चीनी मिलों के सामने गन्ने का है संकट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Dec 2015 7:04 AM

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परेशानी .गन्ने की खेती छोड़ने लगे हैं किसान अंगरेजी हुकूमत से गन्नांचल के नाम से प्रसिद्ध गोपालगंज जिले में चीनी मिलें संकट की दौर से गुजर रही हैं. गन्ने से किसानों का मोह भंग होने लगा है. गन्ने का क्षेत्रफल लगातार हर वर्ष कम हुआ है. गन्ने की खेती से किसान विमुख होते जा रहे […]

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परेशानी .गन्ने की खेती छोड़ने लगे हैं किसान
अंगरेजी हुकूमत से गन्नांचल के नाम से प्रसिद्ध गोपालगंज जिले में चीनी मिलें संकट की दौर से गुजर रही हैं. गन्ने से किसानों का मोह भंग होने लगा है. गन्ने का क्षेत्रफल लगातार हर वर्ष कम हुआ है. गन्ने की खेती से किसान विमुख होते जा रहे हैं. इसकी जगह अन्य फसल पर जोर है. इसका खामियाजा चीनी मिलों को इस वर्ष पेराई सत्र से से ही भुगतना पड़ रहा है. किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण वे सब्जी और अन्य नकदी फसल पर काम कर रहे हैं.
गोपालगंज : जिले के किसान चीनी मिलों से भुगतान नहीं होने के कारण अब गन्ने की खेती धीरे-धीरे छोड़ने लगे हैं. गन्ने की खेती का क्षेत्रफल घटने से अभी से ही चीनी मिलों के सामने गन्ने का संकट उत्पन्न हो गया है. 30 नवंबर से गोपालगंज की विष्णु शूगर मिल, सिधवलिया की भारत शूगर मिल तथा सासामुसा चीनी मिल ने पेराई सत्र शुरू किया. लेकिन, गन्ने की कमी के कारण एक दिन भी 24 घंटा मिल सुचारु ढंग से नहीं चल पायी है.
चीनी मिलों के पास महज तीन से चार घंटा चलने के लायक गन्ना उलब्ध हो पा रहा है. गन्ना नहीं मिलने से प्रबंधन से लेकर मालिकान तक चिंतित हैं. उधर, अब भी चीनी मिलों पर पिछले वर्षों के गन्ने का बकाया करोड़ोंरुपये का भुगतान किसानों को नहीं हुआ है. गन्ने की कमी के कारण सासामुसा चीनी मिल में किसानों को नकद भुगतान दिया जा रहा है.
गन्ना गिराने के साथ ही किसानों को अगले दिन भुगतान मिल जा रहा है. फिर भी गन्ने का संकट चीनी मिल के सामने बना हुआ है. चीनी मिल के अधिकारी नकद भुगतान की बात की अाधिकारिक पुष्टि नहीं कर रहे हैं, लेकिन किसानों ने बताया कि सासामुसा चीनी मिल नकद भुगतान कर रही है. रबी फसल की बोआई के कारण किसान गन्ने की कटाई छोड़ कर गेहूं की बोआई में लगे हैं. इससे अपेक्षित गन्ना चीनी मिल को नहीं मिल रहा है.
प्रतिदिन 50 हजार क्विंटल गन्ने की आवश्यकता है, लेकिन 40 हजार क्विंटल से अधिक 18 दिनों में गन्ना किसी दिन नहीं मिला. इस कारण मिल तीन से चार घंटा चलने के लायक ही रह गयी है. विष्णु शूगर मिल, गोपालगंज के महाप्रबंधक पीआरएस पाणिकर ने बताया कि गन्ना कम आने के कारणों को मिल प्रबंधन भी नहीं समझ पा रहा है.
गन्ना उद्योग विभाग ने नहीं दिया आवंटन
गन्ना उद्योग विभाग की तरफ से गन्ना किसानों को नि:शुल्क बीज, खाद, किट नाशक आदि के लिए भी कोई आवंटन इस वर्ष नहीं दिया गया है. आवंटन का इंतजार विभाग को है.
आवंटन नहीं मिलने से शीतकालीन गन्ने की बोआई के वक्त किसानों को खाद-बीज उपलब्ध नहीं हुआ. अब बसंत कालीन गन्ने पर नजर टिकी हुई है. बसंत कालीन गन्ने के वक्त तक आवंटन आया, तो किसानों के गन्ना लगाने की उम्मीद जतायी जा रही है.
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