पांच दशक बीता,पर नहीं मिली जमीन
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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उदासीनता हाल भूदान कार्यालय से गरीबों को दी गयी जमीन का, जिला तक चक्कर लगाते रहे पर्चाधारी मोतिहारी : पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने व उनका आशियाना बसाने में जिला प्रशासन कितना उदासीन है और उसके अधिकारी कितने गैर जिम्मेवार हैं,भूदान कार्यालय द्वारा दिये गये पर्चा को देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है. […]
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उदासीनता हाल भूदान कार्यालय से गरीबों को दी गयी जमीन का, जिला तक चक्कर लगाते रहे पर्चाधारी
मोतिहारी : पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने व उनका आशियाना बसाने में जिला प्रशासन कितना उदासीन है और उसके अधिकारी कितने गैर जिम्मेवार हैं,भूदान कार्यालय द्वारा दिये गये पर्चा को देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है.
पांच दशक पूर्व यानी वर्ष 1965 में जिला भूदान कार्यालय द्वारा 16 एकड़ जमीन 65 जरूरतमंदों को दी गयी थी और उनके नाम से पर्चा निर्गत किया गया थे लेकिन अभी तक दखल दहानी नहीं करायी जा सकी.जानकार बताते हैं कि पर्चा लेने वाले अंचल से लेकर जिला तक चक्कर लगाते रहे और अपनी बेबसी की दास्तां अधिकारियों को सुनाते रहे लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर केवल कागजी घोड़ा दौड़ाया जाता रहा.जिले के पांच प्रखंडों मोतिहारी, मधुबन, कल्याणपुर, सुगौली व मेहसी आदि अंचलों के गरीब व जरूरतमंद किसानों को पर्चा दिया गया था और उस समय के अधिकारियों ने शीघ्र दखल दिलाने का आदेश दिया था.
इन अंचलों के किसानों को दी गयी थी जमीन
अंचल किसानों की संख्या रक्बा
मोतिहारी 10 6.84 एकेड़
मधुबन 17 5.57 एकड़
कल्याणपुर 14 0.01 एकड़
सुगौली 21 3.34 एकड़
मेहसी 03 0. 32 एकड़
जानकार बताते हैं कि पर्चा वर्ष 1965 में मिला था.50 साल हो गये .इतने वर्ष में अब तक कितने पर्चाधारी जिंदा होंगे,यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है.कारण 50 साल का समय कम नहीं होता है.इसकी फिर से जांच होनी चाहिए. बताया गया कि इस बाबत संबंधित अंचलाधिकारियों को कई बार स्मार पत्र दिया गया लेकिन उनके स्तर से कोई पहल नहीं की गयी.कोई जवाब भी नहीं दिया गया. जिसकारण कई तरह की समस्याएं हो रही हैं और सभी कार्रवाई बेनतीजा साबित हो रही है.
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