'दुनिया भारत की ओर उम्मीद से देख रही है', सीयूएसबी में पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने गिनाईं वैश्विक चुनौतियां

भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत को मेमेंटो भेंट कर सम्मानित करते सीयूएसबी के कुलपति
सीयूएसबी में पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के दौर में भारत की विदेश नीति और शांति स्थापना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Gaya Ji News : बोधगया स्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में "वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भारतीय विदेश नीति कैसे चुनौतियों का सामना कर रही है?" विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया. कार्यक्रम का आयोजन राजनीति अध्ययन विभाग ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के एक्सटर्नल पब्लिसिटी डिवीजन (एक्सपीडी) के सहयोग से किया.
वैश्विक संस्थाओं की भूमिका पर पूर्व राजदूत ने रखे विचार
भारतीय विदेश सेवा (सेवानिवृत्त) के वरिष्ठ राजनयिक एवं विभिन्न देशों में भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि वर्तमान समय में वैश्विक शासन व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध, आर्थिक प्रतिबंध, टैरिफ और वैश्विक तनावों का असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में भारत की संतुलित और विवेकपूर्ण विदेश नीति की भूमिका महत्वपूर्ण है.
भारत की विदेश नीति और वैश्विक जिम्मेदारियों पर जोर
अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का संस्थापक सदस्य रहा है और हमेशा बहुपक्षवाद का समर्थक रहा है. उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा स्वदेशी वैक्सीन विकसित करने और अनेक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने का उल्लेख करते हुए इसे वैश्विक मानवता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया.
पड़ोसी देशों से जुड़ी चुनौतियों का किया उल्लेख
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत के सामने पाकिस्तान, बांग्लादेश और विशेष रूप से चीन से जुड़ी कई सामरिक और कूटनीतिक चुनौतियां हैं. इसके बावजूद भारत सरकार राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि किसी भी देश की विदेश नीति का मूल उद्देश्य उसके राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना होता है.
कुलपति ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना पर दिया बल
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की समझ प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक है. उन्होंने कहा कि भारत की मूल भावना "वसुधैव कुटुम्बकम्" पर आधारित है और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य सरकार तथा नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही प्राप्त किया जा सकता है.
विद्यार्थियों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञ ने दिए जवाब
जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के सम्मान के साथ हुई. राजनीति अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि सामाजिक विज्ञान एवं नीति अध्ययन संकाय के अधिष्ठाता प्रो. प्रणव कुमार ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की. व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों और शिक्षकों ने पूर्व राजदूत से समसामयिक विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनके उन्होंने विस्तार से उत्तर दिए. कार्यक्रम का संचालन प्राची सिंह दीक्षित और श्रुति राज ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अभय कुमार ने किया.
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