संडे खास : मिठाई दुकानदार से बना पेट्रोल पंप का मालिक

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Dec 2015 6:22 PM

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मीरगंज : बेरोजगारी और घर के खर्च ने पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. पिड़िकिया का जब कारोबार शुरू किया, तो लोगों के ताने सहने पड़ेे. मैंने अपनी मेहनत की बदौलत अपने जीवन के सफर शुरुआत की. किस्मत ने साथ दिया, तो पेट्रोल पंप के मालिक बनने के साथ ही पिड़िकिया (मिठाई)का कारोबार भी […]

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मीरगंज : बेरोजगारी और घर के खर्च ने पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर कर दिया था. पिड़िकिया का जब कारोबार शुरू किया, तो लोगों के ताने सहने पड़ेे. मैंने अपनी मेहनत की बदौलत अपने जीवन के सफर शुरुआत की. किस्मत ने साथ दिया, तो पेट्रोल पंप के मालिक बनने के साथ ही पिड़िकिया (मिठाई)का कारोबार भी चमक उठा है. आज भी झोंपड़ीनुमा दुकान में घर के सदस्यों के अलावा आठ मजदूर कार्यरत हैं. रोजाना एक क्विंटल से ज्यादा पिड़िकिया की बिक्री हो रही है.

पेट्रोल पंप होने के बावजूद आज भी यह व्यवसायी परिवार इस दुकान को ही अपना मंदिर मानता है. मीरगंज नगर के नरैनिया मोड़ पर दुकान में ग्राहकों की कतार लगी रहती है. 30 साल पहले शुरू किया था धंधा 1985 के आसपास मानिकपुर गांव से नरेश साह ने नरैनिया में मिठाई की दुकान खोली थाी. उनकी मौत के बाद उनके बेटे हरेंद्र साह ने पिता की विरासत को संंभाली.

पिड़िकिया के साथ लड्डु तथा पेड़े भी बनने लगे. आज इस व्यवसाय की बदौलत मैंने जिगना गांव में जनवरी, 2015 में पेट्रोल पंप खोल दिया है. मैंने अपने बड़े भाई स्व ब्रजकिशोर साह के बेटे सूरज को पंप की जिम्मेवारी सौंप दी. आज भी वे पेट्रोल पंप के बजाय इस दुकान पर ही बैठना ज्यादा पसंद करते हैं.ग्राहक ने दिखायी राह मिठाई दुकान से पंप मालिक बनने के सफर के बारे में हरेंद्र साह बताते हैं कि उनकी दुकान पर आये एक ग्राहक ने पेट्रोल पंप खोलने की सलाह दी.

जिगना में पंप खोलने का प्रस्ताव अखबार में निकला है. मैंने अपना भाग्य अजमाने के लिए आवेदन कर दिया. पंप आवंटन होने के बाद लगभग 20 लाख रुपये की व्यवस्था कर पंप खोला गया. इसमें से ज्यादातर रकम बैंक आदि से कर्ज लेकर पूरी की गयी. आज इस परिवार की नयी पीढ़ी भी पिड़िकिया के व्यवसाय को लेकर काफी उत्साहित है. बेटों को मुकाम दिलाने का सपनाइस कारोबार में हरेंद्र साह के सहोदर भाई तारकेश्वर प्रसाद भी सहयोग करते हैं. पूरा परिवार संयुक्त है.

बेटा रितेश कुमार इंटर का छात्र है, तो दूसरा बेटा अनुज वर्ग छह में पढ़ता है. बेटी साक्षी इंटर में, तो शिल्पी वर्ग नौ की छात्रा है. बच्चों को मुकाम दिलाने का सपना है. बड़ा बेटा इंजीनियर बनना चाहता है, तो छोटे बेटे को प्रोफेसर बनाना है. एक बेटी को डॉक्टर तथा दूसरी को शिक्षक बनने का सपना है. भाई के बच्चों को भी डॉक्टर और इंजीनियर बनाने की इच्छा रखते हैं. हरेंद्र आज इलाके के लोगों के लिए एक आइडियल के रूप में जाने जा रहे हैं.

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