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दिमागी बुखार को लेकर प्रखंडों में गठित की जा रही टास्क फोर्स

सूबे में बढ़ती गर्मी और तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी के कारण चमकी बुखार और जापानी इंसेफेलाइटिस प्रबंधन को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति काफी सतर्क है.

बक्सर.

सूबे में बढ़ती गर्मी और तापमान में हो रही बढ़ोत्तरी के कारण चमकी बुखार और जापानी इंसेफेलाइटिस प्रबंधन को लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति काफी सतर्क है. इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर जिला स्तर के साथ साथ सभी प्रखंडों में टास्क फोर्स गठित किया जा रहा है, ताकि आपात स्थिति में दिमागी बुखार के मामलों पर काबू पाया जा सके. साथ ही आशा कार्यकर्ताओं का क्षमतावर्द्धन किया जा रहा है, जिससे वो अपने अपने क्षेत्रों में लोगों को चमकी बुखार के लक्षणों से अवगत कराने में जुट गयी हैं. वहीं आशा आपात स्थिति में एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 102 पर डायल करने की जानकारी लोगों तक पहुंचायेंगी. जो लोगों के लिए नि:शुल्क संचालित किया जायेगा.

सिविल सर्जन डॉ सुरेश चंद्र सिन्हा ने बताया कि राज्य मुख्यालय से प्राप्त निर्देशों के आलोक में टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है. साथ ही शिक्षा विभाग से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है. जिससे स्कूली बच्चों को दिमागी बुखार के प्रति जागरूक किया जा सके. स्कूलों में शिक्षकों के माध्यम से बच्चों को एइएस और जापानी इंसेफेलाइटिस के बारे में जागरूक किया जायेगा. बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास के माध्यम से एइएस के बचाव से संबंधित वीडियो प्रदर्शित किया जायेगा. साथ ही, सभी स्कूलों की दीवारों पर एइएस जापानी इंसेफेलाइटिस और चमकी की धमकी का शपथ पत्र अंकित की जायेगा. वहीं मिड डे मील के माध्यम से सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय में प्रोटीन युक्त भोजन प्रदान करना सुनिश्चित किया जायेगा.

अतिकुपोषित बच्चों को एनआरसी में भेजा जायेगा :

सिविल सर्जन ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से समुदाय को इसके बारे में जागरूक किया जायेगा. जिले के अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित करते हुए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा जाये. जीविका दीदी के माध्यम से समुदाय के इसके प्रति लोगों को जागरूक किया जायेगा. सभी पंचायती राज संस्थान के सदस्यों को इस बीमारी के बारे में जागरूक करते हुए उनके माध्यम से समुदाय को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जायेगा. उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में सूअर पालन का कार्य किया जा रहा है. उन गांवों से जिला प्रशासन की मदद से सूअर बाड़ों को दूर स्थापित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. महादलित टाेलों में विकास मित्र की सहायता से समुदाय को इस बीमारी के बारे में जागरूक किया जायेगा. जन वितरण प्रणाली के माध्यम से पत्र लाभुकों को अनाज का वितरण किया जायेगा. साथ ही, मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन एंबुलेंस योजना के तहत गंभीर रोगियों को तत्काल रेफरल की व्यवस्था करने हेतु वाहनों से जोड़ा जायेगा. मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना अंतर्गत अनुदानित वाहनों की सूची स्वास्थ्य विभाग को भी उपलब्ध करायी जायेगा. जिसका उपयोग आपात स्थिति में किया जा सके.

लोगों को दी जा रही है लक्षणों की जानकारी :

अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (डीवीबीडीसीओ) डॉ शैलेंद्र कुमार ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा लोगों को बताया जा रहा है कि सर दर्द तेज बुखार रहना, जो 5 से 7 दिनों से ज्यादा का ना हो, अर्ध चेतना एवं मरीज में पहचान की क्षमता न होना, भ्रम की स्थिति में होना, बच्चों का बेहोश हो जाना, शरीर में चमक होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना, पूरे शरीर या किसी खास अंग में लकवा मार देना या हाथ पैर का अकड़ जाना, बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक संतुलन ठीक न होना चमकी बुखार के लक्षण है. इनमें कोई भी लक्षण दिखने पर अविलंब चिकित्सकीय परामर्श लेने की बात कही जा रही है. साथ ही अभिभावकों को सामान्य उपचार एवं सावधानियों के प्रति जानकारी दी जा रही है. जैसे वो अपने बच्चों को तेज धूप से बचाएं, बच्चों को दिन में दो बार स्नान कराएं, गर्मी के दिनों में बच्चों को ओआरएस अथवा नींबू पानी व चीनी का घोल पिलाएं. वहीं, सबसे जरूरी बात यह कि रात में बच्चों को खाना खिलाकर ही सुलाएं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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