इलाज को छटपटाते रहे मरीज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Aug 2016 2:52 AM (IST)
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डीएमसीएच हड़ताल. साढ़े सात बजे काम पर लौटे डॉक्टर दरभंगा : वरीय डॉक्टरों की 12 घंटों की एक दिवसीय हड़ताल से डीएमसीएच की उपचार व्यवस्था चौपट हो गयी. वरीय डॉक्टर ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में घुसकर कामकाज बाधित कर दिये. इसको लेकर अफरातफरी मच गयी. पुर्जा लेकर मरीज डॉक्टरों को इधर-उधर खोजने लगे. ऑपरेशन कराने […]
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डीएमसीएच हड़ताल. साढ़े सात बजे काम पर लौटे डॉक्टर
दरभंगा : वरीय डॉक्टरों की 12 घंटों की एक दिवसीय हड़ताल से डीएमसीएच की उपचार व्यवस्था चौपट हो गयी. वरीय डॉक्टर ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में घुसकर कामकाज बाधित कर दिये. इसको लेकर अफरातफरी मच गयी. पुर्जा लेकर मरीज डॉक्टरों को इधर-उधर खोजने लगे. ऑपरेशन कराने आये मरीज ओटी से लौटने लगे. मरीजों को दवा फोलोअप नहीं हो सका. इधर हड़ताल से मुक्त पीजी डॉक्टरों के हवाले चिकित्सा व्यवस्था रही. इमरजेंसी वार्ड को इस हड़ताल से मुक्त रखा गया था. 12 घंटे की हड़ताल शाम सात बजे समाप्त हो गयी और चिकित्सा व्यवस्था सामान्य रूप से बहाल हुई. यह हड़ताल आइएमए और मासा के आह्वान पर डॉक्टर के हत्या और गैर सरकारी एवं सरकारी चिकित्सा संस्थानों पर हो रहे हमले के विरोध में किया गया.
ओटी ठप : सर्जरी, हड्डी और गायनिक वार्ड के मरीजों का ऑपरेशन ठप रहा. गायनिक वार्ड में गंभीर चार मरीजों का ऑपरेशन हुआ. ओटी से लौटने वालों में डाॅ रामजी ठाकुर यूनिट के सूरज मुखिया, जागेश्वर राम, प्रेमशंकर राम, अंजली व शिव सहनी शामिल हैं.
नहीं हुआ प्लास्टर: पेकटोला नेहरा गांव निवासी उबेदुल्ला की पुत्री रजिया खातुन का बांया पांव टूट गया था. परिजन मरीज को ले सुबह डीएमसीएच पहुंचा था. परिजनों ने बताया कि हड़ताल से पूर्व आज सुबह डॉक्टर ने प्लास्टर कराने की सलाह दी. सुबह आठ बजे से हड्डी रोग ओटी के समाने बैठे हैं लेकिन ऑपरेशन नहीं हो सका है.
डीएमसीएच से परिजनों के साथ लौटते मरीज.
आइएमए ने कराया बंद
आइएमए के सचिव डाॅ कन्हैयाजी झा के नेतृत्व में वरीय डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे. काम कर रहे वरीय और पीजी डॉक्टरों को मरीजों के इलाज करने से मना कर दिया. पुरजा काउंटरों को बंद कर मरीजों को हड़ताल का हवाला देकर सबों को भगा दिया.
लौटे मरीज
नरही गांव निवासी राम बहादुर शर्मा ने बताया कि उनका पांव चापाकल चलाने के दौरान टूट गया है. पांच रुपये देकर पुर्जा भी कटाया लेकिन उनका उपचार नहीं हो पाया. अब वे निजी नर्सिंग होम में इलाज के लिए जा रहे हैं. यही हाल कई मरीज के साथ हुआ.
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