योजना आकार में पांच हजार की कटौती, 57 से घटकर हुआ 52 हजार करोड़ का आकार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Dec 2015 6:49 PM

विज्ञापन

योजना आकार में पांच हजार की कटौती, 57 से घटकर हुआ 52 हजार करोड़ का आकार- राज्य में मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान 57 हजार करोड़ का रखा गया है योजना आकार- आंतरिक टैक्स स्रोत में कमी आने और केंद्र से पैसा कम आने के कारण भी घटा योजना आकार- झारखंड से भी नन-टैक्स के […]

विज्ञापन

योजना आकार में पांच हजार की कटौती, 57 से घटकर हुआ 52 हजार करोड़ का आकार- राज्य में मौजूदा वित्तीय वर्ष के दौरान 57 हजार करोड़ का रखा गया है योजना आकार- आंतरिक टैक्स स्रोत में कमी आने और केंद्र से पैसा कम आने के कारण भी घटा योजना आकार- झारखंड से भी नन-टैक्स के तहत बकाये रुपये नहीं मिलने के कारण योजना आकार हुआ प्रभावितसंवाददाता/कौशिक रंजन, पटनाराज्य का योजना आकार इस बार बजट में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नहीं रह पायेगा. करीब पांच हजार कटौती के बाद योजना आकार घटकर 57 हजार करोड़ से 52 हजार करोड़ तक रहने का अनुमान है. योजना आकार में पांच हजार करोड़ की कमी आयेगी. इससे कई योजनाओं में खर्च करने के लिए निर्धारित लक्ष्य से कम रुपये मिलेंगे. योजना आकार के छोटा होने के कई कारणों में दो प्रमुख हैं. इसमें राज्य के आंतरिक स्रोतों में निर्धारित लक्ष्य से कम टैक्स का जमा होना और केंद्र से ग्रांट या अनुदान तथा केंद्रीय करों में कम टैक्स मिलना शामिल है. मौजूदा वित्तीय वर्ष 2015-16 खत्म होने में महज तीन महीने बचे हैं, ऐसे में निर्धारित लक्ष्य पूरा होने की संभावना काफी कम दिख रही है. इस कारण योजना आकार छोटा हो जायेगा. गौरतलब है कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी योजना आकार 57 हजार करोड़ का ही था, लेकिन स्रोत की कमी के कारण यह घटकर 44 हजार करोड़ ही रह गया था. इस बार इससे आठ हजार करोड़ ज्यादा रहने का अनुमान है.योजना आकार घटने के प्रमुख कारणसूबे में चालू वित्तीय वर्ष के बजट का योजना आकार पांच हजार करोड़ घटने की संभावना है. इसका प्रमुख कारण केंद्र से मिलने वाले अनुदान के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) मद में कटौती होना है. साथ ही राज्य के आंतरिक स्रोतों से टैक्स संग्रह करने में भी कमी आने के कारण भी योजना आकार छोटा हो जायेगा. आंतरिक टैक्स स्रोतों से जितना राजस्व जमा करने का लक्ष्य रखा गया था, उसमें कमी आना तय माना जा रहा है. इसके अलावा सबसे प्रमुख कारण में झारखंड से बिहार को मिलने वाले बकाया 1600 करोड़ रुपये के नहीं मिलने से भी योजना आकार प्रभावित हुआ है. जब से बिहार-झारखंड का बंटवारा हुआ था, तब से ये रुपये राज्य को नहीं मिले हैं.केंद्र से पैसे आने की रफ्तार धीमीकेंद्र से मिलने वाले सेंट्रल ग्रांट या सीएसएस के तहत चलने वाली योजनाओं के मद में 18 हजार करोड़ रुपये मौजूदा वित्तीय वर्ष में मिलना है, इसमें अभी तक महज 11 हजार 900 करोड़ रुपये ही आये हैं. इसके अलावा केंद्र से मिलने वाले टैक्स शेयर में 30 हजार 875 करोड़ रुपये राज्य को मिलना है, इसमें अभी तक 17 हजार करोड़ रुपये ही आये हैं.इस कारण प्रभावित हुआ टैक्स कलेक्शनराज्य में विधानसभा चुनाव के कारण करीब तीन-चार महीने तमाम सरकारी काम बेहद धीमी गति से हुए हैं. इसका प्रभाव टैक्स संग्रहण पर भी पड़ा है. वाणिज्य कर, उत्पाद एवं निबंधन, ट्रांसपोर्ट समेत अन्य विभागों में टैक्स संग्रहण निर्धारित लक्ष्य से कम होने का अनुमान है. इस कारण से आंतरिक स्रोत प्रभावित होंगे. इसके अलावा नियोजित शिक्षकों समेत अन्य कई स्तर पर संविदा कर्मचारियों को वेतन देने की घोषणा करने और कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देने से भी गैर-योजना आकार बढ़ा है. इसका दवाब योजना आकार पर भी पड़ा है. टैक्स कलेक्शन के प्रमुख स्रोत में निर्धारित लक्ष्यवाणिज्य कर 21,375 उत्पाद 4,000निबंधन 4,000ट्रांसपोर्ट 1,200खनन 1,000

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन