बैंकों के करेंसी चेस्ट हुए कैश ‘लेस’

Published at :13 Apr 2018 5:46 AM (IST)
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बैंकों के करेंसी चेस्ट हुए कैश ‘लेस’

नोटबंदी से भी भयावह होते जा रहे हैं बैंकों के हालात पिछले 80 दिनों से स्थिति अब तक सामान्य नहीं हुई गोपालगंज : नकद की किल्लत से जूझते बैंक कंगाल हो चुके हैं. पिछले 80 दिनों से स्थिति अभी तक सामान्य नहीं हुई है. बैंकों के ज्यादातर करेंसी चेस्ट कैशलेस हैं, तो शहर की कई […]

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नोटबंदी से भी भयावह होते जा रहे हैं बैंकों के हालात

पिछले 80 दिनों से स्थिति अब तक सामान्य नहीं हुई
गोपालगंज : नकद की किल्लत से जूझते बैंक कंगाल हो चुके हैं. पिछले 80 दिनों से स्थिति अभी तक सामान्य नहीं हुई है. बैंकों के ज्यादातर करेंसी चेस्ट कैशलेस हैं, तो शहर की कई एटीएम खाली हैं या खराब. कुछ पैसे की कमी व कुछ तकनीकी गड़बड़ी के चलते बंद पड़ी हैं. बैंक अधिकारियों का कहना है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जायेगी, क्योंकि गत सप्ताह नयी करेंसी की खेप आयी थी, अभी और आनेवाली है. किसान कैश के लिए भटकते फिर रहे हैं. यह समस्या तब है जब गेहूं की कटाई जोर-शोर से चल रही है. भारतीय स्टेट बैंक के अधिकतर शाखाओं में तकरीबन दो माह से कैश की किल्लत बनी हुई है.
रोजाना किसान और व्यापारी बैंक में रुपये निकालने आ रहे हैं लेकिन उन्हें निराश लौट जाना पड़ रहा है. बैंक के अधिकारी न तो कुछ बताने को तैयार हैं और न ही जिम्मेदारी लेते हैं. एक बैंक कर्मी ने बताया कि ब्रांचों में मार्च से अप्रैल तक कोई धनराशि भेजी ही नहीं गयी. लोकल बाजार से जमा होने वाली राशि से ही कुछ जरूरतमंदों को ही रुपये मिल पा रहे हैं. आरबीआई से रुपये आने पर ही समस्या का समाधान हो पायेगा.
जितनी जरूरत, उतनी आमद नहीं : जिले में प्रमुख बैंकर्स द्वारा आरबीआई से रोज लगभग 60 करोड़ रुपये की मांग है, लेकिन मुश्किल से पूरे मार्च में 235 करोड़ ही मिल पा रहे हैं. शाखाओं में प्रतिदिन खाताधारकों द्वारा करीब 10 करोड़ रुपये जमा होते हैं. इसी 45 करोड़ से किसी तरह काम चलाया जा रहा है. जरूरत के मुताबिक कैश नहीं आ पा रहा. इससे 154 बैंक शाखाओं के उपभोक्ताओं को धन देना मुश्किल हो रहा है. प्रमुख बैंकों के चेस्ट में धन की कमी के कारण एटीएम भी साथ नहीं दे रही हैं.
बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र ‘बेजान’ : कैश की किल्लत से जिले के अधिकतर बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र बेजान हो चुके हैं. वो अपने ग्राहकों को कैश नहीं दे पा रहे हैं. एक तो जमा करने वालों की संख्या घट रही है. वहीं दूसरी ओर बैंक भी इन्हें राशि नहीं दे पा रहे हैं. जिले की कई सेवा केंद्र अघोषित रूप से बंद हो चुके हैं. ग्रामीण क्षेत्रों का सबसे बुरा हाल है. यहां कैश को लेकर त्राहिमाम की स्थिति है. इधर, ग्रामीणों को जब कैश नहीं मिल रहा, तो वो ग्राहक सेवा केंद्र कर्मी से उलझ रहे हैं. मारपीट तक की नौबत आ रही है.
अगले सप्ताह आयेगी राशि
भारतीय स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक संजीव कुमार सिंह के अनुसार शहर में धन की निकासी का दबाव कुछ ज्यादा है. उम्मीद है कि सप्ताह में करेंसी की एक खेप आ जायेगी. एटीएम खाली होने की शिकायत के कुछ ही घंटों में कैश रिफिल कर दिया जाता है. तकनीकी गड़बड़ी की सूचना पर त्वरित कार्रवाई होती है. कुछ लोग ठीक से एटीएम ऑपरेट नहीं कर पाते, इससे भी दिक्कत होती है. उधर, एलडीएम राजन कुमार का कहना है कि अब नकद का संकट नहीं है. रिजर्व बैंक को डिमांड भेजा गया है, उम्मीद है कि 18 अप्रैल तक करेंसी की खेप आ जायेगी.
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