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Bihar Election 2025: चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा, जातीय गणित में दफन हो गया बरौली को अनुमंडल बनाने का मुद्दा

Updated at : 17 Oct 2025 12:13 PM (IST)
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Bihar Election 2025: चाय की दुकान पर चुनावी चर्चा, जातीय गणित में दफन हो गया बरौली को अनुमंडल बनाने का मुद्दा

Bihar Election 2025: बरौली बाजार के सुजीत कुमार उर्फ विधायक की चाय दुकान पर कुछ बेंच लगे हैं और उस पर बुजुर्ग तथा युवा बैठकर चाय आने का इंतजार कर रहे हैं और चुनाव की चर्चा जारी है.

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Bihar Election 2025: गोपालगंज. बरौली. सुबह सात बज रहे हैं. बरौली नगर के आसपास के ग्रामीणों का चाय की चुस्की के लिए पहुंचना जारी है. इंद्रसेन प्रसाद ने चर्चा शुरू करते हुए कहा कि इस बार का विधानसभा चुनाव त गजबे हो रहा है, अभी सुनने में आ रहा है कि फलां पार्टी से फलां आदमी नामांकन करा रहे हैं, थोड़ी देर के बाद सूचना मिल रही है कि उनको सिंबल ही नहीं मिला, अब कोई और पार्टी का प्रत्याशी नामांकन करायेगा. जब पार्टियां ही जात कम्बिनेशन देख रही है, तो वोटर भला क्या करे. मुख्य मुद्दा कोई नहीं उठा रहा और किस जात का वोट किसको मिलेगा, चारों ओर इसी की चर्चा हो रही है.

जातीय गणित में हर तरह का मुद्दा ही समाप्त

बगल में बैठे बाबुराम भाई भी इस चुनावी चर्चा में शामिल हो जाते हैं. वह अभी कुछ कहते कि मो. आरिफ ने मुंह खोला और कहा कि इस जातीय गणित में हर तरह का मुद्दा ही समाप्त हो गया है. चुनाव के शोर में बरौली को अनुमंडल बनाने का सपना दफन हो गया है. इस बीच सुजीत कुमार अपने हाथ से चाय बना कर इनके बीच बांटते हैं. तभी प्रोफेसर संतोष श्रीवास्तव आते हैं तथा बातचीत में शामिल होते हुए कहते हैं कि बरौली को अनुमंडल बनाने के लिए जयनाथ यादव और विजय प्रताप सिंह ने वर्ष 1990 में आंदोलन की शुरुआत की थी. हर चुनाव में बरौली को अनुमंडल बनाने के लिए वादा हुआ.

अनुमंडल का मुद्दा गायब

सामाजिक कार्यकर्ता नरेश परमार्थी ने अनुमंडल बनाने के लिए वर्ष 2014 में प्रत्येक गांव, बाजार में नुक्कड़ सभा कर लोगों को जागरूक करने के लिए आंदोलन कर शुरुआत की. लोगों को लगा कि यह आंदोलन अंतिम रूप लेगा, लेकिन इस बीच नरेश परमार्थी की 19 मई 2015 को मौत हो गयी. उनकी मौत के बाद अनुमंडल का मुद्दा गायब हो गया है. इस चुनाव को जातीय समीकरण बना कर प्रबुद्ध लोग से लेकर राजनीतिक दल भी देख रहे हैं. आगे क्या होगा, इसकी चिंता सबके चेहरे पर दिख रही थी.

मुद्दे के गुम होने का मलाल

बुजुर्गों के चेहरे पर इस महत्वपूर्ण मुद्दे के गुम होने का मलाल साफ झलक रहा था और वे चुनाव में लोगों को जाति के नाम पर बांट कर नेताओं द्वारा वोट लेने के मुद्दे पर आक्रोशित भी दिख रहे थे. चर्चा में हजरत अली, मनोज पटेल, अलाउद्दीन, बबलु जैसे युवा वोटरों ने कहा कि अनुमंडल का मामला तो गुम हो गया है. हम शपथ लेते हैं कि इस चुनाव में किसी लालच, दबाव आदि में आकर वोट नहीं करेंगे. अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट देंगे. साथ ही सभी लोगों को मतदान केंद्र पर जाकर वोट देने की अपील भी करेंगे.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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