100 महादलित बच्चों को गोद लेकर पढ़ा रहे केबीसी विजेता सुशील

मोतिहारी : क से कबूतर..ख से खरगोश…ग से गमला…के बोल कोटवा प्रखंड के मच्छरगांवा की मुसहर बस्ती में गूंज रहे थे, जब हम छुट्टी के दिन रविवार को शाम चार बजे पहुंचे. कुछ ही देर में बच्चे 20 तक का पहाड़ा पढ़ने लगे. एक बच्चा पढ़ता और सब दोहराते. इसके बाद पाठ पढ़ने का सिलसिला […]
मोतिहारी : क से कबूतर..ख से खरगोश…ग से गमला…के बोल कोटवा प्रखंड के मच्छरगांवा की मुसहर बस्ती में गूंज रहे थे, जब हम छुट्टी के दिन रविवार को शाम चार बजे पहुंचे. कुछ ही देर में बच्चे 20 तक का पहाड़ा पढ़ने लगे. एक बच्चा पढ़ता और सब दोहराते. इसके बाद पाठ पढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ, तो उसे भी बच्चे दोहराने लगे.
मेहनत-मजदूरी करके अपना और परिजनों का पेट पालनेवालों की इस बस्ती में शिक्षा का उजाला केबीसी विजेता सुशील कुमार की वजह से आ रहा है, जिन्होंने लगभग एक साल पहले इस बस्ती के बच्चों को पढ़ाने का फैसला लिया. इसके लिए दो शिक्षक नियुक्त किये और जब एक बार पढ़ने-पढ़ाने का सिलसिला शुरू हुआ, तो फिर हालात बदलने लगे.
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