पटना में डरा रहा डेंगू, लगातार तीसरे दिन पटना में मिले 100 से अधिक डेंगू के नये मरीज...

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार डेंगू से पीड़ित 283 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती है. इनमें सर्वाधिक 132 मरीज जेएलएनएमसीएच,भागलपुर में भर्ती हैं.
पटना में डेंगू अब डराने लगा है. गुरुवार को लगातार तीसरे दिन डेंगू के 109 नये मरीज मिले. इसके साथ ही जिले में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़कर 1080 हो गयी है. यह लगातार तीसरा दिन है, जबकि जिले में 100 से अधिक नये डेंगू मरीज मिले हैं. बुधवार को 105 और मंगलवार को 121 नये डेंगू मरीज मिले थे. गुरुवार को सबसे अधिक पाटलिपुत्र अंचल में 42, नूतन राजधानी में 12, अजीमाबाद में चार और फुलवारीशरीफ में पांच के अलावा बाढ़, मोकामा, बिहटा, बख्तियारपुर, पालीगंज आदि इलाकों से डेंगू से एक-दो मरीज मिले.
राज्य में पिछले 24 घंटों के दौरान 363 नये डेंगू के मरीज पाये गये हैं. पटना जिले में सर्वाधिक 109 मरीजों के अलावा भागलपुर में 47, वैशाली में 25, औरंगाबाद में 23 और सारण में पांच नये डेंगू मरीज पाये गये. नये मरीजों के मिलने के बाद राज्य में इस वर्ष डेंगू मरीजों की संख्या 3462 हो गयी है. इनमें सिर्फ सितंबर में 3187 डेंगू मरीज शामिल हैं. स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार डेंगू से पीड़ित 283 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती है. इनमें सर्वाधिक 132 मरीज जेएलएनएमसीएच,भागलपुर में भर्ती हैं. इसके अलावा एनएमसीएच,गया में 26, विम्स, पावापुरी में 25, एम्स, पटना में 18, आइजीआइएमएस व पीएमसीएच में 16-16, एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर में 14, एनएमसीएच व जीएमसी,पूर्णिया में 10-10, डीएमसीएच,दरभंगा में आठ और जीएमसी,बेतिया व जेएनकेटीएमसीएच,मधेपुरा में चार-चार भर्ती हैं.
बिहार के मुजफ्फरपुर में डेंगू मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. गुरुवार को एसकेएमसीएच में हुई एलीजा जांच में छह मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है. सभी मरीजों का इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है. इस तरह जिले में डेंगू मरीजों की संख्या अब 71 हो गयी है. इनमें तीन चिकनगुनिया के मरीज हैं, इनमें दो डेंगू से भी पीड़ित हैं. बुधवार को डेंगू से एक मरीज की मौत के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है. राज्य स्वास्थ्य समिति से रोज स्वास्थ्य पदाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर डेंगू की रोकथाम और इलाज के उपायों की जानकारी ली जा रही है. पीएचसी प्रभारियों को भी अपने क्षेत्र में मच्छरों का लार्वा मारने वाली दवा टेमीफोस का छिड़काव कराने का निर्देश दिया गया है.
ग्रामीण क्षेत्रों में आशा घर-घर जाकर लोगों को डेंगू से बचाव के लिए जागरूक कर रही है. साथ ही तेज बुखार और बदन में दर्द होने पर नजदीकी प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में जाने की सलाह दी जा रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार कम करने की दवा पारासिटामोल का वितरण भी किया जा रहा है. जिन इलाकों में डेंगू से पीड़ित मरीज मिल रहे हैं, वहां दवा छिड़काव पर विशेष नजर रखी जा रही है. शहर के कई इलाकों में भी दवा का छिड़काव किया जा रहा है.
जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने कहा कि घर के बाहर या घर के अहाते या छत पर पानी जमा नहीं होने दें. यदि कहीं पानी जमा है तो उस पर मोबिल या केरोसिन डाल दे. इससे पानी के ऊपर एक लेयर बन जायेगा. उस जगह पर डेंगू के मच्छर का लार्वा होगा भी तो लेयर जम जाने के कारण उसे ऑक्सीजन नहीं मिलेगा और वह मर जायेगा. डेंगू के मच्छर का लार्वा पानी सूख जाने के बाद भी एक्टिव रहता है और जैसे ही पानी मिलता है, मच्छर का जन्म होता है. इससे बचाव के लिए हमें कूलर, फ्रिज और एसी का पानी भी दो-तीन दिन के अंतराल में साफ करते रहना चाहिए.
डेंगू के मच्छरों का लार्वा मारने के लिए गुरुवार को सदर अस्पताल परिसर स्थित नालों और जलजमाव वाली जगहों पर दवा का छिड़काव किया गया. फाइलेरिया कर्मियों ने अस्पताल के पूरे परिसर सहित बाहर भी दवा का छिड़काव किया. रोस्टर के हिसाब से प्रत्येक वार्ड में दवा का छिड़काव किया जा रहा है.
बारिश के बाद से डेंगू फैल रहा है. हमलोग लगातार इसकी मॉनीटरिंग कर रहे हैं. सदर अस्पताल सहित पीएचसी में भी मरीजों के इलाज की व्यवस्था की गयी है. सभी जगह दवाएं उपलब्ध हैं. किसी भी मरीज को डेंगू जैसे लक्षण दिखते हों तो वे तत्काल किसी भी सरकारी अस्पताल में जाकर डॉक्टर को दिखाये.
– डॉ उमेश चंद्र शर्मा, सिविल सर्जन
मुजफ्फरपुर जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉक्टर सुरेश राम ने बताया कि डेंगू वायरस मच्छरों से फैलता है. मुख्यत: ऐडीस इजिप्ती से, ऐ मच्छर सुबह में और शाम व देर रात में काटते हैं. एक बार में काटने से ही इंफेक्शन हो सकता है. मच्छर के काटने के 7 दिन बाद डेंगू के लक्षण नजर आते हैं. ब्लड प्लेटलेट्स का स्तर कम हो जाता है. रक्तस्राव की समस्या हो सकती है. कहा कि एलिजा जांच से बीमारी की गंभीरता का पता चलता है. इसमें आपके रक्त की जांच होती है. जिससे प्लेटलेट्स काउंट और ऐसे ही कई मापदंड का पता चलता है. जांच के मुताबिक और डॉक्टर के सुझाव के अनुसार डेंगू का उपचार घर पर या अस्पताल में हो सकता है. कहा कि ज्यादातर लोग घर पर ही सही आराम अधिक से अधिक जल सेवन से और डॉक्टर द्वारा बताई गई दबाव से ही ठीक हो जाते हैं. यह अवधि सामान्य तौर पर 10 दिन की होती है.
डॉक्टर ने बताया कि घर या ऑफिस के आसपास पानी जमा न होने दें. गड्ढों को मिट्टी से भर दें. रुकी हुई नालियों को साफ करें. अगर पानी जमा होने से रोकना मुमकिन नहीं है. तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन तेल डाल दें. रूम कलरों, फुलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार बदल दें.पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें. उन्हें सुखाएं और फिर भरें.डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं,इसलिए पानी की टंकी अच्छी तरह बंद कर के रखें. अगर मुमकिन हो तो खिड़कियां व दरवाजे पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोकें.कहा कि ऐसे कपड़े पहने जो शरीर का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा ढका रहें.खासकर बच्चों के लिए यह सावधानी बहुत ही जरूरी है.रात में सोते समय मच्छरदानी जरुर लगाने के लिए अपील किया गया है.
डॉक्टर ने कहा कि डेंगू में 102 से 103 डिग्री बुखार आना आम बात है. डेंगू में ज्यादातर जोड़ों, मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द होता है. डेंगू में घबराहट महसूस होती है. डेंगू में छोटे लाल चकत्ते व कभी कभी खुजली भी होती है. डेंगू से पीड़ित लोग ज्यादातर आंख के पीछे दर्द होने की शिकायत करते हैं. साथ ही डेंगू के कारण शरीर में थकावट महसूस होती है.
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By RajeshKumar Ojha
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