी कि ट्रेडिंग को बीच में ही रोकना पड़ा, जिसे तकनीकी भाषा में ‘सर्किट ब्रेकर’ कहा जाता है. पिछले दो दिनों के भीतर, बाजार से लगभग 562.4 ट्रिलियन वोन (करीब 380 अरब डॉलर) साफ हो गए. दिग्गज कंपनियां जैसे सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और हुंडई मोटर के शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई.

करेंसी में रिकॉर्ड गिरावट

इंडियन एक्स्प्रेस के अनुसार दक्षिण कोरिया की करेंसी ‘वोन’ की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरकर 1,505.8 तक पहुंच गई. यह 2009 की वैश्विक मंदी के बाद का सबसे निचला स्तर है. जब करेंसी इतनी कमजोर होती है, तो देश के लिए आयात (Import) करना महंगा हो जाता है. विदेशी निवेशक अपना पैसा कोरियाई बाजार से निकालकर सुरक्षित जगहों पर ले जा रहे हैं, जिससे वोन की वैल्यू और गिर रही है.

आखिर क्यों घबराया हुआ है दक्षिण कोरिया ?

दक्षिण कोरिया की इस हालत के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं.

  • कच्चे तेल (Crude Oil) की निर्भरता: दक्षिण कोरिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है. वह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है.
  • मिडिल ईस्ट वॉर: इजरायल, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई रुकने का डर है. कोरिया अपना 70% तेल मिडिल ईस्ट से ही खरीदता है. अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो कोरिया की पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है.
  • विदेशी निवेशकों का पलायन: पिछले 10 दिनों से विदेशी निवेशक लगातार शेयर बेचकर बाजार से बाहर निकल रहे हैं.

सरकार और बैंक ऑफ कोरिया का रुख

बाजार में मची इस अफरातफरी को देखते हुए बैंक ऑफ कोरिया ने मोर्चा संभाल लिया है. बैंक ने बयान जारी किया है कि वे बाजार की स्थिति पर पैनी नजर रख रहे हैं और अगर करेंसी में “भेड़ चाल” (बिना सोचे-समझे बिकवाली) दिखी, तो वे कड़े कदम उठाएंगे. हालांकि, जानकारों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक वोन और शेयर बाजार में स्थिरता आना मुश्किल है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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