केंद्रीय मंत्री ने की तिरंगा यात्रा, सीएम की यात्रा कल

Updated at : 17 Apr 2017 6:21 AM (IST)
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केंद्रीय मंत्री ने की तिरंगा यात्रा, सीएम की यात्रा कल

मोतिहारी : सौ साल पहले 16 अप्रैल को किसानों का हाल जानने के लिए बापू जसौलीपट्टी के लिए निकले थे, लेकिन अंगरेज सरकार ने उन्हें चंद्रहिया में जिला छोड़ने का नोटिस दे दिया था, जिसके बाद बापू वहीं से वापस मोतिहारी लौट गये थे, तब बाबू लोमराज सिंह के बुलावे पर बापू हाथी पर सवार […]

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मोतिहारी : सौ साल पहले 16 अप्रैल को किसानों का हाल जानने के लिए बापू जसौलीपट्टी के लिए निकले थे, लेकिन अंगरेज सरकार ने उन्हें चंद्रहिया में जिला छोड़ने का नोटिस दे दिया था, जिसके बाद बापू वहीं से वापस मोतिहारी लौट गये थे, तब बाबू लोमराज सिंह के बुलावे पर बापू हाथी पर सवार होकर जा रहे थे. उन्हें जहां नोटिस दिया गया था,

वह स्थान स्मारक में तब्दील हो चुका है. बापू की मूर्ति के पास अंगरेज सरकार की ओर से दी गयी नोटिस को भी लगाया गया है. आसपास पार्क विकसित करने की कोशिश हो रही है. स्मारक स्थल की बाउंड्री भी करा दी गयी है. इससे हटकर किसानों की बात करें, तो चंद्रहिया व जसौलीपट्टी के लोग कहते हैं कि सौ साल बाद स्थिति और खराब हुई है. केंद्र व राज्य सरकार को शताब्दी वर्ष में किसानों के लिए कुछ ठोस करना चाहिये.

