मूल्यांकन प्रक्रिया में दोष से प्रभावित हो रही है गुणवत्ता शक्षिा

मूल्यांकन प्रक्रिया में दोष से प्रभावित हो रही है गुणवत्ता शिक्षा 7 लाख स्कूली छात्रों का हालनहीं हो रही है वार्षिक परीक्षासतत एवं व्यापक मूल्यांकन की हो रही है खानापूर्तिप्रत्येक वर्ष प्रोमोट होते हैं सभी छात्रदरभंगा. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 7 लाख छात्रों को प्रत्येक वर्ष बिना वार्षिक परीक्षा के अगली कक्षाओं में प्रोमोट […]
मूल्यांकन प्रक्रिया में दोष से प्रभावित हो रही है गुणवत्ता शिक्षा 7 लाख स्कूली छात्रों का हालनहीं हो रही है वार्षिक परीक्षासतत एवं व्यापक मूल्यांकन की हो रही है खानापूर्तिप्रत्येक वर्ष प्रोमोट होते हैं सभी छात्रदरभंगा. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 7 लाख छात्रों को प्रत्येक वर्ष बिना वार्षिक परीक्षा के अगली कक्षाओं में प्रोमोट कर दिये जाते हैं. बच्चे वर्त्तमान कक्षाओं की दक्षता हासिल किया या नहीं यह मायने नहीं रखता, उनको अगली कक्षाओं में जाना है. इन कारणों से उनकी नींव प्रतिवर्ष कमजोर होते जा रही है. वहीं दूसरी ओर इन विद्यालयों में लागू सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रक्रिया धरातल पर नहीं है. जिन प्रक्रियाओं का विभागीय आदेश है, किंतु इसका प्राय: प्रारंभिक विद्यालयों में खानापूर्ति होती है. कभी बच्चों के रिपोर्ट कार्ड तो कभी इनके मूल्यांकन में होने वाले व्यय की स्पष्ट नीति नहीं होने से भी ऐसी स्थिति बनी हुई है. ऐसे में कक्षा 1-8 तक के प्रारंभिक विद्यालयों के छात्रों में किस प्रकार गुणवत्ता शिक्षा हासिल किया जा सकता है. इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है. जबकि सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की सही प्रक्रिया अपनायी जाये तो पाठ के साथ अथवा मासिक मूल्यांकन के बाद कमजोर बच्चों में उपचारात्मक शिक्षा संभव है. इस प्रक्रिया में एक ओर जहां बच्चों को नींव मजबूत होगी. पिछली कक्षाओं की आवश्यक दक्षता उनमें आयेगी तो अगली कक्षाओं की पढ़ाई को समझने में सहुलियत होगी. जब प्रत्येक वर्ष इतने बच्चों को बिना मूल्यांकन के अगली कक्षाओं मेेें प्रोमोशन होता रहे तो प्रत्येक वर्ष उनकी पढ़ाई पिछड़ती जायेगी तथा जब वे हाईस्कूलों में जायेंगे तो उनकी बेसिक आधार ही कमजोर होगा तो लाख प्रयास के बावजूद अपेक्षित दक्षता दिलाना आसान नहीं होगा. बताते चलें कि कुछ वर्ष पूर्व प्रारंभिक विद्यालयों में जब वार्षिक परीक्षा की परंपरा को समाप्त कर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाने का निर्णय लिया गया, किंतु इन प्रक्रियाओं का शिक्षकों को पूरी जानकारी नहीं होना तथा इसके लिए स्पष्ट नीति नहीं होने से ऐसी स्थिति बनी हुई है.
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