अमित हत्याकांड में जांच का बढ़ेगा दायरा
Updated at : 16 May 2018 5:37 AM (IST)
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डीजीपी ने एसपी को दिया कई निर्देश पश्चिम चंपारण जिला बेतिया : जिलाधिकारी डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने कहा है कि पश्चिम चम्पारण जिला बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है. इसलिए विगत वर्षों के अनुभव के आधार पर बाढ़ आपदा के समय कारगर तरीके से निपटने के लिए सभी ऐहतियाती कदम उठाये जा रहे हैं. उन्होंने कहा […]
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डीजीपी ने एसपी को दिया कई निर्देश
पश्चिम चंपारण जिला
बेतिया : जिलाधिकारी डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने कहा है कि पश्चिम चम्पारण जिला बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है. इसलिए विगत वर्षों के अनुभव के आधार पर बाढ़ आपदा के समय कारगर तरीके से निपटने के लिए सभी ऐहतियाती कदम उठाये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बाढ़ आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयारी में है.
इसी कड़ी में हड़बोड़ा एवं पंडई नदी में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम अधिष्ठापित कराया जायेगा. मंगलवार को बाढ़ पूर्व तैयारी की दूसरी समीक्षा बैठक के दौरान डीएम डॉ. निलेश रामचन्द्र देवरे ने कही. उन्होंने कहा कि ऐसे उपाय किये जा रहे हैं ताकि बाढ़ का खतरा कम से कम हो जाय. उन्होंने कहा कि यहां गंडक, पंडई, हड़बोड़ा आदि कई नदियां हैं जिसके चलते जिला के कुछ अंचलों में बाढ़ आने की आशंका बनी रहती है. इसलिए सभी तटबंधों की मरम्मति कराकर इसका समुचित रख-रखाव की संपूर्ण जवाबदेही सभी बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, जल निस्सरण प्रमंडल एवं अन्य सभी नहर प्रमंडलों के अभियंताओं की होगी. बैठक का आयोजन जिला आपदा प्रबंधन शाखा द्वारा किया गया. प्रभारी पदाधिकारी, आपदा प्रबंधन, मनीष कुमार श्रीवास्तव द्वारा बाढ़ पूर्व तैयारियों का एजेंडावार पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन किया गया.
डीएम ने सभी बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, जल निस्सरण प्रमंडल, नहर प्रमंडल, पथ प्रमंडल, ग्रामीण कार्य प्रमंडल, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को उनके द्वारा किये गये कार्य का प्रमाण पत्र समर्पित करने को कहा है. अंचल अधिकारी को इनके क्षेत्रान्तर्गत तटबंध, सड़क जहां बाढ़ के समय कटाव होने की आशंका रहती है का निरीक्षण कर प्रतिवेदन देने के लिए कहा गया है. समीक्षा के क्रम में अंचलाधिकारियों द्वारा बताया गया कि उनलोगों ने अंचल में उपलब्ध सरकारी एवं निजी नावों की मरम्मति करा लिया है.
नाव मालिकों के साथ एकरारनामा कर लिया गया है। गोताखोरों को प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है. डीएम ने सभी नावों का पंजीयन कराने का निर्देश दिया . उन्होंने कहा कि बिना पंजीयन कराये कोई नाव नहीं चलेगी. उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शरणस्थली को चिन्हित कर वहां बुनियादी सुविधाएं बहाल करने का निर्देश दिया. बाढ़ राहत केन्द्रों का संचालन प्रशासन द्वारा किया जायेगा. उन्होंने बताया कि बाढ़ के अवसर पर आवश्यकतानुसार सामुदायिक रसोईघर के माध्यम से बाढ़ पीडि़तों को खाना उपलब्ध करायी जायेगी. सामुदायिक रसोईघर के संचालन की जवाबदेही आईसीडीएस की होगी. वहीं ग्रामीण कार्य प्रमंडल को क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मति करा लेने को कहा गया है. आपदा प्रभारी द्वारा बताया गया कि पुराने मोटरबोट की मरम्मति कराने,
नये मोटरबोट, महाजाल क्रय करने के लिए कार्रवाई की जा रही है. डीएम ने कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल नहर प्रमंडल एवं जल निस्सरण प्रमंडल को स्लुईश गेट का ग्रीजिंग एवं चैनल की साफ-सफाई करा लेने का निर्देश दिया. ताकि बाढ़ का पानी तेजी से निकल जाय। इसके साथ ही बाढ़ के समय सूचना तंत्र को विकसित करने का भी निर्देश दिया. इसके लिए सभी अंचलाधिकारियों को बाढ़ के समय सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए संबंधित व्यक्तियों प्रतिनिधियों का संपर्क संख्या उपलब्ध कराने को कहा. समीक्षा के क्रम में कार्यपालक अभियंता द्वारा बताया गया कि वाल्मीकिनगर एवं मिर्जाटोली में क्षतिग्रस्त पार्ट की मरम्मति करा ली गई है. वहीं रजवटिया में नया पुल बनायी जाने की बात बतायी गयी है.
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