Darbhanga News: अध्ययन, फील्डवर्क व ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ लें शोधार्थी
Published by : PRABHAT KUMAR Updated At : 02 Aug 2025 10:11 PM
Darbhanga News:पीजी संगीत एवं नाट्य विभाग की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली की समृद्ध परंपरा शृंखला के तहत "शोध के क्षेत्र में युवा चेतना " विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी हुई.
Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी संगीत एवं नाट्य विभाग की ओर से भारतीय ज्ञान प्रणाली की समृद्ध परंपरा शृंखला के तहत “शोध के क्षेत्र में युवा चेतना ” विषय पर ऑनलाइन संगोष्ठी हुई. इसमें 14 शोधार्थियों ने शोध पत्र का वाचन किया. अतिथि वक्ता सह आइबी पीजी कॉलेज, पानीपत की डॉ मोनिका वर्मा ने अध्ययन, फील्डवर्क तथा ऑन लाइन सुविधाओं के बारे में बताते हुये शोधार्थियों को कार्यों को पूरा करने का सुझाव दी. पंजाब विश्वविद्यालय से अवकाश प्राप्त प्रो. पंकज माला शर्मा, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की संकायाध्यक्ष प्रो. संगीता पंडित, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ बाला लखेन्द्र, पटना विश्वविद्यालय के डॉ अरविन्द कुमार आदि ने भी विचार रखा. अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. लावण्य कीर्ति सिंह ””””””””काव्या”””””””” तथा संचालन शोध छात्र नीतीश प्रियदर्शी ने किया.
इन लाेगों ने किया पत्र वाचन
लनामिवि की सुष्मिता कुमारी ने बिहार के आकाशवाणी केंद्रों में रेडियो नाटक : एक विहंगावलोकन, पूजा कुमारी ने विद्यापति पदावली तथा शंकर देव कृत बरगीत :एक तुलनात्मक अध्ययन, एमएलएसएम कॉलेज से संगीत मल्लिक ने हिन्दुस्तानी संगीत में ध्रुवपद की परंपराएं : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन, दिल्ली विश्वविद्यालय की शाम्भवी शुक्ला ने प्राचीन अलप्ति से आधुनिक अलाप : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से कृष्ण कुमार तिवारी ने सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक दृष्टि से भारतीय शास्त्रीय संगीत में पुरुषार्थ चतुष्टय की अवधारणा : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन, निवेदिता श्याम ने द इमोशनल कैरक्ट्रिस्टिक एंड द इफेक्ट्स ऑफ द राग ऑफ नॉर्थ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक : एन एनालिटिकल स्टडी विथ रेस्पेक्ट टू इट्स लिसनर्स, बागीश पाठक ने मध्यकालीन गायन शैलियों की प्रासंगिकता आधुनिक परिप्रेक्ष्य में : एक अध्ययन (उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत के सन्दर्भ में) विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किये. बीआरए बिहार विश्वविद्यालय से सुरभि रानी ने बज्जिका के लोकगीतों का सांगीतिक और साहित्यिक अध्ययन, पटना विश्वविद्यालय से सत्यम साकेत ने 21वीं सदी में वैशाली के सक्रिय संगीतकारों का जीवन एवं कला : एक अध्ययन, आराधना कुमारी ने संस्कार गीतों का साहित्यिक एवं सांगीतिक अध्ययन : सहरसा जिला के विशेष संदर्भ में, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना से रिमझिम सिंह ने विलक्षित बिहार का लोक संगीत विषयक शोध पत्र पढा.
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