तिलक डूमर गांव में नहीं जले चूल्हे, सदमे में लोग

भोरे : रविवार की शाम भोरे थाने के तिलक डूमर गांव में जो घटना हुई, सभी को स्तब्ध कर दिया. हर किसी के मुंह से एक ही बात निकल रही है कि एक मां अपने ही बच्चों के साथ ऐसा कैसे कर सकती है. घटना के बाद से ही तिलक डूमर गांव में चूल्हे नहीं […]
भोरे : रविवार की शाम भोरे थाने के तिलक डूमर गांव में जो घटना हुई, सभी को स्तब्ध कर दिया. हर किसी के मुंह से एक ही बात निकल रही है कि एक मां अपने ही बच्चों के साथ ऐसा कैसे कर सकती है. घटना के बाद से ही तिलक डूमर गांव में चूल्हे नहीं जले हैं. महिलाओं के चीत्कार से पूरे गांव का माहौल गमगीन है. शारदानंद भगत के दरवाजे पर परिवार को ढाढ़स बंधाने वालों का तांता लगा हुआ है. सभी उन्हीं बच्चों की चर्चा कर रहे हैं, जो अपनी धमा-चौकड़ी से पूरे गांव के लाडले बने हुए थे.
लेकिन, उन बच्चों की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि मां ने कर दी. बच्चों की मौत के बाद बिलख रही उसकी दादी तेतरी देवी और उसकी बड़ी मां कुसुमावती देवी बताती हैं कि बड़े अरमानों से बच्चों को पाला था. लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था. आज उनकी ही आंखों के सामने वे बच्चे दफना दिये जायेंगे. तीनों ने अलग-अलग समय में अपनी मां की कोख से जन्म लिया था, लेकिन मौत एक ही दिन हो गयी. घटना को लेकर पूरे गांव की महिलाएं रो रही हैं.
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