शिवसेना(यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत ने कहा-गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी
अरविंद सावंत के साथ संजय राउत
Shiv Sena UBT : शिवसेना(यूबीटी)की संसदीय दल की बैठक में उनके 6 बागी सांसद के नहीं पहुंचने से यह साफ हो गया है कि पार्टी एक बार फिर टूटने वाली है. साथ ही इस बात की संभावना बढ़ गई है कि बागी सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ चले जाएंगे.
Shiv Sena UBT : शिवसेना(उद्धव बालासाहेब ठाकुर गुट) की संसदीय दल की मीटिंग के बाद पार्टी के शीर्ष नेता संजय राउत ने कहा कि व्हिप जारी किए जाने के बाद भी 6 सांसद बैठक में नहीं पहुंचे. हम उन सांसदों को गद्दार मानते हैं और हम उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए कदम उठाएंगे.
बेईमानी कर रहे हैं गद्दार सांसद : संजय राउत
संजय राउत ने मीडिया के सामने यह कहा कि जो सांसद पार्टी के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. उन्हें पार्टी कारण बताओ नोटिस जारी करेगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. राउत ने कहा कि पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करना अनुशासनहीनता है. वे बेईमानी कर रहे हैं और धोखा कर रहे हैं. पार्टी के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि उन्हें शोकाॅज नोटिस आज ही भेजा जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी की बैठक में क्यों नहीं आए.
गंदी राजनीति का परिणाम भुगतना पड़ेगा
संजय राउत ने मीडिया के सामने यह कहा कि एकनाथ शिंदे और बीजेपी जिस तरह की गंदी राजनीति कर रही है उसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ेगा. संजय राउत ने बृहस्पतिवार को भी मीडिया के सामने बागी सांसदों के लिए अपशब्द कहे. उन्होंने कहा कि ये लोग बेईमान और धोखेबाज हैं, इसके साथ ही उन्होंने अपशब्द भी कहे. बुधवार को संजय राउत ने यह दावा किया था कि उनके सांसदों को 50-50 करोड़ देकर खरीदा जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि जो जाना चाहते हैं वो जाएं, लेकिन इस्तीफा देकर जाएं. इससे पीछे तर्क यह है कि वे शिवसेना के नाम पर जीतकर आएं हैं, तो जनता के साथ धोखेबाजी नहीं चलेगी. जिन छह सांसदों के अलग ग्रुप बनाने की संभावना है, उनके नाम हैं-संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी), संजय देशमुख (यवतमाल), नागेश पाटिल अष्टीकर (हिंगोली), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट).
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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