ePaper

Gopalganj News : परिवार पर पड़ी आफत, तो 500 की दिहाड़ी पर मणिपुर कमाने चला गया सोनेलाल मुखिया

Updated at : 15 Dec 2024 10:13 PM (IST)
विज्ञापन
Lawrence Bishnoi

Gopalganj News : गंडक नदी के किनारे बसे बीन टोली गांव के श्रमिक सोनेलाल मुखिया का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था. अपने घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने और परिवार की खुशहाली के लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहा था. कभी खेतों में काम करता, तो कभी गांव में छोटी-मोटी नौकरी ढूंढ़ता. लेकिन, बाढ़ की त्रासदी ने उसके जीवन को एक और मोड़ पर ला दिया.

विज्ञापन

गोपालगंज. गंडक नदी के किनारे बसे बीन टोली गांव के श्रमिक सोनेलाल मुखिया का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था. अपने घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने और परिवार की खुशहाली के लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहा था. कभी खेतों में काम करता, तो कभी गांव में छोटी-मोटी नौकरी ढूंढ़ता. लेकिन, बाढ़ की त्रासदी ने उसके जीवन को एक और मोड़ पर ला दिया.

बाढ़ की त्रासदी से बिगड़ी परिवार की आर्थिक स्थिति

गंडक नदी से आयी बाढ़ में उसका खेत और पक्का घर पूरी तरह से तबाह हो गये थे. इसके बाद, परिवार का खर्च चलाने के लिए उसे अपनी किस्मत को दूसरे स्थानों पर आजमाने की जरूरत महसूस हुई. सोनेलाल का जीवन एक ओर संघर्ष का हिस्सा बन गया, जब उसके बड़े भाई मुन्ना लाल, जो पहले गांव में ही रहते थे, अपनी शादी के बाद हिमाचल प्रदेश में अपनी ससुराल में बस गये. घर में बचे चार भाईयों के साथ बुजुर्ग मां-बाप भी थे, जिनकी देखभाल का जिम्मा अब सोनेलाल पर था. गांव में कोई काम नहीं मिलने के कारण, वह और उसका परिवार बहुत ही कठिनाई में जीवनयापन कर रहे थे. ऐसे में एक दिन उसने और उसके पिता ने मणिपुर जाने का निर्णय लिया, जहां शायद रोजगार के अवसर मिल सके. इस निर्णय के बाद, सोनेलाल अपने पिता बिरेंद्र मुखिया के साथ मणिपुर के काकचिंग जिले में मजदूरी करने चला गया. वहां उसे प्रतिदिन 500 रुपये की दिहाड़ी पर काम मिल गया था. दीपावली के अगले दिन, यानी एक नवंबर को सोनेलाल ने घर से रवाना होकर अपनी मेहनत से घर का खर्च और अपने छोटे भाईयों की पढ़ाई का खर्च उठाने की उम्मीद जतायी थी.

सोनेलाल की हत्या से टूट गया भाईयों का सपना

सोनेलाल की मां लीलावती देवी ने बताया कि छठ महापर्व के समय लोग घर लौटते हैं, लेकिन पेट की भूख ऐसी थी कि हमें त्योहार से पहले ही मणिपुर जाना पड़ा. बेटे ने हमेशा हमें भरोसा दिलाया था कि वह छोेटे भाईयों लक्ष्मण और आनंद की पढ़ाई के लिए भी पैसा भेजेगा, लेकिन अब वो हमसे हमेशा के लिए दूर चला गया. लीलावती देवी के आंसू थम नहीं रहे थे और उनकी बातों में एक गहरी चिंता और दुःख का आभास हो रहा था. बीते तीन दिसंबर को सोनेलाल ने अपने घर के लिए कुछ पैसे भेजे थे और अगले महीने घर बनाने के लिए और पैसे इकट्ठा करने की योजना बनायी थी. सोनेलाल का सपना था कि उसकी मेहनत से उसका परिवार एक बेहतर जीवन जी सकेगा. लेकिन 14 दिसंबर को मणिपुर में हुई उपद्रवी घटना ने सोनेलाल की जीवन की सभी आशाओं को समाप्त कर दिया. हिंसा वाले मणिपुर में उपद्रवियों ने सोनेलाल को गोली मारी और उसकी मृत्यु हो गयी. सोनेलाल की हत्या के बाद उसके परिवार में शोक का माहौल है. पिता वीरेंद्र मुखिया, सोनेलाल के शव को इम्फाल मेडिकल कॉलेज से पोस्टमार्टम के बाद लेकर गोपालगंज के लिए रवाना हो गये हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन