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सावधान! VTR में सुरक्षित नहीं बाघ, फसल बचाने के लिए जंगल में लग रहे करंट के तार

Updated at : 28 Jan 2026 8:52 PM (IST)
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Valmiki Tiger Reserve Tiger Death

बिहार के वाल्मिकी टाइगर रिर्जव में बिजली की तार की चपेट में आने से बाघ की मौत.

Valmiki Tiger Reserve Tiger Death : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में करंट लगने से बाघ की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या गश्ती दल और ट्रैकिंग टीमें सो रही थीं? जानिए कैसे सिस्टम की लापरवाही ने बिहार की शान को मौत के घाट उतार दिया.

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Valmiki Tiger Reserve Tiger Death : बेतिया/पश्चिम चंपारण : बिहार के इकलौते अभ्‍यारण्‍य वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) में एक बाघ की मौत हो गई. यह मौत सामान्‍य नहीं है. बाघों के संरक्षण के लिहाज से बिहार का गौरव कहे जाने वाले इस VTR में हुई ये मौत सवालों के घेरे में है. इस घटना ने न सिर्फ बाघ प्रेमियों को भी झकझोर दिया है बल्कि वीटीआर प्रशासन और वन्य जीव संरक्षण के सरकार के दावे की भी हवा निकाल दी है. सवाल ये है कि अभ्यारण्य में ये क्या हो रहा है कि एक पूर्ण विकसित बाघ की मौत हो रही है?

अभ्‍यारण्‍य में करंट के तार!

बाघ की मौत का कारण करंट लगना बताया जा रहा है. जो स्वाभाविक तो नहीं है खासकर ऐसी जगह जो जानवरों के संरक्षण के लिए बनाई और तैयार की गई है. मिली जानकारी के अनुसार, एक वयस्‍क बाघ की मौत मांगूरहा वन क्षेत्र में हुई है. यह घटना महज एक ‘दुर्घटना’ नहीं, बल्कि वन विभाग की अक्षमता और लापरवाही का जीवंत प्रमाण है.

लापरवाह वन्य प्रशासन

नियम स्पष्ट हैं, टाइगर रिजर्व के बफर जोन है. इसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में नंगे बिजली के तार बिछाना न केवल अवैध है, बल्कि एक दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. इसे हटाने या हटवाने का काम वन्य विभाग, रेंजर्स और गश्‍ती दल की होती है. ऐसे सवाल यह उठता है कि आखिर वन्‍य जीव संरक्षण के अधिकारी और गश्‍ती दल के लोग कहां थे?

क्‍या नहीं थी बाघ की मौजूदगी की जानकारी?

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि बाघ के चहलकदमी की जानकारी वीटीआर को होती है. उसकी मूवमेंट पर निगाह रखने की जिम्मेदारी तय की गई है. इतना ही नहीं अभ्‍यारण्‍य में बाघों के मूवमेंट वाले इलाके में किसी तरह के नंगे बिजली के तार जाल आदि लगाना पर पाबंदी है. ऐसे में जो कहा जा रहा है कि बाघ की मौत बिजली का करंट लगने से हुई है, ये वन्य विभाग के तमाम अधिकारियों और कार्यशैली पर सवाल उठाने के लिए काफी है. 

बाघ की मौत पर जारी किया गया प्रेस रिलीज

क्‍या कर रहा था गश्‍ती दल?

इलाके में बाघ की चहलकदमी दर्ज की जा रही थी, तो वन विभाग की गश्ती टीम क्या कर रही थी? क्या अधिकारियों को इस बात की भनक नहीं थी कि ग्रामीण अपनी फसलों के बचाव के नाम पर खेतों में मौत का जाल (इलेक्ट्रिक फेंसिंग) बिछा रहे हैं? यदि नहीं तो यह सवाल बिहार सरकार के वन्य जीव संरक्षण के अभियान पर है. जिसके बलबूते वो बिहार में टूरिज्म को बढ़ावा देने का सपना देख रहा है.
इलाके में बाघ की चहलकदमी दर्ज की जा रही थी, तो वन विभाग की गश्ती टीम क्या कर रही थी? क्या अधिकारियों को इस बात की भनक नहीं थी कि ग्रामीण अपनी फसलों के बचाव के नाम पर खेतों में मौत का जाल (इलेक्ट्रिक फेंसिंग) बिछा रहे हैं? यदि नहीं तो यह सवाल बिहार सरकार के वन्य जीव संरक्षण के अभियान पर है. जिसके बलबूते वो बिहार में टूरिज्म को बढ़ावा देने का सपना देख रहा है.

बाघ के मुंह में तार किसकी लापरवाही से असुरक्षित हुआ वीटीआर?

जिम्मेदारी किसकी, केवल कागजी लफबाजी?

वन्यजीव विशेषज्ञ और वीटीआर से जुड़े अधिकारी के अनुसार, अभयारण्य क्षेत्र के आसपास बिजली के अवैध तारों को हटाने, हटवाने और ग्रामीणों को जागरूक करने की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की होती है. यदि वन विभाग ऐसा नहीं करता तो जिम्मेदार इन्‍हीं अधिकारियों की बनती है. ऐसे में इस बाघ की मौत ने बिहार की शान वीटीआर के रेंजर्स के कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सवाल

क्‍या निगरानी का अभाव था? : अगर बाघ जंगल से बाहर निकल रहा था, तो उसकी मॉनिटरिंग के लिए तैनात ट्रैकिंग टीमें कहां थीं?
अवैध तारों पर चुप्पी क्यों? : यदि खेतों की रक्षा के लिए बिजली के करंट वाले तार लगाए गए थे तो विभाग की नाक के नीचे ये कैसे हो रहा था? फिर भी कार्रवाई के लिए बाघ की मौत का इंतजार क्यों?

दो साल के युवा नर बाघ की मौत. जिम्‍मेदार कौन?

‘टाइगर स्टेट’ का सपना या श्मशान?

एक तरफ बिहार सरकार बाघों की संख्या बढ़ने पर खुशी जाहिर करती है. वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सुरक्षा के अभाव में हम अपनी ‘शान’ को खो रहे हैं. पुरैना गांव के पास हुई यह घटना सिस्‍टम की लापरवाही की ओर इशारा करती है. ऐसे में बिहार में बाघों का संरक्षण और उनकी जान भगवान भरोसे है. यदि फसल सुरक्षा संरक्षित जीव बाघों से ज्यादा कीमती है तो इसी तरह मौत के तार बिछते रहेंगे और संरक्षित जीवों की जान अभ्यारण्य में जाती रहेगी. ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब वाल्मीकि टाइगर रिजर्व श्‍मशान बन जाएगा और रिजर्व सिर्फ कागजों पर ही नजर आएगा.

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Keshav Suman Singh

लेखक के बारे में

By Keshav Suman Singh

बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्‍यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्‍स.कॉम बतौर असिसटेंट न्‍यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।

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