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PHOTOS: बिहार के भागलपुर में आजादी के दिनों की यादें मौजूद, पेड़-जेल व टीले तक का है अद्भुत इतिहास..

Updated at : 14 Aug 2023 4:20 PM (IST)
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PHOTOS: बिहार के भागलपुर में आजादी के दिनों की यादें मौजूद, पेड़-जेल व टीले तक का है अद्भुत इतिहास..

भागलपुर में आजादी के दिनों की कई यादें आज भी मौजूद हैं. यहां महात्मा गांधी से लेकर रवींद्र नाथ टैगोर और राजेंद्र प्रसाद तक आए. आज कई जगहें ऐसी हैं जहां से आप गुजरते होंगे लेकिन इसके इतिहास से वाकिफ नहीं होंगे. जानिए ऐसी जगहों के बारे में..

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Independence day 2023: तिलकामांझी भागलपुर विश्विद्यालय कैंपस में टील्हा कोठी ( वर्तमान में रवींद्र भवन) का इतिहास आजादी के समय का है. इस टिल्हा कोठी से महात्मा गांधी ने जनसभा को संबोधित किया था. शौकत अली और मौलाना अबुल कलाम आजाद के अलावे डॉ राजेंद्र प्रसाद और बाबू दीपनारायण सिंह भी उनके साथ यहां आ चुके हैं.

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Independence day 2023:यह टिल्हा कोठी गंगा के किनारे है और करीब 45 फीट ऊंचे टीले पर यह बना है. अंग्रेजों ने इसे बनवाया था. 1917 में बिहार छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता करने पहली बार महात्मा गांधी यहां आए थे. असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने इसी टिल्हा कोठी से जनसभा को संबोधित किया था.

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Independence day 2023:इस टिल्हा कोठी को अब रवींद्र भवन के नाम से जाना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि यहां उन दिनों रवींद्र नाथ टैगोर भी आए और इसी टिल्हा कोठी में प्रवास के दौरान गीतांजली के कुछ अंश लिखे थे.इस पेड़ का अवशेष में ही इस सैंडिस कंपाउंड का इतिहास छिपा है.

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Independence day 2023:ये बरगद का विशाल पेड़ सैंडिस कंपाउंड ग्रांउड में है. जिसका इतिहास सैंकड़ों साल पुराना है.इस पेड़ का अवशेष में ही इस सैंडिस कंपाउंड का इतिहास छिपा है. मि. आई सैंडिस नाम के जिला जज 1857 में हुए. वो अक्सर इस बरगद पेड़ के नीचे अपनी अदालत लगाते थे.

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Independence day 2023: जज मि. आई सैंडिस कभी कभार इस पेड़ पर बैठकर भी बहस सुना करते थे. अब यह पेड़ गिरने के कगार पर है. इस तरह किसी का ध्यान अब नहीं जाता है. इतिहास के जानकार कहते हैं कि अगर इसे बचा लिया तो धरोहर की रक्षा होगी.

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Independence day 2023: सैंडिस कंपाउंड में बरगद के इस पेड़ का इतिहास सैंकड़ो साल पुराना है और आज भी इस पेड़ की जो क्षति हुई है वो दिखती है. इतिहास के जानकार प्रोफेसर सुनील सिंह कहते हैं कि यदि यह अपने पुराने जलवे में रहता तो कोलकता के अलीपुर जू स्थित बरगद के टक्कर का होता.

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Independence day 2023: भागलपुर के कलेक्टर रहे अंग्रेज क्लीवलैंड का स्मारक भी शहर के तिलकामांझी चौक के पास ही है. तिलकामांझी चौक से नगर निगम की ओर जाने के दौरान कुछ ही आगे बढ़ने पर बायीं ओर क्लीवलैंड मेमोरियल है.

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Independence day 2023: तिलकामांझी स्थित क्लीवलैंड मेमोरियल में पार्क भी है जहां बच्चों के झूले भी हैं. लोग सुबह-शाम यहां टहलने आते हैं.

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Independence day 2023: अंग्रेज कलेक्टर क्लीवलैंड को तिलकामांझी ने मौत के घाट उतारा था. क्लीवलैंड का स्मारक यहां आज भी मौजूद है.

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Independence day 2023: तिलका मांझी चौक के बारे में भी आप जरूर जानिए. तिलकामांझी ने अंग्रेजों को अपना लोहा मनवाया और कलेक्टर क्लीवलैंड को अपना शिकार बनाया था. उसकी हत्या के आरोप में तिलकामांझी को गिरफ्तार करके इसी जगह पर एक बरगद के पेड़ पर फांसी दे दी गयी थी.

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Independence day 2023: तिलकामांझी को जहां पर फांसी दी गयी थी वहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की गयी है. अब पुराने प्रतिमा को बदलकर नयी प्रतिमा लगायी गयी है.

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Independence day 2023: भागलपुर के सेंट्रल जेल का नाम है शहीद जुब्बा सहनी कारा.. मीनापुर के चैनपुर में जन्मे जुब्बा सहनी ने थानेदार को जला दिया था और उन्हें भागलपुर के इसी सेंट्रल जेल में फांसी की सजा दी गयी थी.

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ThakurShaktilochan Sandilya

लेखक के बारे में

By ThakurShaktilochan Sandilya

डिजिटल मीडिया का पत्रकार. प्रभात खबर डिजिटल की टीम में बिहार से जुड़ी खबरों पर काम करता हूं. प्रभात खबर में सफर की शुरुआत 2020 में हुई. कंटेंट राइटिंग और रिपोर्टिंग दोनों क्षेत्र में अपनी सेवा देता हूं.

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