hajipur news. ओटी असिस्टेंट नहीं रहने से ममता, स्वीपर व अन्य कर्मियों से ली जा रही है मदद

Updated at : 18 Jun 2025 6:02 PM (IST)
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hajipur news. ओटी असिस्टेंट नहीं रहने से ममता, स्वीपर व अन्य कर्मियों से ली जा रही है मदद

प्रखंड में निर्मित 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लोगों का ठीक ढंग से इलाज नहीं हो रहा है, इसका मुख्य कारण डॉक्टर व चिकित्साकर्मियों की संख्या में भारी कमी है

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सहदेई बुजुर्ग. प्रखंड में निर्मित 30 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लोगों का ठीक ढंग से इलाज नहीं हो रहा है. इसका मुख्य कारण डॉक्टर व चिकित्साकर्मियों की संख्या में भारी कमी है. मालूम हो कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहदेई बुजुर्ग में ओपीडी सुबह आठ बजे से लेकर दो बजे तक चलती है, जबकि दूसरे शिफ्ट में बंद रहती है. इसका कारण डॉक्टर की कमी को बताया गया है. ओपीडी में 16 प्रकार की पैथोलौजी जांच, निशुल्क एक्स-रे, आउटडोर में 192 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, जबकि इनडोर में 91 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं. पैथोलॉजिकल जांच की सुविधा भर्ती मरीजों को दी जाती है. इसके लिए डाक्टर का होना अनिवार्य है.

मरीजों को नहीं मिलता आहार

मरीजों के लिए आहार सुविधा निशुल्क है, जो कागज पर ही चला करती है. स्वास्थ्य प्रबंधक ने बताया कि अस्पताल में तीन एंबुलेंस हैं, लेकिन कभी चालक, तो कभी इएमटी गायब रहते है. इस संंबंध में जिला मुख्यालय को लिखा गया है. स्वास्थ्य केंद्र में टीकाकरण की विशेष व्यवस्था है. ओपीडी में लगभग 80 से ऊपर रोगी इलाज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं. यहां पर आयुष्मान कार्ड बनाने की व्यवस्था है एवं आयुष्मान कार्ड से इलाज की भी व्यवस्था है.

प्रसूती रोग विशेषज्ञ नहीं होने से होती है समस्या

विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी के कारण यहां हड्डी रोगी या वैसे मरीज जिन्हें ऑपरेशन कराना है, उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. स्त्री व प्रसूती रोग विशेषज्ञ नहीं होने से महिलाओं को विशेष कष्ट होता है. अस्पताल में छह डाॅक्टर की पोस्टिंग है. जिसमें चार उपलब्ध हैं व चार कांट्रैक्ट पर काम कर रहे हैं. डॉक्टरों में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सुनील केसरी, डाॅ एके तिवारी, डाॅ पिंटू पांडे, एडीआर रेखा कुमारी, डाॅ एनिमा रंजन, डाॅ मंजू कुमारी आयुष, डाॅ जीएन पांडे व डाॅ अभिषेक रंजन शामिल हैं. एएनएम की स्वीकृत संख्या 30, जबकि कार्यरत 26 हैं. ड्रेसर, कंपाउंडर, हेल्थ वर्कर, ओटी असिस्टेंट के नहीं रहने के कारण यहां पर इमरजेंसी में ममता, स्वीपर व व कर्मी की मदद ली जाती है.

कर्मियों की कमी का मुद्दा बार-बार बैठक व पत्र के माध्यम से उठा रहे

इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि जिन सीटों पर हमारे अधिकारी एवं कर्मचारी पदस्थापित नहीं हैं, उनके लिए हम लोग बार-बार पत्र के माध्यम से एवं उच्च अधिकारी के साथ बैठक में इस बात को रखते हैं. अस्पताल में सबसे अच्छी हालत भवन एवं साफ सफाई की है, जिसमें नए सफाई कर्मी की बहाली होने से यह काफी अच्छी हालत में है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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