बिहार जनादेश से भाजपा ने कुछ भी नहीं सीखा : दीपकंर
बिहार जनादेश से भाजपा ने कुछ भी नहीं सीखा : दीपकंरजनादेश का सम्मान करने की बजाए नीतीश सरकार प्रतिरोध की आवाज को दबाने में लगी हैबाबरी मसजिद शहादत की 23 वीं बरसी पर पटना में वाम ब्लॉक ने निकाला सांप्रदायिकता विरोधी मार्चसंवाददाता, पटना बिहार जनादेश में गहरी शिकस्त खाने के बाद भी भाजपा ने कुछ […]
बिहार जनादेश से भाजपा ने कुछ भी नहीं सीखा : दीपकंरजनादेश का सम्मान करने की बजाए नीतीश सरकार प्रतिरोध की आवाज को दबाने में लगी हैबाबरी मसजिद शहादत की 23 वीं बरसी पर पटना में वाम ब्लॉक ने निकाला सांप्रदायिकता विरोधी मार्चसंवाददाता, पटना बिहार जनादेश में गहरी शिकस्त खाने के बाद भी भाजपा ने कुछ भी नहीं सीखा, बल्कि उलटा सबक लिया है. आरएसएस प्रमुख एक बार फिर राम मंदिर बनाने के बयान के साथ विभाजन की ही राजनीति इस देश में करना चाह रहे हैं, तो दूसरी ओर पिछले 26 नवंबर को संविधान दिवस के नाम पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने धर्मरिपेक्षता पर ही प्रश्न चिह्न खड़े कर दिये. उक्त बातें रविवार को भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कही. वे पटना के गेट-वे लाइब्रेरी के पास सांप्रदायिकता विरोधी मार्च को संबोधित कर रहे थे. वाम दलों के राष्ट्रव्यापी सांप्रदायिकता विरोधी सप्ताह के तहत बाबरी मसजिद की शहादत की 23 वीं बरसी पर पटना में मार्च निकाला था. मार्च में सीपीआइ, सीपीआइएम, भाकपा–माले, एसयूसीआइसी, अखिल हिंद फारवर्ड ब्लाक और आरएसपी के नेता–कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया.उन्होंने कहा कि संघ व भाजपा परिवार द्वारा देश के संविधान, लोकतंत्र व धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर लगातार हमला जारी है. हमें इसका जोरदार प्रतिरोध करना होगा. 1992 में बाबरी मसजिद की शहादत कोई अलग–थलग घटना नहीं थी. इसकी शुरुआत बिहार के भागलपुर से हुई, तो सूरत व बंबई दंगों के साथ उसकी समाप्ति हुई थी. आज वह खतरा कहीं अधिक बढ़ गया है, क्योंकि वे ताकतें आज देश की सत्ता में हैं. इसलिए हम सबको मिलकर एक बड़ा आंदेालन करना होगा. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार भी जनादेश का सम्मान नहीं कर रही है. उसके रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है. वह जनता व प्रतिरोध की कोई भी आवाज सुनने को तैयार नहीं है. पटना में बाबरी मसजिद की शहादत पर भी मार्च करने की अनुमति नहीं मिल रही, यह सरासर लोकतांत्रिक अधिकारों को हनन है.माकपा नेता सर्वोदय शर्मा ने कहा कि भाजपा व संघ परिवार एक बार फिर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और विभाजन की राजनीति कर रहा है. बिहार चुनाव ने उसे अच्छा सबक दिया है, लेकिन उसमें कोई बदलाव नहीं आया है. एसयूसीआइसी के अरूण कुमार सिंह और फारवर्ड ब्लाक के टी एन आाजाद ने भी सभा को संबोधित किया. सभा का संचालन धीरेन्द्र झा कर रहे थे.
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