लापरवाही. सदर अस्पताल कैंपस में रो-रोकर फरियाद कर रहे थे परिजन

Updated at : 06 Apr 2016 6:58 AM (IST)
विज्ञापन
लापरवाही. सदर अस्पताल कैंपस में रो-रोकर फरियाद कर रहे थे परिजन

पुरजा के चक्कर में एक बच्ची की मौत हाल ही बेहतर चिकित्सा सुविधा देने को ले मोतिहारी सदर अस्पताल को अव्वल स्थान मिला है, लेकिन इनकी व्यवस्था के कारण मंगलवार को एक बच्ची की जान चली गयी. मोतिहारी : एक ओर जहां मोतिहारी सदर अस्पताल को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने में बिहार में अव्वल स्थान […]

विज्ञापन

पुरजा के चक्कर में एक बच्ची की मौत

हाल ही बेहतर चिकित्सा सुविधा देने को ले मोतिहारी सदर अस्पताल को अव्वल स्थान मिला है, लेकिन इनकी व्यवस्था के कारण मंगलवार को एक बच्ची की जान चली गयी.
मोतिहारी : एक ओर जहां मोतिहारी सदर अस्पताल को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने में बिहार में अव्वल स्थान मिला था. वहीं, दूसरी तरफ एक वृद्ध व्यक्ति अपनी पौत्री के इलाज के लिए सदर अस्पताल में पूर्जा ले इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन इलाज नहीं हुआ. अंतत: उसकी मौत हो गयी.
बताया जाता है कि पीपराकोठी थाना के चांदसरइया गांव निवासी अस्सी वर्षीय वृद्ध हाफिज मियां अपनी एक वर्षीय पौत्री फातिमा नेशा को ले मोतिहारी सदर अस्पताल पहुंचे. वह तीन चार दिनों से बुखार से पीड़ित थी. उसे पीपराकोठी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में लेकर गये जहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बताया गया कि मोतिहारी सदर अस्पताल जाओ. बूढ़ी काया लिए जैसे-तैसे वृद्ध सदर अस्पताल पहुंचे. सदर अस्पताल पहुंचने के बाद लोगों ने ओपीडी में पूर्जा कटाने को कहा.
ओपीडी से पूर्जा कटाने के बाद उन्हें 16 नंबर कक्ष में जाने को कहा गया, लेकिन वहां चिकित्सक नहीं थे. लोगों ने बताया कि इमरजेंसी में दिखाइये. वृद्ध दौड़ते हुए इमरजेंसी का पूर्जा कटाया और इमरजेंसी में बैठे चिकित्सक से पूर्जा दिखाया तो इमरजेंसी वार्ड में कार्यरत कर्मचारियों ने उन्हें 13 नंबर शिशु रोग विशेषज्ञ के कक्ष में जाने को कहा. जहां चिकित्सक कक्ष में नहीं थे.
मरीजों की लंबी लाइन लगी थी. इसी बीच फातिमा की मौत हो जाती है. रोते बिलखते वृद्ध अपनी पौत्री का शव बड़ी पौत्री के हाथों सौंप लोगों से अपनी फरियाद सुनाते हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था. वहीं, पत्रकार द्वारा पूछे जाने पर लोगों की भीड़ जुटी और ढांढ़स बंधाया.
अस्पताल में ये है चिकित्सकों का ड्यूटी चार्ट: सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक, फिर दो बजे दोपहर से रात्रि आठ बजे तक, रात्रि आठ बजे से सुबह दो बजे तक, सुबह दो बजे से सुबह आठ बजे तक वार्डों में चिकित्सकों की ड्यूटी होती है, लेकिन यहां इमरजेंसी को छोड़ अन्य विभागों के चिकित्सक 11-12 बजे कक्ष में बैठते हैं. जबकि मरीज नौ बजे से ही जुटने लगते हैं़ यदि नौ बजे से चिकित्सक बैठते तो इतनी भीड़ नहीं होती.
इमरजेंसी में बैठे चिकित्सक को मरीज को देखना चाहिए : इमरजेंसी में बैठे चिकित्सक द्वारा फातिमा को देखा जाता तो उसकी मौत नहीं होती. इमरजेंसी वार्ड इस लिए खोला गया है कि कोई मरीज गंभीर स्थिति में आये तो उसका त्वरित इलाज हो. सामाजिक कार्यकर्ता कैप्टेन अब्दूल हामीद प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन