जिसकी जितनी आबादी, उतनी मिले हस्सिेदारी : मांझी

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जिसकी जितनी आबादी, उतनी मिले हिस्सेदारी : मांझीभारत की समृद्धि का एकमात्र रास्ता संविधान विषय पर परिचर्चा आयोजितसंवाददाता, पटनाहिंदुस्तानी अवाम मोरचा सेकुलर ने डा. भीम राव अंबेदकर की पुण्यतिथि पर परिचर्चा का आयोजन किया. बीआइए सभागार में ‘भारत की समृद्धि का एकमात्र रास्ता संविधान विषय पर आयोजित परिचर्चा का उद्घाटन हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष व […]

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जिसकी जितनी आबादी, उतनी मिले हिस्सेदारी : मांझीभारत की समृद्धि का एकमात्र रास्ता संविधान विषय पर परिचर्चा आयोजितसंवाददाता, पटनाहिंदुस्तानी अवाम मोरचा सेकुलर ने डा. भीम राव अंबेदकर की पुण्यतिथि पर परिचर्चा का आयोजन किया. बीआइए सभागार में ‘भारत की समृद्धि का एकमात्र रास्ता संविधान विषय पर आयोजित परिचर्चा का उद्घाटन हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने किया. उन्होंने कहा कि जब तक राजनीति में हमारी भागीदारी नहीं होगी, तब तक हमारा विकास नहीं होगा. हमें आज दबाव में डाला जाता है. जो हमारा कत्लेआम करते हैं, वे आज हमारे पुरोद्धा बने हुए हैं. हमारी जनसंख्या को भी कम कर के आंका जाता है. आपको क्या करना है ये आपको सोचना होगा. उन्होंने कहा कि यह बाते जब उन्होंने मीडिया के सामने रखी तो कहा गया कि मांझी ने जनसंख्या बढ़ाने को कहा है. हमने लोहिया, जगदेव प्रसाद की बात कही, जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी हिस्सेदारी होनी चाहिए. हमने कहा कि बिहार में दलितों की आबादी 25 फीसदी है. उन्हें आबादी के अनुपात में आरक्षण मिले, तो कुछ लोगों के कलेजे पर सांप लोटने लगा. बाबा साहेब ने जिन चीजों का इशारा कर के गये हम उसे क्यों भूल जाते हैं? पृथक निर्वाचन नहीं होने से अनुसूचित जाति को अपना प्रतिनिधि चुनने में कठिनाई होती है. अगर पृथक निर्वाचन होता तो चुनाव से पहले तक जीतन राम मांझी बिहार का सीएम होता. पृथक निर्वाचन का न होना दलितों के विकास में बड़ी बाधा है. निजी क्षेत्र और न्यायिक में हमें आरक्षण मिलना चाहिए. तमिलनाडु में संविधान में संसोधन कर 69 प्रतिशत आरक्षण लिया, तो बिहार में क्यों नहीं? मांझी ने कहा कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद कहते हैं कि दलितों को एक करना चाहते हैं. हमने दलित-महादलित को कैबिनेट में एक कर दिया था. उसकी कहीं चर्चा नहीं है. शिक्षित हो, संगठित रहो और संघर्ष करो. बाबा साहेब के इसी बात को भी मान लें, तो भी हमारी स्थिति बेहतर हो जायेगी. पर हम आज ये भी नहीं कर पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि फेसबुक पर कुछ लोग मुझे ये कहते हैं कि जीतन मांझी भाजपा की गोद में चला गया, गद्दार है. पर वे नहीं समझ पा रहे हैं कि हम अकेले कुछ नहीं कर पाते. आरक्षण की समीक्षा इस दृष्टिकोण से हो कि इसमें कई नई जातियों को शामिल किया गया. आज हमारी आबादी 25 फीसदी है तो हमारा आरक्षण 25 प्रतिशत होना चाहिए. बैकलॉग काफी रिक्त है. उसे भरने की जरूरत है. अभी दलित और मुस्लिम को साथ लेकर चलते हैं तो काफी कुछ कर सकते हैं. इस मौके पर पूर्व मंत्री शाहिद अली खान, अनिल कुमार, लवली आनंद, नरेश शाह, शारिम अली, मंजू देवी, जेबा खातून, पार्टी पदाधिकारी ब्रह्मानंद पासवान, सुपेन्द्र चौधरी, बीएल वैश्यंत्री, गजेन्द्र मांझी, अरूण मुसहर, हरिकेश्वर राम, रघुवीर मोची, भागवत लाल वैश्यंत्री समेत अन्य मौजूद थे.

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