बक्सर के नावानगर में एथनॉल प्लांट में गड़बड़ी का आरोप, टैंकर नंबरों और फर्जी चालान का मामला उजागर, जांच की मांग

Published by : Ragini Sharma Updated At : 01 Jun 2026 9:38 AM

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Buxar News: बक्सर के नावानगर क्षेत्र में एथनॉल टैंकर वाहनों के नंबर प्लेट के दुरुपयोग और 38 फर्जी माइनिंग चालान जारी होने का गंभीर मामला सामने आया है. कंपनी के सीएमडी अजय कुमार सिंह ने पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना में शिकायत दर्ज कराकर विस्तृत जांच की मांग की है.

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Buxar News: (त्रिलोकी चौबे) बिहार में वाहन पंजीकरण अभिलेखों में कथित छेड़छाड़, फर्जी मोबाइल नंबर दर्ज कर माइनिंग चालान जारी करने और एथनॉल टैंकरों के नंबर प्लेट के दुरुपयोग का गंभीर मामला प्रकाश में आया है. सिंह इंफ्राटेल प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी अजय कुमार सिंह ने इस मामले को लेकर पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने हेतु आवेदन दिया है और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.

एथनॉल टैंकरों के नाम पर फर्जी चालान का आरोप

शिकायत के अनुसार कंपनी के छह एथनॉल टैंकर वाहनों के नाम पर अरवल जिले के माँ वैष्णवी एंटरप्राइज बालू घाट से बालू ढुलाई के लिए माइनिंग चालान जारी किए गए, जबकि संबंधित वाहन केवल एथनॉल परिवहन कार्य में उपयोग किए जाते हैं.कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इन वाहनों का बालू खनन या ढुलाई से कोई संबंध नहीं है. इसके बावजूद उनके नाम पर चालान जारी होना गंभीर अनियमितता को दर्शाता है.

मोबाइल नंबर बदलने और OTP सिस्टम पर सवाल

अजय कुमार सिंह ने बताया कि अरवल खनन विभाग से प्राप्त दस्तावेजों में एक मोबाइल नंबर (9304649925) दर्ज पाया गया, जो न तो उनका है और न ही कंपनी के किसी कर्मचारी का. जांच में यह भी सामने आया कि परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज अधिकृत मोबाइल नंबर को कथित रूप से बिना अनुमति बदल दिया गया. जबकि नियमों के अनुसार माइनिंग चालान जारी करने से पहले वाहन पंजीकरण में दर्ज मोबाइल नंबर पर OTP भेजकर सत्यापन किया जाता है.

38 फर्जी चालान जारी होने का दावा

कंपनी के अनुसार अब तक उनके वाहनों के नाम पर कुल 38 माइनिंग चालान जारी किए जा चुके हैं. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी संगठित गिरोह द्वारा वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर फर्जी चालान जारी किए जा रहे हैं. शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि जाली नंबर प्लेट के माध्यम से अवैध बालू ढुलाई की जा सकती है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है बल्कि भविष्य में निर्दोष वाहन मालिकों को कानूनी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है.

उच्च स्तरीय जांच और FIR की मांग

सीएमडी अजय कुमार सिंह ने पुलिस से प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की है. उन्होंने वाहन अभिलेखों में किए गए सभी बदलावों की जांच, दोषियों की पहचान तथा संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है. इस संबंध में शिकायत की प्रतिलिपि बिहार के पुलिस महानिदेशक, वरीय पुलिस अधीक्षक पटना, मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और परिवहन विभाग के सचिव को भी भेजी गई है.

बड़े नेटवर्क की आशंका

अजय कुमार सिंह ने आशंका जताई है कि यह मामला केवल उनकी कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यदि गहराई से जांच की जाए तो राज्य स्तर पर वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड और माइनिंग चालानों के दुरुपयोग का बड़ा नेटवर्क सामने आ सकता है. उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की अपील की है.

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