शिवसेना में फूट पर बोले जयराम रमेश-2/3 मेजॉरिटी के लिए सभी पार्टियों को तोड़ने में जुटे हैं पीएम मोदी-अमित शाह

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Jairam Ramesh

जयराम रमेश

Shiv Sena UBT : लोकसभा में शिवसेना(उद्धव बाला साहेब ठाकरे) गुट के नौ सांसद हैं, जिनमें से 6 सांसदों के बागी होने की खबर है. पार्टी ने बुधवार को दावा किया कि सांसदों को 50-50 करोड़ रुपए दिये जा रहे हैं और उन्हें खरीदा जा रहा है. अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा है कि शिवसेना में जो कुछ हो रहा है उसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का दिमाग है.

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Shiv Sena UBT : उद्धव ठाकरे की शिवसेना के नौ में से 6 सांसदों के अलग गुट बनाने की खबरों पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह सबकुछ पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की वजह से हो रहा है. चूंकि सरकार 17 अप्रैल, 2026 को संविधान का 131वां संशोधन विधेयक पारित नहीं करा सकी, इसलिए वे परेशान हैं और सभी पार्टियों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

विपक्ष का हौसला तोड़ना चाहती है सरकार

जयराम रमेश का दावा है कि लोकसभा में जब सरकार को दो तिहाई बहुमत नहीं मिला और गृहमंत्री को परिसीमन के मुद्दे पर बेइज्जती सहनी पड़ी, तो वे सभी पार्टियों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. शिवसेवा(उद्धव बाला साहेब ठाकरे गुट) के साथ अभी जो कुछ हो रहा है उसकी वजह यही कोशिश है. उन्होंने कहा कि आप घटनाओं की क्रोनोलॉजी समझिए. मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि उन्हें 2/3 मेजॉरिटी नहीं मिलेगी. यह विपक्ष का हौसला तोड़न के लिए किया जा रहा है. यह संविधान और लोकतंत्र पर हमला है. मौजूदा होम मिनिस्टर गंदी पॉलिटिक्स कर रहे हैं. यह नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस नहीं बल्कि नेशनल डिफेक्टर अलायंस है. बीजेपी तोड़फोड़ की राजनीति कर रही है, जिस पद पर कभी सरदार पटेल बैठे थे, उस पद पर बैठकर यह ऐसी राजनीति कर रहे हैं.

संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों पर कार्रवाई होगी

शिवसेना(यूबीटी) में टूट की खबरों के बीच बृहस्पतिवार को पार्टी की संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है. आशंका है कि बागी सांसद इस मीटिंग में शामिल नहीं होंगे. पार्टी के नेता अरविंद सावंत ने कहा कि व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं राज्यसभा सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि बागियों को सबक सिखाने की जरूरत है. संजय राउत ने बुधवार को कहा था कि 50-50 करोड़ में सांसदों को खरीदा जा रहा है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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