लेक्चरर बहाली के बाद भी विवि में खाली रह जायेंगी सीटें

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लेक्चरर बहाली के बाद भी विवि में खाली रह जायेंगी सीटें- पिछले एक साल से खाली हुए सीटों को नहीं किया गया शामिल – स्टैट्यूट के अनुसार एक साल के भीतर खाली हुए अनुमानित सीटों को भी शामिल करना था- 25 प्रतिशत सीटों के ऐसे भी बैकलॉग रखा गया है – पीयू और अन्य विश्वविद्यालयों […]

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लेक्चरर बहाली के बाद भी विवि में खाली रह जायेंगी सीटें- पिछले एक साल से खाली हुए सीटों को नहीं किया गया शामिल – स्टैट्यूट के अनुसार एक साल के भीतर खाली हुए अनुमानित सीटों को भी शामिल करना था- 25 प्रतिशत सीटों के ऐसे भी बैकलॉग रखा गया है – पीयू और अन्य विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में सीटें रह जायेंगी खाली संवाददाता, पटना लेक्चरर बहाली के बाद भी राज्य के विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जायेंगी. इसकी कई वजहें है. बहाली के लिए विज्ञापन निकाले जाने से लेकर अब तक में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों का रिटायरमेंट हुआ है. स्टैट्यूट के अनुसार एक साल के भीतर खाली हुए अनुमानित सीटों को भी शामिल किया जाना चाहिए था. करीब 25 प्रतिशत सीटों के एेसे भी सरकार ने बैकलॉग रखा हैं और इन पर बहाली बाद में करने का फैसला लिया हैं. यानी बहाली के बाद भी शिक्षकों की समस्या विवि में कम होने वाली नहीं हैं.2014 तक की रिक्तियों पर ही हो रही बहालीबिहार सरकार के गजट 14 अगस्त 2013 के अनुसार पीयू अधिनियम में बहाली के लेकर जो नियम हैं उसके तहत विषयवार रिक्तियों के अगले पंचांग वर्ष की अनुमानित रिक्तियों सहित आरक्षण रोस्टर के साथ प्रत्येक वर्ष की 31वीं दिसंबर तक विवि द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग को भेजना था. लेकिन वर्तमान में जो बहाली हो रही हैं वह 2014 तक के रिक्तियों पर ही हो रही हैं. इस दौरान सिर्फ पीयू की बात करें तो पिछले एक डेढ़ साल में यहां करीब 40 से 50 शिक्षकों का रिटायर हुए हैं. वहीं अन्य विश्वविद्यालयों को मिलाकर यह संख्या एक हजार के करीब होने का अनुमान हैं. यानी बहाली प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं होगी. बिहारी छात्रों को नहीं होगा फायदा अभ्यर्थियों की माने तो सरकार के द्वारा जो बहाली का जा रही हैं. उसमें कई खामियां हैं. इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित बिहार के छात्र ही हो रहे हैं. एक अभ्यर्थी गुंजन कहते हैं कि जो प्रक्रिया सरकार अपना रही है उससे सीबीएसई एवं आईसीएससी के छात्रों को अधिक फायदा होगा. क्योंकि बिहार बोर्ड और सीबीएससी सभी के अंकों को समान्य वेटेज हैं. इसी तरह पीजी में भी सेमस्टर छात्रों को फायदा होगा जबकि बिहार में सेमेस्टर बाद में लागु हुआ. पीएचडी 2009 रेगुलेशन से बिहार में कोई भी छात्र नहीं हैं. हाइयर डिग्री को भी उतना ही प्वाइंट दिया गया हैं जिनका लोअर डिग्री को. इन सब वजहों से बिहार के छात्र ही इस बहाली में पिछड़ जायेंगे. बेट व सेट को शामिल नहीं किये जाने का भी विरोध व्याख्याता बहाली में बेट (बिहार इलिजिबिलिटी टेस्ट) और सेट (स्टेट इलिजिबिलिटी टेस्ट) के छात्रों को इस बहाली में दरकिनार किये जाने का भी अभ्यर्थियों में विरोध है. बेट के संबंध में जानकार बताते हैं कि बिहार सरकार के द्वारा ही 1997 में यह परीक्षा बिहार सरकार ने आयोजित की थी और अब वही अपनी ही परीक्षा को नहीं मान रही हैं जबकि सिर्फ नेट को महत्व दिया जा रहा है. प्रो आरके वर्मा (प्रतिकुलपति, पीयू) : बहाली के बाद भी सीटें खाली तो रह जायेंगी क्योंकि इस दरम्यान भी काफी शिक्षक रिटायर हुए हैं. हालांकि जो पैनल आयोग के द्वारा बनाया गया है उसकी वैलिडिटी एक साल तक रहती है. जो सीटें खाली हुई हैं हम सरकार को कम्यूनिकेट कर देंगे. हालांकि उन सीटों पर बहाली होगी या नहीं यह बीपीएससी को ही तय करना है.

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