गैर सरकारी वन भूमि पर 200 वृक्ष काटने के एवज में नहीं लगाने होंगे एक हजार पौधे

Published at :08 Apr 2016 12:00 AM (IST)
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गैर सरकारी वन भूमि पर 200 वृक्ष काटने के एवज में नहीं लगाने होंगे एक हजार पौधे

गैर सरकारी वन भूमि पर 200 वृक्ष काटने के एवज में नहीं लगाने होंगे एक हजार पौधे 28 जनवरी,2013 को गैर वन भूमि पर वृक्षों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने बनाया था नियमवन विभाग के कड़े प्रावधान के कारण सूबे में उद्योग व कॉमर्शियल-कॉम्पलेक्सों का नहीं हो रहा था निर्माण बिहार इंडस्ट्री एसोसियेशन […]

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गैर सरकारी वन भूमि पर 200 वृक्ष काटने के एवज में नहीं लगाने होंगे एक हजार पौधे 28 जनवरी,2013 को गैर वन भूमि पर वृक्षों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने बनाया था नियमवन विभाग के कड़े प्रावधान के कारण सूबे में उद्योग व कॉमर्शियल-कॉम्पलेक्सों का नहीं हो रहा था निर्माण बिहार इंडस्ट्री एसोसियेशन व चैंबर ऑफ काॅमर्स ने नियम को शिथिल करने की सरकार से लगायी थी गुहार संवाददाता, पटना गैर सरकारी वन भूमि पर 200 वृक्षों की कटाई करने के एवज में भू-स्वामियों को अब एक हजार पौधे नहीं लगाने होंगे. वन पर्यावरण विभाग ने अपने इस नियम को शिथिल कर दिया है. वन-पर्यावरण विभाग ने 28 जनवरी, 13 को गैर वन भूमि पर वृक्षों की सुरक्षा के लिए यह नियम बनाया था. इस प्रावधान को ले कर पिछले चार वर्षों से गैर वन भूमि पर न कोई उद्योग और न कोई कॉमर्शियल-कॉम्पलेक्स आदि बन रहे थे. 2013 के इस प्रावधान को शिथिल करने से गैर वन-भूमि पर इसके निर्माण की बाधा समाप्त हो गयी. जनवरी, 2013 में वन पर्यावरण विभाग के इस अधिनियम के कारण सूबे में गैर वन-भूमि पर आयरन, फूड प्रोसेसिंग, मसाला, वुड-क्राफ्ट इंडस्ट्री और काॅमर्शियल कॉम्पलेक्साें का निर्माण कराने में भारी परेशानी हो रही थी. 200 से कम वृक्षों वाले गैर-वन भूमि पर वृक्षों की कटाई करने के एवज में कम-से-कम एक हजार पौधे लगाना अनिवार्य कर दिया था. इंडस्ट्री या कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों का निर्माण कराने के लिए सूबे में वैसे भी जमीन का जबरदस्त टोटा है. किसी तरह इंडस्ट्रियलिस्ट कोई गैर- वन भूमि खरीदते भी हैं, तो उनके लिए एक हजार पौधे लगाना सीमित भूमि पर संभव नहीं हो पा रहा था. बिहार इंडस्ट्री एसोसिएशन, बिहार चैंबर ऑफ काॅमर्स और बिहार-झारखंड मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन ने सरकार और वन विभाग से इस अधिनियम को कई बार शिथिल करने का आग्रह किया था. अब जा कर वन विभाग ने इस नियम को शिथिल किया है.

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