Darbhanga : गैर कार्यकालिक डीन की अनुशंसा से एजुकेशन विषय के दर्जनों शोधार्थियों का पीएचडी अवार्ड

Edited by SATISH KUMAR
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लनामिवि में करीब चार माह से गैर कार्यकालिक डीन की अनुशंसा से एजुकेशन विषय के दर्जनों शोधार्थियों का पीएचडी अवार्ड हो रहा है.

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पीएचडी की मौखिकी एवं डिग्री की वैधता को लेकर विवि में चर्चा गर्म

एजुकेशन डीन के दो वर्ष का कार्यकाल 28 फरवरी को हाे चुका है समाप्त दरभंगा. लनामिवि में करीब चार माह से गैर कार्यकालिक डीन की अनुशंसा से एजुकेशन विषय के दर्जनों शोधार्थियों का पीएचडी अवार्ड हो रहा है. गैर कार्यकालिक डीन की अनुशंसा से पीएचडी की मौखिकी का आयोजन एवं अवार्ड की जा रही डिग्री की वैधता होगी या नहीं, इसे लेकर विवि में चर्चा गर्म है. एजुकेशन डीन का दो वर्ष का कार्यकाल 28 फरवरी को समाप्त हो चुका है. विवि ने अभी तक एजुकेशन विषय में नये डीन को नियुक्त नहीं किया है और न ही किसी अन्य संकायाध्यक्ष को इसकी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है. इस बीच गैर कार्यकालिक डीन के हस्ताक्षर से एक मार्च से अभी तक एजुकेशन विषय में करीब चार दर्जन से अधिक पीएचडी शोधार्थियों की मौखिकी ली जा चुकी है तथा उनकी अनुशंसा पर पीएचडी अवार्ड की अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है.

मौखिकी आयोजन एवं रिजल्ट की अधिसूचना जारी करने में संकायाध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका

जानकार बताते हैं कि पीएचडी की मौखिकी के आयोजन एवं इसके रिजल्ट की अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया में संबंधित संकायाध्यक्ष अथवा अधिकृत संकायाध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. पीएचडी की मौखिकी एवं इसके रिजल्ट की अधिसूचना जारी करने के लिये संबंधित संकायाध्यक्ष की ओर से अनुशंसा जब तक नहीं होती है, तब तक कार्य वैधानिक रूप से उचित नहीं माना जाता है. यहां स्थिति यह है कि जिस संकाय के अध्यक्ष का कार्यकाल 28 फरवरी को ही पूरा हो चुका है, उसी डीन की अनुशंसा से दर्जनों पीएचडी शोधार्थियों की मौखिकी भी आयोजित हो रही है तथा पीएचडी अवार्ड किये जाने का नोटिफिकेशन भी जारी हो रहा है. कार्यकाल पूरा कर चुके डीन के पद की वैधता एवं उनकी अनुशंसा से आयोजित हो रही पीएचडी की मौखिकी तथा पीएचडी अवार्ड की जारी अधिसूचना पर जानकार सवाल उठा रहे हैं.

फंस सकता है मामला

जानकारों का कहना है कि गैर कार्यकालिक डीन की अनुशंसा से पीएचडी अवार्ड करने को लेकर जारी हो रही अधिसूचना के खिलाफ अगर कोई न्यायालय चला जाता है, तो मामला फंस सकता है. डिग्री वैधता पर सवाल उठ सकता है. इस प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों से कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है. इस मामले में विवि का पक्ष जानने के लिए अधिकृत पीआरओ डॉ बिंदु चौहान से संपर्क किया गया. उन्होंने बताया कि इस संबंध में पक्ष देने के लिये एक दिन पहले संबंधित अधिकारी से आग्रह किया जा चुका है. वहां से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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