लंदन स्कूल आफ इकोनोमिक्स की तर्ज पर पटना में कौटिल्य स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स

Published at :08 Apr 2016 12:00 AM (IST)
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लंदन स्कूल आफ इकोनोमिक्स  की तर्ज पर पटना में  कौटिल्य स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स

लंदन स्कूल आफ इकोनोमिक्स की तर्ज पर पटना में कौटिल्य स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स राजपाट पन्ने का बाटमराष्ट्रीय स्तर के इस संस्थान के लिए तैयारी शुरू संवाददाता, पटनाकौटिल्य का अर्थशास्त्र एक बार फिर देश दुनिया में पाटलिपुत्र का परचम लहरायेगा. राज्य सरकार पाटलिपुत्र की धरती पर राष्ट्रीय स्तर का अर्थशास्त्र की पढाई के लिए कौटिल्य स्कूल […]

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लंदन स्कूल आफ इकोनोमिक्स की तर्ज पर पटना में कौटिल्य स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स राजपाट पन्ने का बाटमराष्ट्रीय स्तर के इस संस्थान के लिए तैयारी शुरू संवाददाता, पटनाकौटिल्य का अर्थशास्त्र एक बार फिर देश दुनिया में पाटलिपुत्र का परचम लहरायेगा. राज्य सरकार पाटलिपुत्र की धरती पर राष्ट्रीय स्तर का अर्थशास्त्र की पढाई के लिए कौटिल्य स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स संस्थान की स्थापना करने जा रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर आरंभ हो रहे इस संस्थान को दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के तर्ज पर स्थापित किया जायेगा. संस्थान में देश-विदेश के शिक्षक उपलब्ध होंगे. संस्थान में अर्थाशास्त्र की विशेष पढ़ाई होगी. इस संस्थान की स्थापना का मकसद राज्य में बेहतर अर्थाशास्त्री तैयार करना है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था में योगदान कर सके. कौटिल्य स्कूल आॅफ अर्थशास्त्र संस्थान में अगले साल से पढाई शुरू हो जायेगी. सरकार के स्तर पर इसके लिए सभी आवश्यक तैयारी शुरू हो गयी है. इसके लिए शुक्रवार को मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह और शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव समेत अन्य अधिकारियों ने तैयारी की समीक्षा की है. कौटिल्य स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में आधुनिक अर्थशास्त्र और समय की मांग के अनुरूप राज्य और देश की अर्थव्यवस्था में हो रहे परिवर्तन अौर विकास का अध्ययन होगा. इससे जहां राज्य में आर्थिक विकास को गति देने के लिए विशेषज्ञ मिलेंगे वहीं पाटलिपुत्र में चाणक्य की चर्चित अर्थशास्त्र की याद जाता होगी. शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि इसके लिए फिलहाल जमीन, भवन और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशासनिक तैयारी शुरू की गयी है. जमीन चिह्नित होने के बाद अन्य तैयारी शुरू कर दी जायेगी. इस पहले चरण की तैयारी पूरी होते ही शिक्षकों की नियुक्ति समेत अन्य तैयारी को पूरा किया जायेगा. हाल ही में आद्री द्वारा आयोजित रजत जयंती समारोह में फ्रांस के अर्थशास्त्री जीन बायलट ने कहा था कि भारत को विकास औा सुशासन के लिए वाशिंगटन नहीं चाणक्य के अर्थाशास्त्र से सिखना चाहिए. उन्होंने कहा कि था चाणक्य का अर्थाशास्त्र सुशासन और विकास की शिक्षा देता है.

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