Bettiah Raj: खुल गया बेतिया राज के 200 करोड़ के आभूषणों के राज, पटना और प्रयागराज के बैंकों में है राजा का खजाना

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 20 Jan 2025 6:50 PM

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बेतिया न्यूज

Bettiah Raj News: बेतिया राज की संपत्तियों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. जांच के दौरान जब अभिलेखागार के संचिकाओं को खंगालने का काम हुआ तो पता चला कि कहां-कहां राजा का खजाना है.

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Bettiah Raj News: बेतिया राज (कोर्ट ऑफ वार्डस के अधीन) की परिसपंतियों के बिहार सरकार में समाहित होने के बाद सरकारी अमलों में बेतिया राज की भूमि की खोज शुरु की है. भूमि खोज के दौरान जब बेतिया राज के अभिलेखागार में रखे गये अभिलेखों को खंगालने का काम किया गया तो वहां से अन्य कई सौ एकड़ भूमि का पता चला. जिसकी सूची बनाकर राज प्रबंधक ने विशेष सर्वे कार्यालय में जमा करा दिया है. बेतिया राज प्रबंधक के प्रभार में मौजूद अधिकारी अनिल कुमार सिंहा ने जिलाधिकारी दिनेश कुमार राय के माध्यम से विशेष बंदोबस्त पदाधिकारी को भेजे गये पत्र में सामने आये नये जमीनों को भी सर्वे में बेतिया राज के नाम पर दर्ज करने की बात कही है. इधर बेतिया राज के शीशमहल में रखे गये कई ऐतिहासिक धरोहरों को आमजन के दर्शनार्थ भितिहरवा स्थित संग्रहालय को सौंप दिया गया. अब जब अभिलेखागार के संचिकाओं को खंगालने का काम हुआ तो एक चौकानेवाला तथ्य सामने आया.

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बक्सों को खोलने का काम शुरू

बेतिया राज के अभिलेखागार में मौजूद अभिलेख में यह दर्शाया गया है कि बेतिया महारानी जानकी कुंअर के जीवन काल में हीं वर्ष 1939 में कई महत्वपूर्ण हीरे मोती स्वर्णाभूषण एवं अन्य जवाहरात तत्कालीन राज प्रबंधक ने उस समय के इंपीरियल बैंक पटना एवं इंपीरियल बैंक इलाहाबाद के ब्रांच में धरोहर के रुप में सुरक्षित रखवा दिया था. इन आभूषणों एवं कीमती सामानों में मोतियों की माला, नवरत्न नेकलेस, स्वर्ण जड़ित पलंग, सोने का चंद्रहार आदि शामिल हैं. बेतिया राज के अभिलेखागार में प्राप्त अभिलेखों के मिलने के बाद राजस्व बोर्ड ने भी इलाहाबाद के भारतीय स्टेट बैंक प्रयागराज के रिजनल मैनेजर एवं पटना के एसबीआई के डिप्टी जेनरल मैनेजर को पत्र भेजकर इन जवाहरातों की खोज करने की बात कही है. अब बैंक की ओर से इन बक्सों को खोलने का काम आंरभ किया गया है.

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1939 में बैंक में रखते समय जौहरी से कराई गई थी पहचान

अभिलेखों के अनुसार उस समय मुंबई के एक जौहरी ने इलाहाबाद एवं पटना के इंपीरियल बैंक (अब भारतीय स्टेट बैंक) की शाखा में रखे गये जवाहारातों का अनुमानित कीमत वर्ष 1939 में करीब 7 लाख 30 हजार 85 रुपये लगाया था. इसमें इलाहाबाद अब प्रयागराज ब्रांच में रखे गये आभूषणों की कीमत 5 लाख 21 हजार 102 एवं पटना में रखे गये आभूषणों की कीमत 2 लाख 8 हजार 983 रुपये है. उस समय उसने सोने के आभूषणों की कीमत 40 रुपये प्रति तोला, चांदी की कीमत 8 रुपये प्रति तोला लगायी थी. जौहरी की ओर से हीरा जड़ित घड़ी की कीमत उस समय 51 हजार रुपये लगायी गयी थी, जो बैंकों में रखा गया है.

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Paritosh Shahi

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By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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