स्टैंडिंग कमेटी की बैठकों से बाहर नहीं निकल पाया है कचरा प्रबंधन का काम
Author Prabhat khabar digital desk
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गया : पांच लाख से अधिक की आबादीवाले नगर निगम क्षेत्र में हर दिन लगभग 20 टन कचरा निकलता है. इसमें सिर्फ पॉलीथिन की मात्रा लगभग चार टन होती है. अब तक निगम की ओर से कचरा प्रबंधन का काम प्रभावी तौर पर शुरू नहीं किया जा सका है. सरकार ने स्थानीय स्तर पर कचरा […]
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गया : पांच लाख से अधिक की आबादीवाले नगर निगम क्षेत्र में हर दिन लगभग 20 टन कचरा निकलता है. इसमें सिर्फ पॉलीथिन की मात्रा लगभग चार टन होती है. अब तक निगम की ओर से कचरा प्रबंधन का काम प्रभावी तौर पर शुरू नहीं किया जा सका है. सरकार ने स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन का काम करने की स्वीकृति दे रखी है. निगम में संसाधन व कर्मचारियों की संख्या भी अच्छी-खासी है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत निगम को पैसा भी सरकार की ओर से दिया जा रहा है.
अब तक यहां इस संबंध में सिर्फ प्लानिंग ही की जा सकी है. हर बार बोर्ड की बैठक इसे प्रभावी तौर पर लागू करने की बात उठती है. पिछली बार स्टैंडिंग की बैठक में वार्ड स्तर पर कचरा प्रबंधन करने की बात उठायी गयी थी. इसमें प्रस्ताव पारित किया गया है कि वार्डों में कचरा प्रबंधन का काम शुरू किया जाये. इसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को कचरा की छटनी में निगरानी के लिए रखा जायेगा, लेकिन अब तक लोग योजना शुरू होने का इंतजार ही कर रहे हैं.
पॉलीथिन व अन्य कचरे से होगी आमदनी : खाद बनाने योग्य कचरे से जैविक खाद व कचरे में निकलनेवाले पॉलीथिन व अन्य रिसाइक्लिंग योग्य वेस्टेज से निगम में आमदनी की बात हुई थी. इसके लिए बेंगलुरु की एक संस्था की देखरेख में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ट्रेनिंग दी गयी थी. पितृपक्ष के मौके पर इस योजना के तहत जैविक खाद बनाने का काम भी शुरू किया गया. इसके साथ ही कुछ वार्डों के कचरे से जैविक खाद बनाने के लिए निगम की विकास शाखा में शेड बनाये गये हैं. लेकिन, अब तक कचरे से पॉलीथिन निकाल कर शेड के बगल में ही रख दिया जा रहा है. सभी वार्डों में स्थानीय स्तर पर ठोस अवशिष्ट प्रबंधन का काम शुरू किये बिना शहर को स्वच्छ नहीं रखा जा सकता है.
अब तक नैली में होती है कचरे की डंपिंग : शहर से निकलनेवाले कचरे को नैली डंपिंग जोन में पहुंचा दिया जाता है. कचरे में पॉलीथिन की मात्रा अधिक होने के कारण गर्मी के दिनों में यहां आग लग जाती है और आसपास के इलाकों में लोगों का रहना मुश्किल हो जाता है. बरसात में कचरे की सड़ांध महक से लोग परेशान रहते हैं. कई बार लोगों ने यहां कचरा फेंकने का विरोध भी किया है. इतना ही नहीं, निगम के कर्मचारी कचरे को बाइपास, कंडी नवादा पुल, कटारी आदि जगहों पर सड़क किनारे भी कचरा फेंक देते हैं.
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