गया जी : GCC देशों में भारतीय प्रवासी मजदूरों के वेतन चोरी पर CUSB का अध्ययन, सामने आई कई चुनौतियां
डॉ फिरदौस फातिमा रिजवी व विक्रम | Prabhat Khabar Network
CUSB Migrant Workers Wage Theft Study : सीयूएसबी के एक नए अध्ययन ने जीसीसी देशों में भारतीय प्रवासी श्रमिकों के साथ होने वाली वेतन चोरी और भारत लौटने के बाद बकाया राशि की वसूली में आने वाली मुश्किलों पर प्रकाश डाला है. यह शोध प्रवासी श्रमिकों के शोषण के गंभीर मुद्दों को उजागर करता है.
सीयूएसबी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक महत्वपूर्ण अध्ययन ने अंतरराष्ट्रीय श्रम प्रवासन के अपेक्षाकृत उपेक्षित पहलू वस्तुतः वेतन चोरी और प्रवासी श्रमिकों के भारत लौटने के बाद बकाया वेतन की वसूली के संघर्ष की ओर ध्यान आकर्षित किया है.
यह अध्ययन सीयूएसबी की आर्थिक अध्ययन एवं नीति विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. फिरदौस फातिमा रिजवी तथा उनके शोधार्थी विक्रम (विकास अध्ययन) द्वारा किया गया है.
‘वेज थेफ्ट एंड पोस्ट-रिटर्न ड्यू रिकवरी अमंग इंडियन माइग्रेंट्स फ्रॉम जीसीसी रीजन’ शीर्षक पर शोध आलेख भारत की सार्वजनिक-नीति संबंधी विमर्श की सबसे प्रतिष्ठित अकादमिक पत्रिकाओं में से एक 'इकनोमिक एंड पॉलिटिकल वीकली' के हालिया अंक में विशेष आलेख के रूप में प्रकाशित हुआ है.
यह पत्रिका विद्वतापूर्ण शोध को अर्थव्यवस्था, समाज, विकास और सार्वजनिक नीति से जुड़े व्यापक विमर्श के साथ जोड़ती है. कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण और अत्यंत आवश्यक विषय पर अध्ययन के लिए डॉ. रिजवी और उनकी शोधार्थी टीम के सदस्य विक्रम को बधाई दी है.
सीवान जिले में लौटे 385 प्रवासी श्रमिकों से प्राप्त क्षेत्र-आधारित साक्ष्य
विस्तृत जानकारी देते हुए डॉ. रिजवी ने बताया कि बिहार लंबे समय से भारत के प्रमुख श्रम-प्रेषक राज्यों में से एक रहा है. रोजगार के सीमित अवसर, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण का अपेक्षाकृत निम्न स्तर तथा लगातार बनी हुई विकास संबंधी चुनौतियों ने ऐतिहासिक रूप से राज्य से बड़े पैमाने पर श्रम प्रवासन में योगदान दिया है, विशेष रूप से जीसीसी देशों की ओर.
इस अध्ययन में राज्य के अंतरराष्ट्रीय श्रम प्रवासन के प्रमुख केंद्रों में से एक, सीवान जिले में लौटे 385 प्रवासी श्रमिकों से प्राप्त क्षेत्र-आधारित साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं. अनेक प्रवासियों के लिए श्रम शोषण के परिणाम भारत में अपने गांवों और परिवारों में लौटने के काफी समय बाद तक बने रहते हैं.
जीसीसी देशों में रोजगार के दौरान वेतन चोरी की व्यापकता
अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष जीसीसी देशों में रोजगार के दौरान वेतन चोरी की व्यापकता से संबंधित है. प्रवासी श्रमिकों ने नियोक्ताओं द्वारा अनुचित व्यवहार की भी जानकारी दी.
“वेतन चोरी” शब्द कर्मचारियों को देय वेतन और लाभों से अवैध रूप से वंचित किए जाने को दर्शाता है. इस प्रकार के उल्लंघन कई रूपों में हो सकते हैं, जिनमें वेतन का भुगतान न करना, वेतन रोकना, गैर-कानूनी कटौती करना और रोजगार संबंधी लाभों से वंचित करना शामिल हैं.
अध्ययन के महत्वपूर्ण नीतिगत निहितार्थ
इस निष्कर्ष के महत्वपूर्ण नीतिगत निहितार्थ हैं. जैसा कि लेखक तर्क देते हैं, शिक्षा जागरूकता बढ़ा सकती है, लेकिन केवल जागरूकता संरचनात्मक असमानताओं को दूर नहीं कर सकती, विशेषकर तब जब नियोक्ता वेतन और रोजगार की शर्तों को नियंत्रित करता हो और वापसी के बाद श्रमिक गंतव्य देश की संस्थागत व्यवस्था से अलग हो जाता है.
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मजबूत निगरानी और सीमा-पार सहयोग की आवश्यकता
लेखकों ने गंतव्य देशों में नियोक्ताओं और वेतन भुगतान की अधिक सशक्त निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया है. उन्होंने अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक वेतन-भुगतान प्रणाली, नियोक्ता की जवाबदेही पर आधारित ढांचा, निवारक प्रवर्तन, संस्थागत उत्तरदायित्व और सीमा-पार सहयोग जैसे उपायों की ओर संकेत किया है.
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