सरकार ने एक झटके में काट दिए 92 लाख नाम! क्या आपकी Ladki Bahin Yojana भी हुई बंद?

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सरकार ने एक झटके में काट दिए 92 लाख नाम! क्या आपकी Ladki Bahin Yojana भी हुई बंद?

महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री लाडली बहिन योजना से बड़े पैमाने पर सत्यापन के बाद 92 लाख से अधिक लाभार्थियों के नाम हटा दिए गए हैं. इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाना है. जानें इस बदलाव के पीछे के मुख्य कारण और भविष्य में योजना पर इसका क्या असर पड़ेगा.

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महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना में बड़े स्तर पर सत्यापन के बाद करीब 92 लाख लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं. इसके बाद योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 2.43 करोड़ से घटकर 1.5 करोड़ रह गई है. यानी सत्यापन के दौरान करीब 38 प्रतिशत लाभार्थियों को अपात्र पाया गया या उन्होंने जरूरी शर्तें पूरी नहीं कीं.

यह कार्रवाई केवल रिकॉर्ड अपडेट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भविष्य में सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, बजट प्रबंधन और पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

Ladki Bahin Yojana क्या है?

महाराष्ट्र सरकार ने 2024 में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना शुरू की थी.

योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये सीधे बैंक खाते में DBT के जरिए दिए जाते हैं.

पात्रता

  • आयु 21 से 65 वर्ष.
  • परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम.
  • सरकारी कर्मचारी नहीं.
  • आयकरदाता नहीं.
  • कुछ अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थी नहीं.

सत्यापन के बाद कितने नाम हटाए गए?

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार.

विवरणसंख्या
पहले कुल लाभार्थीलगभग 2.43 करोड़
हटाए गए लाभार्थी92 लाख से अधिक
वर्तमान लाभार्थीलगभग 1.5 करोड़
हटाए गए लाभार्थियों का प्रतिशतलगभग 38%

यानी लगभग हर 10 में से 4 लाभार्थियों का नाम सूची से हटा दिया गया.

सबसे ज्यादा नाम क्यों हटाए गए?

सत्यापन के दौरान कई वजहें सामने आईं.

eKYC पूरा नहीं किया

सबसे बड़ी वजह अनिवार्य eKYC न कराना रही.

  • लगभग 62 लाख महिलाओं ने eKYC पूरा नहीं किया.
  • कुल हटाए गए लाभार्थियों में इनकी हिस्सेदारी करीब 67 प्रतिशत रही.

आय सीमा से अधिक आय

करीब 16 लाख परिवारों की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से अधिक पाई गई.

सरकारी नौकरी

करीब 4.42 लाख मामलों में लाभार्थी या परिवार का सदस्य सरकारी कर्मचारी निकला.

दूसरी सरकारी योजना का लाभ

करीब 3.6 लाख लोग पहले से दूसरी सरकारी सहायता योजना का लाभ ले रहे थे.

एक परिवार से दो से ज्यादा लाभार्थी

करीब 2.5 लाख मामलों में एक ही परिवार के दो से अधिक सदस्यों को योजना का लाभ मिल रहा था.

अन्य कारण

  • लगभग 1.8 लाख महिलाएं निर्धारित आयु सीमा से अधिक थीं.
  • करीब 1.7 लाख मामलों में जिला स्तर पर गड़बड़ी मिली.
  • लगभग 29 हजार पुरुष और 8 हजार सरकारी कर्मचारी भी लाभ लेते पाए गए.

हटाए गए लाभार्थियों को कितना पैसा मिला?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार.

  • हटाए गए लाभार्थियों को कुल मिलाकर लगभग 14,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया.
  • औसतन प्रत्येक लाभार्थी को करीब 10 महीने तक योजना का लाभ मिला.

क्या सरकार पैसे वापस लेगी?

महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे के अनुसार.

सरकार अधिकांश महिलाओं से पैसे वापस नहीं लेगी.

हालांकि इन मामलों में रिकवरी की कार्रवाई हो सकती है.

  • पुरुष लाभार्थी.
  • सरकारी कर्मचारी.
  • जानबूझकर गलत जानकारी देकर लाभ लेने वाले अपात्र लोग.

eKYC इतना जरूरी क्यों है?

eKYC का उद्देश्य.

  • फर्जी लाभार्थियों की पहचान.
  • डुप्लीकेट रिकॉर्ड हटाना.
  • सही व्यक्ति तक DBT पहुंचाना.
  • सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकना.

इसी वजह से अब अधिकांश सरकारी योजनाओं में eKYC अनिवार्य किया जा रहा है.

योजना के बजट पर क्या असर पड़ेगा?

महाराष्ट्र सरकार ने योजना का बजट भी घटाया है.

वित्त वर्षबजट
2025-2636,000 करोड़ रुपये
2026-2726,500 करोड़ रुपये

यानी बजट में 9,500 करोड़ रुपये की कमी की गई है.

अगर 1.5 करोड़ महिलाओं को पूरे साल 1,500 रुपये प्रति माह दिए जाएं, तो लगभग 27,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी.

क्या 2,100 रुपये प्रति माह देने का वादा पूरा होगा?

चुनाव के दौरान महायुति गठबंधन ने योजना की राशि 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये प्रति माह करने का वादा किया था.

फिलहाल यह फैसला लागू नहीं हुआ है.

यदि 1.5 करोड़ महिलाओं को 2,100 रुपये प्रति माह दिए जाएं, तो सरकार को सालाना लगभग 37,800 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, जो मौजूदा बजट से काफी अधिक है.

CAG ने क्या सवाल उठाए?

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने योजना के वित्तीय प्रबंधन पर कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं.

मुख्य बिंदु.

  • स्वीकृत बजट से अधिक खर्च.
  • बड़ी राशि जमा खातों में पार्क करना.
  • बजट अनुमान और खर्च नियंत्रण में कमियां.
  • लाभार्थियों की संख्या का वास्तविक आकलन बेहतर करने की जरूरत.

इस कार्रवाई का असर क्या होगा?

लाभ

  • फर्जी लाभार्थियों की पहचान होगी.
  • सरकारी धन की बचत होगी.
  • पात्र महिलाओं तक लाभ अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचेगा.
  • DBT योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी.

संभावित चुनौतियां

  • जिन पात्र महिलाओं का eKYC समय पर नहीं हुआ, उन्हें दोबारा प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है.
  • लाभार्थियों को दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड अपडेट रखने होंगे.

यदि आपका नाम हट गया है तो क्या करें?

अगर आपका नाम लाभार्थी सूची से हट गया है, तो.

  • eKYC स्टेटस जांचें.
  • आधार और बैंक खाते की जानकारी अपडेट करें.
  • स्थानीय महिला एवं बाल विकास कार्यालय से संपर्क करें.
  • पात्रता से जुड़े दस्तावेज तैयार रखें.
  • योजना के आधिकारिक पोर्टल या हेल्पलाइन से जानकारी लें.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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