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Bihar News: मोतिहारी में मोबाइल की रोशनी में मरीज को लगा टाका व चढ़ी स्लाइन, अब होगी कार्यवाही

मोतिहारी में बिजली बाधित रहने के दौरान मोबाइल व टॉर्च की रोशनी में मरीज को टांका लगाने व इलाज करने के मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है. मामले में चार सदस्यीय टीम का गठन कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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मोबाइल की रौशनी में मरीज को टांका लगते कर्मी
मोबाइल की रौशनी में मरीज को टांका लगते कर्मी
Prabhat Khabar

मोतिहारी में बिजली बाधित रहने के दौरान मोबाइल व टॉर्च की रोशनी में मरीज को टांका लगाने व इलाज करने के मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है. मामले को लेकर डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने जिला आपदा प्रभारी अनिल कुमार के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम का गठन कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने को कहा है. टीम में जिला आपदा प्रभारी के अलावा यूनिसेफ व अन्य विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है.

जेनेरेटर या बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

टीम को डीएम ने निर्देश दिया है कि जब एक सप्ताह पूर्व बिजली अनापूर्ति की सूचना विभाग की ओर से दे दी गयी थी, तो ऐसे में किस कारण से सदर अस्पताल में जेनेरेटर या बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी. जेनेरेटर की व्यवस्था नहीं रहने के कारण अस्पताल में भर्ती मरीज व इलाज के समय रविवार को यह स्थिति उत्पन्न हुई थी. तकनीकी गड़बड़ी के कारण पांच बजे शाम में बिजली आपूर्ति नहीं हो सकी.

दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी

इस बीच, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जेनेरेटर की व्यवस्था नहीं की. इस लापरवाही के कारण घायल की चिकित्सा मोबाइल की रोशनी में किया गया. यह गंभीर मामला है. रिपोर्ट मिलने के साथ दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. यहां बता दें कि प्रभात खबर की ओर से उक्त खबर को मोबाइल की रोशनी में लगा टांका, चढ़ी स्लाइन शीर्षक से मंगलवार के अंक में पेज एक पर प्रकाशित की थी, जिसके बाद टीम ने जांच टीम गठित कर दी है.

विभाग ने पहले दी थी बिजली कटने की सूचना

बिजली विभाग ने 133 केवीए तार मरम्मत को ले पहले से ही घोषणा कर दी थी कि रविवार को सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक बिजली नहीं रहेगी. तकनीकी गड़बड़ी की वजह से रात नौ बजे बिजली आयी. इस दौरान जिले की 52 लाख की आबादी के लिए बने सरकारी अस्पताल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गयी. विभाग व डीएम के आदेश के बावजूद पिछले दो साल से बिना जेनेरेटर के सदर अस्पताल चल रहा है. हाल तो यह है कि लॉन्ड्री (कपड़ा धुलाई), सफाई का भी टेंडर करीब दो साल से नहीं हुआ है. ऐसे में मरीजों के बिछावन से भी बदबू आती है.

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