₹50 में Zara का टॉप, ₹150 में Levi's की जैकेट! आखिर सरोजिनी नगर में इतना सस्ता कैसे मिलता है सामान?

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₹50 में Zara का टॉप, ₹150 में Levi's की जैकेट! आखिर सरोजिनी नगर में इतना सस्ता कैसे मिलता है सामान?

Sarojini Nagar Dress Price: अगर आपने भी कभी सरोजिनी नगर या अपने शहर के किसी थ्रिफ्ट मार्केट से ₹300-₹500 में ब्रांडेड जैकेट, जींस या स्वेटशर्ट खरीदी है, तो कभी न कभी आपके मन में भी सवाल आया होगा कि ये आखिर इतना सस्ता कैसे है?

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Sarojini Nagar Dress Price: असल में इन कपड़ों का सफर आपकी सोच से कहीं लंबा होता है. विदेशों से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके ये कपड़े हरियाणा के पानीपत पहुंचते हैं. यहीं इनकी छंटाई होती है और फिर इन्हें देशभर के बाजारों में भेजा जाता है.

विदेश से पानीपत तक कपड़े कैसे पहुंचते हैं?

इन कपड़ों की शुरुआत अमेरिका, कनाडा, चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और UAE जैसे देशों से होती है. वहां लोग पुराने लेकिन अच्छी हालत वाले कपड़े डोनेशन बॉक्स, चैरिटी संस्थाओं, थ्रिफ्ट स्टोर और सॉर्टिंग कंपनियों को दे देते हैं. इसके बाद कपड़े बड़े-बड़े कंटेनरों में भरकर समुद्र के रास्ते भारत भेजे जाते हैं. ज्यादातर कंटेनर गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचते हैं और वहां से हरियाणा के पानीपत के बरसात रोड स्थित गोदामों में आते हैं.

कारोबारियों के मुताबिक,

  • चीन से आने वाला एक कंटेनर करीब 25 टन का होता है.
  • इसमें लगभग 350 बेल (Bales) होती हैं.
  • एक खेप को भारत पहुंचने में करीब 2 महीने लग जाते हैं.

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयात नियमों के कारण कई खेप "म्यूटिलेटेड" (रीसाइक्लिंग के लिए घोषित इस्तेमाल किए गए कपड़े) के रूप में भारत आती हैं. बाद में पानीपत में अच्छी क्वालिटी वाले कपड़े अलग कर दोबारा बिक्री के लिए निकाल दिए जाते हैं, जबकि बाकी कपड़े रीसाइक्लिंग में भेज दिए जाते हैं.

बेल के अंदर क्या निकलता है?

पानीपत के गोदामों में 80 से 100 किलो तक की बड़ी-बड़ी बेल रखी होती हैं. हर बेल में सिर्फ एक कैटेगरी के कपड़े होते हैं, जैसे-

  • महिलाओं की जींस
  • पुरुषों की कॉटन पैंट
  • कोरियन टॉप
  • सफेद शर्ट
  • पलाजो
  • कार्डिगन
  • ओवरकोट
  • ड्रेस
  • विंटर जैकेट
  • अंडरगारमेंट्स

यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि दुकानदार पैसे देने के बाद ही बेल खोल सकता है. यानी उसे पहले से सिर्फ कपड़ों की कैटेगरी पता होती है. अंदर कौन-सा ब्रांड, कौन-सा रंग, कौन-सा डिजाइन या कौन-सा साइज मिलेगा, इसकी जानकारी किसी को नहीं होती. इसी वजह से कई बार एक ही बेल में अनसोल्ड फैशन स्टॉक, एक्सपोर्ट सरप्लस, फैक्ट्री रिजेक्ट और इस्तेमाल किए हुए कपड़े एक साथ निकल सकते हैं.

इतने सस्ते में बेचकर भी दुकानदार कैसे कमाता है?

एक बेल की कीमत ₹8,000 से ₹30,000 तक हो सकती है. इनकी क्वालिटी भी अलग-अलग होती है.

  • A ग्रेड में सिर्फ 5-10% कपड़ों में हल्की खराबी होती है.
  • B और C ग्रेड में ज्यादा इस्तेमाल किए हुए या खराब कपड़े होते हैं.

कारोबारियों के मुताबिक, अगर एक बेल ₹250 प्रति किलो की है तो एक किलो में करीब तीन पैंट निकल सकती हैं. यानी एक पैंट की लागत करीब ₹80-₹100 पड़ती है. यही पैंट बाद में बाजार में ₹200, ₹300 या उससे ज्यादा में बिक जाती है.

क्या बाजार में मिलने वाले सभी ब्रांडेड कपड़े असली होते हैं?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के दौरान एक बेल खोलने पर उसमें Louis Vuitton का पुलओवर भी मिला. यही वजह है कि कभी-कभी सरोजिनी नगर जैसे बाजारों में महंगे ब्रांड के कपड़े बेहद कम कीमत पर दिखाई देते हैं. हालांकि, पानीपत के कुछ छोटे वर्कशॉप में कपड़ों की इस्त्री, फोल्डिंग, पैकिंग और ब्रांड टैग लगाने का काम भी होता है.

  • पैकिंग और फिनिशिंग का खर्च करीब ₹6-₹7 प्रति कपड़ा आता है.
  • कंपनी का टैग लगवाने पर करीब ₹1 अतिरिक्त देना पड़ता है.
  • सामान्य टैग करीब 50 पैसे में लग जाता है.
  • यहां Max, Zara और Tommy Hilfiger जैसे ब्रांड के टैग भी उपलब्ध बताए जाते हैं.

वर्कशॉप में काम करने वाली महिला के मुताबिक, हर व्यापारी ऐसा नहीं करता. ज्यादातर वही लोग टैग लगवाते हैं जो दुकानों या शोरूम में कपड़े बेचते हैं. इसलिए बाजार में मिलने वाला हर ब्रांडेड कपड़ा असली हो, यह जरूरी नहीं है. वहीं कारोबारियों का कहना है कि कुछ असली प्रीमियम ब्रांड के कपड़े भी इन बेलों में मिल जाते हैं.

आखिर ये कपड़े कहां-कहां बिकते हैं?

पानीपत से कपड़े कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भेजे जाते हैं. कारोबारी बताते हैं कि वे 1,500 से ज्यादा पिनकोड में सप्लाई कर चुके हैं. हिमाचल, लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में विंटर जैकेट की सबसे ज्यादा मांग रहती है. आज यह कारोबार सिर्फ गोदामों तक सीमित नहीं है. कई होलसेलर YouTube, WhatsApp और IndiaMART के जरिए भी देशभर के दुकानदारों से ऑर्डर लेकर कपड़ों की सप्लाई कर रहे हैं.

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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