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दीपावली को लेकर गुलजार हुआ मिट्टी के दीये का बाजार, खरीदार दे रहे लोकल फॉर वोकल को प्राथमिकता

Updated at : 19 Oct 2022 11:21 AM (IST)
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दीपावली को लेकर गुलजार हुआ मिट्टी के दीये का बाजार, खरीदार दे रहे लोकल फॉर वोकल को प्राथमिकता

Diwali 2022: कारीगर मिट्टी से बनने वाले दीप और खिलौनों समेत अन्य उपकरणों को नये-नये डिजाइन में रूप दे रहे हैं. कारीगर द्वारा तैयार कच्चे बर्तनों पर रंग से बारीक कलाकृति उकेरा जा रहा है.

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पटना. इस दीपावली पर लोकल फार वोकल को तरजीह देने की कवायद आम लोगों ने शुरू कर दी है. इस कड़ी में कुम्हार एक तरफ उत्साहित हैं. उनके द्वरा उत्पाद किये गये दिये को काफी पसंद किया जा रहा है. दूसरी तरफ बाजार में दुकानदार भी मिट्टी के दीये को बढ़ावा दे रहे हैं. दीपावली में अब कुछ ही दिन शेष रह गये हैं. इसकी तैयारी पिछले एक सप्ताह से ही शुरू है. बाजार में चहल-पहल बढ़ गयी है. मिट्टी के दीये, लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति तथा तमाम तरह के खिलौने बनाने वाले कुंभकारों में खासा उत्साह है. इन्हों भारी मात्रा में ऑर्डर भी मिल रहा है. एक ओर मूर्तिकार व उनके परिवार के सदस्य मूर्ति और दीये बना रहे हैं तो दूसरी ओर उनसे बाजारों के दुकानदार बड़े पैमाने पर दीये खरीद रहे हैं.

चाइनीज को दे रहे हैं टक्कर

कारीगर मिट्टी से बनने वाले दीप और खिलौनों समेत अन्य उपकरणों को नये-नये डिजाइन में रूप दे रहे हैं. कारीगर द्वारा तैयार कच्चे बर्तनों पर रंग से बारीक कलाकृति उकेरा जा रहा है. चाइनीस सामानों को हम जबरदस्त टक्कर दे रहे हैं. परंपरागत दीयों के साथ-साथ फूलदानी, सुराही, बच्चों के खिलौना कलात्मक ढंग से तैयार किए जा रहे हैं. छपरा के श्यामचक निवासी रविंद्र पंडित, अशोक पंडित, दीपक पंडित आदि ने बताया कि उसके पूर्वज पहले सभी तरह के बर्तन बनाने का काम किया करते थे. किंतु अब त्योहारों को छोड़ अब मिट्टी के बर्तनों की मांग नहीं रही. लिहाजा इस व्यवसाय से लोगों का जुड़ाव कम हो रहा है. इसमें सबसे बड़ा बाधक महंगाई और गरीबी है.

महंगाई और गरीबी इस व्यवसाय में बन रही है बाधक

उन्होंने बताया कि हमारे तरह न जाने और भी कितने प्रजापति हैं, जिन्हें मिट्टी के कारीगरी का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाता. इस काम में परिवार के लोगों का भी सहयोग रहता है. कुम्हार संदीप कुमार का कहना है कि दिवाली पर्व पर वह 5000 दीये बनाकर बेच देते हैं. इस बार दीये बेचने की संख्या दोगुनी हो गयी है. बाजारों से मांग भी बड़े पैमाने पर आ रही है. इसे देखते हुए दिन व रात वह दीये बनाने में लगे हैं. उम्मीद है कि इस बार 15000 दीये वह बेच देंगे. दुकानदार सुदेश पंडित ने बताया कि इस बार दिवाली पर मिट्टी के दीयों की खरीदारी करने में लोग रुचि दिखा रहे हैं.

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