Darbhanga News: जीवन में ऊर्जा, प्रेम और सामाजिक सद्भाव की स्थापना करते दीपावली एवं छठ

Updated at : 16 Oct 2025 10:48 PM (IST)
विज्ञापन
Darbhanga News: जीवन में ऊर्जा, प्रेम और सामाजिक सद्भाव की स्थापना करते दीपावली एवं छठ

Darbhanga News:दीप केवल ज्योति का प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान, आत्मबोध और मानवीय संवेदना का प्रतीक है.

विज्ञापन

Darbhanga News: दरभंगा. लनामिवि के पीजी इतिहास विभाग में गुरुवार को “दीपोत्सव से लोक आस्था के महापर्व छठ की लोक जीवन में प्रासंगिकता” विषय पर संगोष्ठी में डॉ संजीत झा सरस ने कहा कि दीपावली अंधकार से प्रकाश व छठ प्रकृति और मनुष्य के मिलन की साधना हैं. दीप केवल ज्योति का प्रतीक नहीं, बल्कि ज्ञान, आत्मबोध और मानवीय संवेदना का प्रतीक है. सूर्य आत्मा है. बिना सूर्य के जीवन संभव नहीं है. बिहार की ही यह संस्कृति है, जिसने ढलते सूर्य की भी पूजा कर दुनिया को सिखाया, कि सम्मान केवल उगते के लिए नहीं, अस्त होने वाले के लिए भी होना चाहिए. दीपोत्सव और छठ भारतीय संस्कृति की वह जीवंत शृंखला है, जो पर्यावरण, शुद्धता, समरसता और विज्ञान को जोड़ता है. छठ में जो सूप, नारियल, ईख और दीप का प्रयोग होता है, वह सब समानता और लोक साझेदारी का प्रतीक है. ये दोनों पर्व भारतीय जीवन में ऊर्जा, प्रेम, और सामाजिक सद्भाव की स्थापना करते हैं.

भारत की सभ्यता ऋषि और कृषि के संगम पर आधारित- प्रो. संजय

विभागाध्यक्ष प्रो. संजय झा ने कहा कि भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी समरसता, सह अस्तित्व और जीवन दर्शन है. भारत की सभ्यता ऋषि और कृषि के संगम पर आधारित है. यहां सूर्य केवल देवता नहीं, बल्कि ज्ञान, ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक है. छठ पर्व में हम सूर्य की उपासना के माध्यम से प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं. दीपोत्सव और छठ दोनों पर्व भारतीय समाज को समानता, स्वच्छता, संयम और सहभागिता का सन्देश देता है. इसमें कोई ऊंच-नीच नहीं, हर व्यक्ति सूर्य को अर्घ्य देकर अपने जीवन में प्रकाश का स्वागत करता है.

भारत की संस्कृति से सीख रहा पश्चिमी समाज- डॉ अमीर अली

प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अमीर अली खान ने कहा कि भारत वास्तव में उत्सवों का देश है. पश्चिमी समाज अब भारत की संस्कृति से सीख रहा है. हमारी आस्था और परंपरा को विश्व सॉफ्ट पावर के रूप में स्वीकार कर रहा है. भारत ने दुनिया को यह सिखाया है कि संस्कृति का अर्थ केवल परंपरा नहीं, बल्कि मानवता और प्रकृति का संतुलन है. छठ पर्व पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का उत्कृष्ट उदाहरण है.

दीप तप और तेज का प्रतीक- डॉ भोला

डॉ भोला झा ने कहा कि दीप और सूर्य दोनों ऋग्वेद से ही जुड़े प्रतीक हैं. दीप तप और तेज का प्रतीक है. यह शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करता है. सूर्य मंदिरों की परंपरा भारत में इसी ऊर्जा और ज्ञान की पूजा का प्रमाण है. संचालन डॉ मनीष कुमार एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज्योति प्रभा ने किया. मौके पर प्रो. नैयर आज़म, डॉ अमिताभ कुमार, मुकेश कुमार, सुखेश्वर, उमेश कुमार, राहुल कुमार, प्रशांत कुमार, राजा कुमार आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
PRABHAT KUMAR

लेखक के बारे में

By PRABHAT KUMAR

PRABHAT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन