सर्वोच्च न्यायालय का आदेश सुनते आरोपित फरार

Published at :25 May 2016 6:24 AM (IST)
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सर्वोच्च न्यायालय का आदेश सुनते आरोपित फरार

दरभंगा : मनीलैंडिंग के आरोप में फंसे जगदंबा राइस मिल सुरहाचट्टी के मिलर दिवेश कुमार चौधरी की संपत्ति को निलामी से बेचकर एसएफसी का बकाया 15 करोड़ 10 लाख 91 हजार रुपये वसूलने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने जारी किया है. इसके अलावा मोतिहारी जिले के पांच मिलरों पर भी सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी […]

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दरभंगा : मनीलैंडिंग के आरोप में फंसे जगदंबा राइस मिल सुरहाचट्टी के मिलर दिवेश कुमार चौधरी की संपत्ति को निलामी से बेचकर एसएफसी का बकाया 15 करोड़ 10 लाख 91 हजार रुपये वसूलने का आदेश सर्वोच्च न्यायालय ने जारी किया है. इसके अलावा मोतिहारी जिले के पांच मिलरों पर भी सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है. उक्त जानकारी देते हुए एसएफसी के जिला प्रबंधक जय शंकर मंडल ने बताया कि

गबन के आरोपी दिवेश चौधरी ने वर्ष 2012-13 में पूर्व के एसएफसी प्रबंधक रंजना कुमारी के समय एसएफसी का 67 हजार क्विंटल धान अपने राइस मिल में थ्रेसरिंग करने के अनुबंध पर लिया. जो वर्षों बीत जाने के बाद भी चावल कूट कर वापस नहीं किया. बार बार सूचना देने के बावजूद उक्त मिलर ने चावल वापस नहीं किया तो पूर्व प्रबंधक अरविंद कुमार के द्वारा लहेरियासराय थाना में उक्त मिलर के विरुद्ध 14 अप्रैल 2015 को कांड संख्या़ 155 दर्ज किया गया.

आरोपी मिलर झा ने इसके विरुद्ध हाइकोर्ट में राहत के लिए अपील की. कोर्ट ने उसे राहत देते हुए कहा कि गबन किये गये रुपये को 20 प्रतिशत की दर से किस्त के रूप में अदा करें, परंतु आरोपित ने 12 माह बीतने के बावजूद एक भी किस्त जमा नहीं किया. बाध्य होकर विभाग ने गबन का रुपये वसूली को लेकर कानूनी सलाहकार अधिवक्ता विजय कुमार के सहयोग से 12 फरवरी 16 को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की. सर्वोच्च न्यायालय ने 17 मई 16 को उक्त याचिका की सुनवाई के

बाद जो आदेश निर्गत किया उसके अनुसार गबन के आरोपित दिवेश चौधरी के सारे नामी बेनामी संपत्ति को नीलाम कर विभाग का डूबा रुपये वसूल करने का निर्देश दिया है. वहीं एसएफसी प्रबंधक श्री मंडल ने कहा कि मोतिहारी के पांच और मिलर विकास राइस मिल, महाशक्ति राइस मिल, जितेन्द्र राइस मिल, मां भवानी राइस मिल, देवा राइस मिलाें के मिलरों पर भी सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी है. सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आते ही उक्त पर भी कार्रवाई हो सकती है.

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