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Darbhanga : वैज्ञानिक शोध को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से संरक्षित करने की जरूरत- कुलपति

Updated at : 25 Jul 2025 7:28 PM (IST)
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Darbhanga : वैज्ञानिक शोध को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से संरक्षित करने की जरूरत- कुलपति

वैज्ञानिक शोध को बौद्धिक संपदा के अधिकारों के माध्यम से संरक्षित करने की जरूरत है.

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सीएम साइंस कॉलेज में बौद्धिक संपदा और रसायन विज्ञान में नवाचार विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

दरभंगा. सीएम साइंस कॉलेज में बौद्धिक संपदा और रसायन विज्ञान में नवाचार विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का उदघाटन करते हुए कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने कहा कि वैज्ञानिक शोध को बौद्धिक संपदा के अधिकारों के माध्यम से संरक्षित करने की जरूरत है. यह वर्तमान समय की आवश्यकता है. कुलपति ने रसायन विज्ञान की भूमिका को ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान से जोड़ते हुए इसके महत्व पर प्रकाश डाला. आयोजन को अभूतपूर्व बताया. कहा कि शोध विश्वविद्यालय का यह महत्वपूर्ण अध्याय है. परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने छात्रों और शोधकर्ताओं को अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में प्रेरित किया. डॉ उमेश कुमार दास ने रसायन शास्त्र सहित विज्ञान के विभिन्न विषयों से जुड़े नवाचारों को समाज और उद्योग से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया. अधयक्षता करते हुए डीन साइंस सह प्रधानाचार्य प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने रसायन विज्ञान में हो रहे वैश्विक शोधों की सराहना करते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में बौद्धिक संपदा से जुड़ी शिक्षा के समावेशन पर बल दिया. इससे पहले डॉ वीडी त्रिपाठी ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि संगोष्ठी बौद्धिक संपदा के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में प्रयास है. उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ निधि झा एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ शाकिर अहमद ने किया.

आज के प्रतिस्पर्धी युग में स्टार्टअप की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

तकनीकी सत्र में चार विशेषज्ञ वक्ताओं का व्याख्यान हुआ. जर्मनी से डॉ अरुण कुमार ने ग्रीन केमिस्ट्री और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पद्धतियों पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया. प्रयोगशाला में किए गए नवाचारों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित करने की बात कही. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. विनोद कुमार तिवारी ने अपने शोध बेंजोट्रियाजोल रिंग क्लीवेज पर व्याख्यान दिया. बताया कि यह पद्धति कैसे पर्यावरण-अनुकूल और उच्च उत्पादकता वाली है, जिसमें औद्योगिक अपशिष्ट पदार्थों का पुनः उपयोग कर जैव-सक्रिय यौगिकों का निर्माण किया जाता है. विश्वविद्यालय ऑफ अल- कादिसियाह, इराक से डॉ हसन शामरान मोहम्मद ने एजो डाइज के प्रयोग द्वारा पीएच और फिंगरप्रिंट डिटेक्शन पर व्याख्यान देते हुए कई महत्वपूर्ण जानकारी दी, जो फोरेंसिक विज्ञान, फोटोक्रोमिक यौगिकों और चिकित्सा अनुसंधान में बेहद उपयोगी है. सीएम कॉलेज के डॉ ललित शर्मा ने भारतीय उद्योग को सशक्त बनाने में पेटेंट और ट्रेडमार्क की भूमिका पर प्रकाश डाला. कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में स्टार्टअप की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. पोस्टर प्रेजेंटेशन सेशन में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों और शोधकर्ताओं ने पोस्टर प्रस्तुत किया. करीब पांच दर्जन से अधिक शोध-पत्रों में रसायन विज्ञान के विविध आयामों को दर्शाया गया. संगोष्ठी में आमंत्रित व्याख्यान और मौखिक प्रस्तुतियां समानांतर सत्रों में हुई. आइआइटी, बीएचयू, सीडीआरआइ एवं लनामिवि सहित देश-विदेश की संस्थाओं के पांच दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया.

अंतिम दिन आज पैनल चर्चा

दूसरे दिन शनिवार को प्लेनरी व्याख्यान, आइपीआर पर कार्यशालाएं और “रासायनिक अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायीकरण : कानूनी और नैतिक आयाम ” विषय पर विशेष पैनल चर्चा होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATISH KUMAR

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By SATISH KUMAR

SATISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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