आजाद भारत में गया के पहले जिलाधीश थे जगदीश चंद्र माथुर

गया: आजाद पार्क स्थित हिंदी साहित्य सम्मेलन में आजाद भारत में गया के पहले जिला पदाधिकारी जगदीश चंद्र माथुर की जन्मशती समाराेह मनायी गयी. इसकी अध्यक्षता सम्मेलन के सभापति गाेवर्द्धन प्रसाद सदय ने की. उन्हाेंने बताया कि सम्मेलन भवन के लिए जमीन जगदीश चंद्र माथुर के प्रयास से ही मिली थी. साहित्य में उनकी गहरी […]
उनके संस्मरण भी काफी लाेकप्रिय हुए. उनके नाटकाें के संबंध में अरुण हरलीवाल ने कहा कि नाटककार जगदीश चंद्र माथुर ने भारतीय नाट्य परंपरा का आधुनिकता बाेध के साथ विकास किया. ऐसे व्यक्तित्व के जयंती के अवसर पर रामावतार सिंह, वासुदेव प्रसाद, मुंद्रिका सिंह, डॉ ब्रजराज मिश्र, सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र, चंद्रदेव प्रसाद केसरी, डॉ निरंजन श्रीवास्तव, नीतू गुप्ता ने विस्तार से चर्चा की. श्यामदत्त मिश्र, प्रियदर्शन सिंह, डॉ राकेश कुमार सिन्हा ने उन्हें अपनी काव्यांजलि दी. इस अवसर पर उदय सिंह, विनाेद कुमार, गाैतम कुमार, संजीत कुमार माैजूद थे. माथुर जी की जन्मशती के अवसर पर सम्मेलन की आेर से यह सर्वसम्मत प्रस्ताव रखा गया कि शहर के किसी भी चाैराहे पर उनकी प्रतिमा लगायी जाये. जन्म शताब्दी समाराेह का संचालन कार्यकारी मंत्री सुमंत ने किया. गौरतलब है कि माथुर जी 15 अगस्त 1947 से नाै अप्रैल 1949 तक गया के 89वें जिला पदाधिकारी थे.
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