क्वालिटी जांच के लिए ईंट ले गयी टीम

Updated at : 03 Jun 2017 8:53 AM (IST)
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क्वालिटी जांच के लिए ईंट ले गयी टीम

12 तक भवन हैंड ओवर नहीं होने से हर माह 10 फीसदी राशि जमा करेंगे ठेकेदार घाटशिला : घाटशिला महाविद्यालय में करीब आठ करोड़ से बन रहे पीजी भवन का शुक्रवार को सीसीडीसी जगदीश प्रसाद मिश्रा और अभियंता शशांक कुमार ने निरीक्षण किया. वे गुणवत्ता की जांच के लिए ईंट का नमूना अपने साथ ले […]

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12 तक भवन हैंड ओवर नहीं होने से हर माह 10 फीसदी राशि जमा करेंगे ठेकेदार
घाटशिला : घाटशिला महाविद्यालय में करीब आठ करोड़ से बन रहे पीजी भवन का शुक्रवार को सीसीडीसी जगदीश प्रसाद मिश्रा और अभियंता शशांक कुमार ने निरीक्षण किया. वे गुणवत्ता की जांच के लिए ईंट का नमूना अपने साथ ले गये. सीसीडीसी ने भवन निर्माण कर रही ठेका कंपनी के मुंशी से कहा कि रजिस्टार का आदेश है कि 12 जून तक भवन हैंड ओवर कर दिया जाय.
12 जून तक संवेदक भवन हैंड ओवर नहीं करता है, तो प्रति माह 10 प्रतिशत के हिसाब से ठेकेदार को राशि जमा करना का आदेश है. ठेकेदार के हाथ में दस दिन बचे हैं. भवन में अभी बहुत काम बाकी है. जल्द भवन का उदघाटन के बाद इस भवन में पीजी की कक्षाएं शुरू करायी जाये.
अभी से सीपेज करने लगी भवन की दीवारें : निरीक्षण में पाया गया कि पीजी भवन की दीवारें अभी से सीपेज करने लगी हैं. सीसीडीसी ने इसका कारण पूछा. मुंशी ने बताया कि भवन का प्लास्टर अंदर से हो गया है.
बाहर की दीवार का प्लास्टर बाकी है. भवन की छत पर पानी का ड्रम रखा गया था. वहीं पर मशाला बनता था. इसके कारण भवन की छत सीपेज कर रहा है. इसे ठीक कर लिया जायेगा. अभियंता ने कहा कि किसी भी दीवार पर पानी जमते नहीं दिखना चाहिए.
अभियंता ने भवन निर्माण में लगनी वाली ईंटों को पटक कर देखा और मुंशी से कहा कि ईंटों को भींगा कर नहीं लगाया जा रहा है. यहां से चार ईंटों को नमूना के तौर पर जांच करने के लिए अपने साथ ले गये.
टॉयलेट की दीवार सही से बनाने का आदेश: अभियंता ने भवन के अंदर छात्राओं के लिए बन रहे टॉयलेट की दीवार सही ढंग से निर्माण कराने का आदेश दिया. उन्होंने दीवार पर लगी ईंट को हाथ से मारा, तो ईंट गिर गयी. अभियंता ने कहा कि जहां पर भी काम सही ढंग से नहीं हुआ है.
उसे ठीक से किया जाय. वे दोबारा आकर भवन देखेंगे. भवन निर्माण में कहीं भी त्रुटि नहीं मिलनी चाहिए. प्राचार्य ने कहा कि नीचे के दोनों तरफ बने भवन में प्राक्कलन में खिड़की लगाने की बात थी. कक्षाओं के दौरान इससे परेशानी होती थी. इसके कारण नीचे के भवनों में खिड़की लगाने से मना किया गया है और उसकी जगह पर दीवार पर टाइल्स लगाने की बात कही गयी है.
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