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गोपालगंज : गोल्ड लोन फर्जीवाड़ा मामला, एसबीआई के तीन मुख्य शाखा प्रबंधक निलंबित

Updated at : 20 Jul 2018 6:53 AM (IST)
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गोपालगंज : गोल्ड लोन फर्जीवाड़ा मामला, एसबीआई के तीन मुख्य शाखा प्रबंधक निलंबित

गोपालगंज : भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एडीबी शाखा में 2.54 करोड़ रुपये के कृषि गोल्ड लोन फर्जीवाड़े में तीन मुख्य शाखा प्रबंधकों को निलंबित कर दिया गया है. वहीं बैंक के क्षेत्रीय पदाधिकारी समेत कुल आठ कर्मियों पर कार्रवाई हुई है. इसकी जद में आने वाली स्टेट बैंक एडीबी शाखा के मुख्य प्रबंधक […]

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गोपालगंज : भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एडीबी शाखा में 2.54 करोड़ रुपये के कृषि गोल्ड लोन फर्जीवाड़े में तीन मुख्य शाखा प्रबंधकों को निलंबित कर दिया गया है. वहीं बैंक के क्षेत्रीय पदाधिकारी समेत कुल आठ कर्मियों पर कार्रवाई हुई है.

इसकी जद में आने वाली स्टेट बैंक एडीबी शाखा के मुख्य प्रबंधक रहे राघव पांडेय इन दिनों खगड़िया जिले में बैंक के कोऑडिनेटर के पद पर कार्यरत थे. इनके अलावे मुख्य शाखा प्रबंधक रहे रंजन कुमार तथा शैलेंद्र कुमार को निलंबित किया गया है. फील्ड ऑफिसर सुरेंद्र कुमार सिंह समेत अन्य आठ लोगों पर भी कार्रवाई हुई है.

शाखा प्रबंधक रहे रंजन कुमार इन दिनों कोलकाता जोन में कार्यरत थे, जबकि फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद मुख्य प्रबंधक रहे शैलेंद्र कुमार को बैंक ने मुख्य शाखा में तबादला कर दिया था. कृषि गोल्ड लोन के फर्जीवाड़े में बैंक के स्तर पर जांच- पड़ताल के बाद यह कार्रवाई की गयी है. जबकि, इस मामले में कोर्ट को भी बैंक के सीजीएम संदीप तिवारी ने अपनी रिपोर्ट देते हुए दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही थी.

कैसे हुआ नकली सोने का फर्जीवाड़ा

स्टेट बैंक की एडीबी शाखा में वर्ष 2015 में मुख्य शाखा प्रबंधक के पद पर राघव पांडेय तैनात थे.बैंक के नियमानुसार मांझा थाना क्षेत्र के भड़कुईया के रहनेवाले तथा मेन रोड स्थित मूरली मार्केट में गहना लोक के संचालक सतीश प्रसाद को गोल्ड के मूल्यांकन के लिए चयन किया गया. बैंक की जांच में ऋणियों ने स्वीकार किया है कि बैंक को सोना जमा कराने के लिए सतीश प्रसाद ने ही अपने पास से दिया था एवं उसने ही मूल्यांकन कर सोना को शुद्ध होने का प्रमाणपत्र देकर लोन दिला दिया.

नकली सोना जमा कर 2.54 करोड़ के कृषि गोल्ड लोन वर्ष 2015 से मार्च 2018 के बीच लिया गया. इस मामले में बैंक के मुख्य शाखा प्रबंधक शैलेंद्र कुमार ने दो जून को नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए 77 ऋणियों सहित सतीश प्रसाद को नामजद किया. स्टेट बैंक के अधिकारियों की टीम ने ऋणियों से संपर्क कर अब तक 66 लाख की रिकवरी की है. कांड का मास्टरमाइंड फरार है. गुरुवार को रिजनल मैनेजर संजय कुमार ने बैंक पहुंचकर इस पूरे मामले की समीक्षा की.

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