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नहर के अंतिम छोर तक नहीं पहुंचा पानी, परती रह गयी सैकड़ों एकड़ खेतधान रोपनी हुआ प्रभावित

Updated at : 23 Jul 2024 7:05 PM (IST)
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नहर के अंतिम छोर तक नहीं पहुंचा पानी, परती रह गयी सैकड़ों एकड़ खेतधान रोपनी हुआ प्रभावित

Water did not reach the end of the canalPaddy plantation affected

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23 जुलाई=फ़ोटो :- सूखा पड़ा सोनपा राजवाहा. राजपुर. प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र के कई गांव में अभी भी नहर के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा है. पानी नहीं पहुंचने से अभी भी सैकड़ों एकड़ खेत परती रह गयी है. इस बार अनियमित मानसून ने किसानों को मायूस कर दिया है. समय पर वर्षा नहीं होने से किसानों ने किसी तरह से धान के बिचड़ा को डीजल पंपसेट चलाकर सिंचाई किया. फिर भी खेतों में उड़ रहे धूल को देख किसानों के सामने काफी चिंता की लकीरें खींच गयी है. बावजूद किसानों ने कड़ी मशक्कत कर इलेक्ट्रिक मोटर एवं डीजल इंजन पंपसेट चलाकर धीरे-धीरे धान रोपने का काम शुरू कर दिया. अभी भी खेतों में सिर्फ जीवन रक्षक पानी ही मौजूद है. जिससे धान की पैदावार पर इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ेगा. धान की भौगोलिक दशा के अनुसार नियत तापमान एवं पानी की काफी जरूरत होती है. ऐसे में इस बार तापमान भी अधिक हो रहा है, जिससे खेतों में लगा पानी तुरंत सूख जा रहा है. धान की उपज बहुत कम होने की उम्मीद हो गयी है. पिछले एक सप्ताह से नहर में सिंचाई विभाग की तरफ से पानी दिया गया है. यह पानी भी पर्याप्त मात्रा में नहीं है. जो पानी उपलब्ध है उस पानी से नहर के ऊपरी छोर पर बसे दर्जनों गांव के किसानों ने नहर में ही डीजल पंपसेट चलाकर धान की रोपनी करना शुरू कर दिया है. पश्चिमी क्षेत्र के मंगराव, संगराव, ईटवा, हंकारपुर, नागपुर, रामपुर, बारुपुर के अलावा कई अन्य गांव के किसान अब भी पानी की आस लगाये बैठे हैं. प्रतिदिन खेतों का भ्रमण कर निराश होकर वापस लौट जा रहे हैं. क्षेत्र के किसान अमित राय, प्रगतिशील किसान मिथिलेश पासवान, संजय सिंह, दयानंद मौर्य के अलावा अन्य किसानों ने बताया कि नहर में पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं होने से अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच रहा है. ऐसे में धान रोपने का काम पूरी तरह से प्रभावित है. अगर 15 अगस्त तक धान की रोपनी नहीं हुई तो इसके बाद धान की रोपनी करने पर फसल का उत्पादन नहीं होगा. यह किसानों के लिए काफी चिंता का विषय बन गया है. जिन किसानों के पास सबमर्सिबल है, वह पानी दे रहा है. ऐसे में किसान काफी मायूस हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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