खेती-बाड़ी पेज के लिए.... असंपादित..

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खेती-बाड़ी पेज के लिए…. असंपादित..खेती को बनाया कैरियर, आज बेटा इंजीनियर बन देश की सेवा में लगा मुंबई मंे ठेकेदारी छोड़ कर गांव में शुरू की थी खेतीबुलंद हौसला और दृढ़ संकल्प ने दिलायी मुकामफोटो-18संवाददाता, उचकागांवमुंबई से ठेकेदारी को छोड़ कर गांव में सब्जी की खेती को कैरियर बनाया. आलू, गोभी, मूली, मटर, मिर्च की […]

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खेती-बाड़ी पेज के लिए…. असंपादित..खेती को बनाया कैरियर, आज बेटा इंजीनियर बन देश की सेवा में लगा मुंबई मंे ठेकेदारी छोड़ कर गांव में शुरू की थी खेतीबुलंद हौसला और दृढ़ संकल्प ने दिलायी मुकामफोटो-18संवाददाता, उचकागांवमुंबई से ठेकेदारी को छोड़ कर गांव में सब्जी की खेती को कैरियर बनाया. आलू, गोभी, मूली, मटर, मिर्च की खेती शुरू की. खेती को पूरे लगन और दृढ़ संकल्प के साथ किया. तमाम झंझावतों को झेलते हुए बुलंदी की बुनियाद खड़ा की. अपने दोनों बेटों को इंजीनियर बना कर देश की सेवा में लगा दिया. आज चेहरा में सूकुन है. अपने सफलता का विश्वास भी हम बात कर रहे है फुलवरिया ा्रखंड के सेलार खुर्द गांव के रामायण प्रसाद गुप्ता का है. 90 के दशक में रामायण प्रसाद गुप्ता मुंबई में ठेकेदारी कर परिवार की माली हालत सुधारने गये थे. मुंबई की चका चौंध की दुनिया को छोड़ कर पुन: घर इसलिए आना पड़ा कि परिवार को संभालने वाला कोई नहीं था. परिवार का एकलौता कर्ता धर्ता रामायण थे. कभी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटे. गांव में चार एकड़ जमीन में सब्जी की खेती कर प्रति वर्ष 4-5 लाख रुपये की आमदनी करने लगे. सब्जी की खेती के बदौलत न सिर्फ अपना तसवीर बदली बल्कि समाज में एक अलग पहचान भी बना लिया. आज रामायण इलाके के लोगों के लिए मिशाल बने हुए है. खेतों में पहुंचते है कारोबारीरामायण प्रसाद की मेहनत जब रंग लायी तो इनके खेतों मंे कारोबारी पहुंच कर इनकी सब्जियों को खरीदने लगे. आज सुबह सात बजते ही इनके खेत में सब्जी खरीदने के लिए खरीदारों की भीड़ लग जाती है. इलाके के सब्जी विक्रेता उनके सब्जियों को मुंह मांगी रकम देते है. कारण भी स्पष्ट है कि सीजन से पहले इनकी सब्जी तैयार हो जाती है. बच्चों की पढ़ाई पर दी पूरी ध्यान रामायण बच्चों के पढ़ाई पर पूर ध्यान दिया . इन्होंने खेती के बल पर ही बड़े लड़के सुधीर कुमार को इंजीनियर की पढ़ाई पूरी करायी आज वह चेन्नई के एक निर्माण कंपनी में काम करता है. तो दूसरा बेटा अनिल कुमार को आई टी आई कराया. अब इनके नौकरी में है. बेटों की सफलता पर इन्हें गर्व जरूर है. लेकिन खेती इनका अब जुनून बना हुआ है. खेती के बदौलत समाज में अलग पहचान बना रखे है.

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