केंद्रीय मंत्री ने
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
18 अप्रैल को यहां से पदयात्र करेंगे, जिसकी तैयारियां चल रही हैं. बाउंड्री का रंग-रोगन कराया गया है. उस पर स्लोगन लिखवाये गये हैं. जिला प्रशासन की ओर से तमाम तरह के इंतजाम किये जा रहे हैं. मुख्यमंत्री जिस रास्ते से पदयात्र करेंगे, उसको दस दिन पहले पीसीसी कर दिया गया है. इसके दोनों ओर मिट्टी भरने का काम रविवार को हो रहा था. इस बीच दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री की सुरक्षा की जांच के लिए पटना से टीम चंद्रहिया पहुंची. उसने कार्यक्रम स्थल को देखा.
कुछ जरूरी निर्देश मौके पर मौजूद अधिकारियों को दिये और मोतिहारी के लिए रवाना हो गये. कुछ देर बाद एसडीओ, अरेराज मौके पर पहुंचे. बताया गया कि यहां की तैयारियों का जिम्मा इन्हें ही दिया गया है. चंद्रहिया के गांधी स्मारक पर काम करनेवाले कृष्णा को 14 महीने का वेतन नहीं मिला है. वह कहते हैं कि फरवरी महीने के बाद पैसा मिलना शुरू हुआ, लेकिन पुराना वेतन नहीं मिल पाया है. कृष्णा को 15 सौ रुपये मिलते हैं. वह कहते हैं कि 1996 से इस स्थान का कायाकल्प होना शुरू हुआ था. तत्कालीन डीएम दीपक कुमार ने बाउंड्री करवायी थी. उसके बाद नर्मदेश्वर लाल की ओर से काम कराया.
चंद्रहिया पंचायत में चार राजस्व गांव हैं, जिनमें केवल चंद्रहिया में काम होने की बात गांव के मुखिया कहते हैं. वह कहते हैं कि मुख्यमंत्री की यात्र को लेकर प्राथमिकता के आधार पर गांव की मुख्य सड़क को बनाया गया है. मुख्यमंत्री की यात्र से दो दिन पहले केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह के नेतृत्व में तिरंगा यात्र निकाली गयी, जिसमें मुजफ्फरपुर से बापू का वेष धर कर पहुंचे राजेंद्र कुमार राठौर व केंद्रीय मंत्री शामिल हुये. बापू स्मारक पर माल्र्यापण किया गया. इसके बाद चार योजनाओं का शिलान्यास किया. इनमें पांच एकड़ में पौधरोपण की भी योजना भी शामिल है. गांव के स्कूल परिसर में आयोजन हुआ,
लेकिन केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वहां भाषण नहीं दे सके. चंद्रहिया के बाद केंद्रीय मंत्री की तिरंगा यात्र जसौलीपट्टी भी गयी. वहां भी स्कूल परिसर में समारोह हुआ और केंद्रीय मंत्री ने कई योजनाओं का शिलान्यास किया. चंद्रहिया में गांधी स्मारक के सामने रहनेवाले लोग बड़ी कौतूहल से आने-जाने वालों को देख रहे हैं. ये लोग यह जानते हैं कि गांव में कुछ होनेवाला है, लेकिन गांधी जी कौन थे और उन्होंने क्या किया था. इसकी जानकारी इन्हें नहीं हैं.
गांव में पचरून की दुकान पर बैठे मैट्रिक के छात्र मुकेश कहते हैं कि यहां और सब ठीक है, लेकिन धूल की समस्या है. शमसाद आलम गांव में बाल काटने का काम करते हैं. कहते हैं कि अब हम नयी जगह पर दुकान लगाने जा रहे हैं. इनके चाचा ने गांधी स्मारक के आगे दुकान ली है. यह कहते हैं कि गांव में काम हुआ है, लेकिन किसानों का भला नहीं हुआ.
जमीनी हकीकत की बात करें, तो चंद्रहिया गांव में सड़क बन चुकी है, लेकिन जसौलीपट्टी में सड़क बनने का काम चल रहा है. यहां बाबू लोमराज सिंह की प्रतिमा लगी है. उनका आवास अब जीर्ण-शीर्ण हो चुका है. वर्तमान में परिवार के सदस्यों ने अलग-अलग घर बना लिये हैं. पास में ही मुखिया पति कमलेश सिंह का आवास है, जहां गांव के लोग जुटे हैं, जो तिरंगा यात्र में भाग लेने की तैयारी में हैं.
इसी गांव में स्थानीय विधायक सचींद्र प्रसाद की ससुराल भी है, जिससे गांव के लोगों में यात्र को लेकर उत्साह और ज्यादा है. गांव के रहनेवाले विनय कुमार सिंह कहते हैं, यात्रएं भले ही हो रही हैं, लेकिन सौ साल बाद किसानों की समस्याएं और बढ़ी हैं. बापू ने जिस उद्देश्य को लेकर चंपारण की यात्र की थी. वो अभी तक पूरी नहीं हुई है. जसौलीपट्टी के मुखिया पति भी किसानों और किसानी का सवाल उठाते हैं. कहते हैं कि जब तक मोतिहारी व चकिया चीनी मिल चल रही थी, यहां के किसानों का अच्छा समय था, लेकिन चीनी मिल बंद होने के बाद हालत खराब हुई है. गन्ने की खेती कम हुई है, जो लोग खेती करते हैं.
उन्हें गोपालगंज की चीनी मिल का सहारा लेना पड़ता है, जहां औने-पौने दाम पर गन्ना बेचना पड़ता है. गांव के रहनेवाले अवधेश सिंह भी किसानों की दुर्दशा की बात कहते हैं. साथ ही वह कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में गांव के लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक हुई है. उसके पीछे यहां के लोगों का पलायन है. बड़े महानगरों में काम करके लोग अपने घरों को पैसा भेजते हैं.बॉक्स..केंद्रीय मंत्री समेत छह ने चंद्रहिया को लिया गोद केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह समेत छह संस्थाओं ने चंद्रहिया को गोद लिया है. इनमें इफ्को, आइसीइआर, केंद्रीय विवि मोतिहारी, रोटरी, मोतिहारी व डॉ चंद्र सुभाष शामिल हैं.
डॉ चंद्र सुभाष हड्डी के डॉक्टर हैं. उन्होंने गांव के लोगों की हड्डी संबंधी समस्याओं के नि:शुल्क इलाज की घोषणा कर रखी है. गांव में कुछ जगहों पर सोलर लाइट लगी है, जो इफ्को की ओर से लगवायी गयी है. नाबार्ड की ओर से एक भवन बनाया जा रहा है. गांव के लोग कहते हैं कि जिन लोगों ने हमारे गांव को गोद लिया है. उन्हें बताना चाहिये कि उन्होंने बीते महीने में यहां के लिए क्या किया है. स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए बेंच नहींचंद्रहिया के स्कूल में हजार से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं.
गांव के मुखिया शत्रुघ्न दास कहते हैं कि स्कूल भवन की हालत ठीक नहीं है. बच्चों के बैठने के लिए बेंच नहीं है. तिरपाल पर बैठ कर पढ़ाई होती है. स्कूल में एक भी शौचालय नहीं है और न ही अभी तक बनने का प्रस्ताव है. स्कूल में पढ़नेवाले बच्चियों को इससे विशेष परेशानी होती है.गांधी प्रतिमा से उखड़ रहा पेंटमुख्यमंत्री की सुरक्षा का जायजा लेने पहुंची टीम ने गांधी प्रतिमा को देखा,
तो उससे पेंट की पपड़ी उखड़ रही थी, जिसकी सूचना उसने मौके पर मौजूद बीडीओ अश्विनी कुमार को दी, जिन्होंने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को इसके बारे में अवगत कराया. सुरक्षा टीम के सदस्यों की ओर से उठाये गये इस सवाल को लेकर मौके पर चर्चा भी हो रही थी.
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